Showing posts with label Rajpurohit News. Show all posts
Showing posts with label Rajpurohit News. Show all posts

Saturday, 27 January 2024

वरिष्ठ पत्रकार व समाजसेवी ओम सिंह राजपुरोहित का जीवन परिचय

हेलो दोस्तों मैं शौर्य प्रताप (सवाई) सिंह राजपुरोहित जीवन परिचय की इस श्रृखला में मैं लेकर आया हूँ वरिष्ठ पत्रकार व समाजसेवी, राजपुरोहित समाज रत्न श्री ओम सिंह राजपुरोहित का जीवन परिचय वैसे यह शख्स किसी परिचय के मोहताज नहीं है आज इन्हें लाखो लोग जानते हैं आपने अपनी लेखनी के माध्यम से समाज उत्थान से कई कार्यो को उजागर किया है आईए जानते हैं इनका संक्षिप्त में परिचय....

◆ नाम - श्री ओम सिंह राजपुरोहित

◆ पिताजी का नाम - श्री गोपाल सिंह राजपुरोहित

◆ गौत्र (उपजाति)- सेवड़ ◆ वर्तमान निवास - बिलाड़ा

◆ कार्य / व्यवसाय - राजस्थान पत्रिका, समाचार संपादक, पुणे

◆ रुचि - समाज सेवा और देश-दुनिया की जानकारी रखना।

◆ अब तक प्राप्त सम्मान / अवॉर्ड - राजपुरोहित समाज रत्न, राजस्थान पत्रिका के विशेष कॉलम कड़वा-मीठा सच के दो राज्य स्तरीय एवं तीन संभाग स्तर पर सर्वश्रेष्ठ लेखनी के पुरस्कार, रामनाथ गोयनका सर्वश्रेष्ठ पत्रकारिता पुरष्कार।

◆- वर्ष 1984 से राजस्थान पत्रिका में संवाददाता, सिरोही जिले के रेवदर से शुरुआत हुई, पश्चात वर्ष 1990 में बिलाड़ा पैतृक गाँव से रिपोर्टर पश्चात वर्ष 2000 में जोधपुर संस्करण में उप-संपादक पद पर कार्यरत, वर्ष 2019 में सेवानिवृति पश्चात पत्रिका के विशेष आग्रह पर पुणे कार्यालय प्रभारी एवं समाचार संपादक पद पर कार्यरत हूँ, इस दौरान कोरोना वायरस का स्टेन निकालने वाले डॉक्टर प्रभा अब्राहम से विशेष वार्ता, टीका निर्माण करने वाले सीरम इंस्टिट्यूट के निदेशक अदार पूनावाला से विशेष भेट वार्ता जो दुनिया का पहला इंटरव्यू माना गया हैं, इसके अलावा महाराष्ट्र की राजनीति, विधानसभा चुनाव कवरेज, देश में सर्वश्रेष्ठ कृषि करने वाले किसानो की उपलब्धियों के अलावा कई ऐतिहासिक कवरेज कर पत्रकारिता क्षेत्र को चौंकाया।

      राजस्थान पत्रिका के विशेष कॉलम कड़वा-मीठा सच के दो राज्य स्तरीय एवं तीन संभाग स्तर पर सर्वश्रेष्ठ लेखनी के पुरस्कार प्राप्त किये, इनके अलावा कर्पूरचन्द कुलिश द्वारा प्रारम्भ किये गए आओ गाँव चले की थीम पर 160 गाँवों की यात्रा कर वहां की कहानियां लिखी, पत्रकारिता के अलावा राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का प्रथम वर्ष प्रशिक्षण प्राप्त किया तथा 1989 की पहली कारसेवा में अशोक सिंघल के साथ रहा, पश्चात अन्य सभी कारसेवा में भी भागीदारी रही, कारसेवको की हत्या के पश्चात विश्व हिन्दू परिषद् ने अयोध्या में 40 दिवसीय आंदोलन चलाया उसका दायित्व मेरे सहित दो अन्य साथी किशनगढ़ एवं मुंबई को सौपा तथा राम जानकी महल ट्रस्ट में आने वाले देश विदेश के उच्च अधिकारियो जिनमें हरिहर डालमिया, महंत अवैध्य नाथ, राजमाता विजया राजे सिंधिया, मोरो पंथ पिंगले, दत्तो पथ ठेगरी, महंत नृत्य गोपाल दास, रामचंद्र परम हंस, उमा भारती, साध्वी ऋतंबरा, शिवा सरस्वती, आचार्य धर्मेन्द्र, गिरिराज किशोर जैसे बड़े लोगो के नेतृत्व में प्रतिदिन देवरा बाबा की छावनी के मंच से इनका उद्धबोधन करा गिरफ़्तारी के ले जाने का दायित्व निभाया।

06 दिसंबर की कारसेवा के दौरान पत्रिका के लिए गोपाल शर्मा के साथ रिपोर्टिंग भी की। श्री राम मंदिर में कर सेवकों के योगदान के बारे में बताते हुए श्री राजपुरोहित का यह वीडियो आप देख सकते हैं राजपुरोहित समाज इंडिया यूट्यूब चैनल पर
👇👇 

 सामाजिक क्षेत्र में ब्रह्मधाम आसोतरा में 7 वर्षो तक बिलाड़ा, भोपालगढ़ क्षेत्र से न्यासी के रूप में सेवाएं दी, इस दौरान बाडमेर-जैसलमेर क्षेत्र से सांसद पद के लिए भाजपा के जोगराज सिंह को टिकट दिया गया तो संपूर्ण न्यासियों के साथ प्रचार का कार्य किया। स्थानीय स्तर पर राजपुरोहित आश्रम समिति बिलाड़ा बाणगंगा तीर्थ धाम पर अध्यक्ष के रूप में सांसद कोष से कई निर्माण कार्य भी करवाएं।

      राजपुरोहित पंचायत समाज पुष्कर की और से वर्ष 2019 में समाज रत्न के रूप में अभिनन्दन पत्र देकर सम्मानित किया तथा जिला प्रशाषन एवं उपखण्ड स्तर पर भी समाज सेवा के कार्यो के रूप में प्रसस्ति पत्र प्राप्त किये गए हैं।

      राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के काल के दौरान उनकी उपलब्धियों को कीर्तिमान नाम की एक पुस्तिका जिसका विमोचन कभी वे स्वयं तो कभी उनके मंत्रिमण्डल के बड़े नेता करते रहे है|

 पत्रकारिता क्षेत्र में उत्कृष्ठ योगदान के लिए बिलाड़ा के वरिष्ठ पत्रकार श्री ओमसिंह राजपुरोहित को गणतंत्र दिवस (26 जनवरी 2024) के अवसर पर उपखण्ड मजिस्ट्रेट, पुलिस प्रशासन, नगर पालिका प्रशासन एवं राजस्व विभाग की ओर से प्रशस्ति पत्र एवं स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। 

आप राजपुरोहित समाज इंडिया पर इससे संबंधित खबरों को विस्तार से पढ़ सकते हैं

https://rajpurohitsamaj-s.blogspot.com/2024/01/Omsinghrajpurohit.html

वरिष्ठ पत्रकार श्री ओम सिंह जी राजपुरोहित आप आगे भी समाज उत्थान व समाज क्षेत्र में इसी प्रकार कार्य करते रहें टीम सुगना फाऊंडेशन की ओर से बहुत-बहुत बधाई और शुभकामनाएं

अगर इस मंच पर आप भी अपना जीवन परिचय देखना चाहते हैं तो हमें लिख भेजिए हमारे व्हाट्सएप नंबर 9286464911 पर 

आपका शौर्य प्रताप सिंह राजपुरोहित मीडिया प्रभारी सुगना फाउंडेशन और आरोग्य मेला समिति

Monday, 20 March 2017

नरपत सिंह राजपुरोहित के नाम से थर्राते है नक्सली

नरपतसिंह राजपुरोहित  के नाम से थर्राते है नक्सली

थार के रेगिस्तान में जहां दूर दूर तक छितराई ढाणियां नजर आती है, कहीं लोग पानी का जुगत लगाते नजर आते है, तो कहीं पशु पक्षी छाया ढूढने के लिए दर ब दर भटकतेहै। ऐसी कठिन जीवन शैली मेंही जाबांज और यौद्धा पैदा होते है। बाड़मेर जिले के चौहटन क्षैत्र के ढोक गांव में शौर्यवीर नरपतसिंह राजपुरोहित का जन्म हुआ। ढोक गाँव में विश्वविख्यात माँ वांकल विरात्रा का भव्यमंदिर है। माता के आशीर्वादऔर अपने पिता के मार्गदर्शनएवं उनके नक्शे कदम पर चलतेहुए नरपतसिंह ने इस गाँव हीनही तहसील एव जिले का नाम रोशन किया। राजपुरोहित का पूरा परिवार देश सेवा को समर्पित रहा है। इनके पिता कुम्पसिंह ने भारतीय सेना में देश की। उन्होंने अपनी नोकरी पूरी करने के बाद अपने बेटो को भी देश सेवा के रास्ते चलने की प्रेरणा दी। अपने तीनो पुत्रो में सबसे बड़े पुत्र घर पर ही अपने पिता के साथ घरेलू कार्य में हाथ बंटाते है उनसे छोटे नरपतसिंह वर्तमानमें एसएसबी में 18वी वाहिनी में असिस्टेंड कमांडेड के रूप में अपनी सेवा झारखंड में दे रहे है।इनका चयन पांच साल पहले हुआथा। उनसे छोटे प्रहलादसिंह भारतीय थल सेना में क्लर्क के पद पर अपनी सेवा दे रहे है वैसे देखा जाये तो पिता से लेकर दूसरी पीढ़ी भी देश सेवा को समर्पित है।नक्सलियों को किया मजबूर, हथियार डालेहोली से एक दिन पूर्व छतीसगढ़ और झारखंड में देश के जवानों को नक्सलियों से लोहा लेना पड़ा। छतीसगढ़ में बहुत बुरा हुआ और नक्सलियोंने हमारे जवानों पर घात लगाकर हमला किया। जिसमें 12 भारतीय जवान शहीद हो गये। ये बुरी खबर थी वही दूसरी और झारखण्ड के रांची में भी ऐसी ही घटना घटने वाली थी लेकिन जवानों ने सूझबूझ से काम लिया। रांची में एसएसबी की 18 वि वाहिनी में 120 लोगो कीबटालियन है जिसका नेतृत्व ढोक निवासी असिस्टेंड कमांडेट नरपतसिंह राजपुरोहित कर रहे थे। वो अपने कुछ सैनिकों के साथ पेट्रोलिंग के लिए निकले थेकि नक्सलियों के अडो तक पहुंच गये तो नक्सलीयो ने जवानों को देखकर फायरिंग शुरू कर दी। जिसका राजपुरोहित सहित टुकड़ी ने मूंह तोड़ जवाब दिया। काफी देर तक चली मुठभेड़ और कमांडेंट के अदम्य साहस को देखते हुए नक्सलियों ने अपने हथियार डाल दिए और समर्पण कर लिया। नरपतसिंह ने अपनी सजगता दिखाते हुए अपने साथियों को पूरा इलाकाघेरने का आदेश दिया और 8 जिन्दा नक्सलियों को गिरफ्तार कर लिया। उनके इस साहसिक कार्य के परिणाम स्वरूप आज नरपतसिंह राजपुरोहित आमजन के हीरो बनगए है। इसको लेकर अखबार व न्यूज चैनलों ने नरपतसिंह की भूरि भूरि प्रशंसा की है। इस जांबाज ने पिछले कई महीनों के दौरान करीब 24से ज्यादा जिन्दा नक्सली पकड़ लिए है। उड़ीसा एव झारखंड के नक्सली प्रभावित इलाकों में नरपत आतंकियों के लिए काल बने हुए है। उन्होंने नक्सलियों में इतना भय पैदा कर दिया है किया तो वो सरेंडर कर देते हैया उस इलाके से दूर चले जाते है। नरपतसिंह अपनी वीरता और साहस का पूरा श्रेय अपने पिता कूंपसिंह को देते है। गांव के युवाओंके लिए नरपतसिंह आइडल बने हुए है। पूरे गांव को उन परगर्व है।