(शताब्दी गौरव विशेष)
चाणक्य ने चंद्रगुप्त से कहा था कि राजनीति में यदि आपका प्रतिनिधि युवा है, स्वस्थ है, समर्थ है, सेवाभावी है एवं सकारात्मक सोचवाला है, तो आपकी सारी समस्याओं का निदान हो गया समझो। चंद्रगुप्त का यह नीतिगत परामर्श मुंबई की राजनीति में भारतीय जनता पार्टी के युवा नेता आकाश राज पुरोहित पर जस का तस लागू होता है। आकाश युवा अवस्था में है, शारीरिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ है, राजनीतिक रूप से समर्थ है, उनके मन में समाज की सेवा का भाव भी है तथा वे सदा से ही सकारात्मक सोचवाले नेता के रूप में विख्यात हैं। किसी भी नेता के लिए चाणक्य प्रदत्त इन सारे अत्यावश्यक गुणों के अलावा आकाश राज पुरोहित में मिलनसारिता, व्यवहारकुशलता, कर्मठता, ईमानदारी और संगठन क्षमता होने के साथ साथ लक्ष्य पर लगातार नजर रखने जैसे कुछ और भी विशेष गुण हैं, जिनके जरिए वे राजनीति में स्थापित तो बहुत पहले ही हो चुके हैं, लेकिन अब राजनीति के आकाश पर चमकने को भी तैयार है। आकाश राज पुरोहित बीजेपी के नए युग में, नए जमाने की, नई पीढ़ी के, नए नेतृत्व की, नई पौध हैं। अब आनेवाले वक्त में बीजेपी इन्हीं नेताओं के सहारे आगे बढ़ेगी। किसी परिपक्व राजनेता की तरह आकाश राज पुरोहित बातचीत में काफी सधे हुए एवं गंभीर लगते है। बहुत सम्हल कर बोलते हैं और उतना ही बोलते हैं जितने में काम चल जाए। उनसे जब पूछा कि राजनीति में तो लोग बहुत बोलते हैं, आप कम बोलेंगे, तो कैसे चलेगा। इसके जवाब में ने उन्होंने जो कहा वह वास्तव में चिंतन करनेवाली बात है। आकाश बोले – मेरे बोलने से क्या होगा, मेरा काम बोलना चाहिए। मैं मानता हूं कि ज्यादा बोलने से हम भटक जाते हैं। जबकि कम बोलने से हम लक्ष्य से नहीं भटकते। मेरा ध्यान मूल रूप से सिर्फ लक्ष्य पर रहता है। मैं जनता के काम करने पर ध्यान लगाए हुए हूं। आकाश राज पुरोहित के बारे में एक लाइन में कहा जाए, तो वर्तमान समय में राजनीति में जिस तरह की सोचवाले युवा लोगों की जरूरत है, वे उन्हीं में से एक है। आनेवाला वक्त इसी पीढ़ी का है।
मुंबई में बीएमसी के चुनाव है, और दक्षिण मुंबई की जनता भारतीय जनता पार्टी के इस युवा नेता के सेवा कार्यों से जिस तरह से प्रभावित है, वह अब कोई नई बात नहीं रही। सो, जनता की भावनाओं का सम्मान करते हुए आकाश राज पुरोहित भी बीएमसी के चुनाव मैदान में हैं। वर्तमान युग में राजनीति के द्वारा समाज की सेवा करने के लिए जिस तरह के युवा नेता की आवश्यकता है, उसमें आकाश राज पुरोहित पूरी तरह से फिट है। क्योंकि बीजेपी के दिग्गज नेता राज के पुरोहित के बेटे आकाश राज पुरोहित के साथ भारतीय जनता पार्टी की पूरी लीडरशिप हर तरह के सहयोग के लिए हमेशा से तैयार खड़ी है। वास्तव में देखा जाए तो आकाश के पिता राज के पुरोहित मुंबई की राजनीति में एक बहुत बड़ा नाम है। राजनीति में उनका मान सम्मान भी है। लेकिन आकाश विरासत की राजनीति के बल पर नहीं बल्कि अपने दम पर अपने सेवा कार्यों के बल पर राजनीति में काम कर रहे हैं। सेवा उनका शौक है और हर जरूरतमंद का सहयोग करना उनकी फितरत। बिल्कुल अपने पिता की तर्ज पर आकाश भी हंसमुख एवं मिलनसार कार्यकर्ता के रूप में दक्षिण मुंबई के दिलों में बसने की कोशिश मैं सफल रहे हैं। आकाश कहते हैं- मुझे काम करने में किसी भी तरह की दिक्कत नहीं आती, क्योंकि यह सब तो मैंने बचपन से मेरे पिता को करते देखा है। इसीलिए बहुत पहले से ही सीख लिया था कि सरकार में बैठे अधिकारियों से किस काम को, किस तरह से, कितना जल्दी करवाया जाता है।
आकाश राज पुरोहित कहते हैं – मैं दक्षिण मुंबई की समस्याओं को गहराई से समझता हूं। क्योंकि मैं खुद उन समस्याओं को बचपन से ही जी रहा हूं। मेरे लिए न तो यहां के लोग और न मैं उनके लिए नया हूं। मेरी जनता और मैं, जबसे मैं जन्मा तब से ही एक दूसरे को अच्छी तरह से जानते हैं। ओर आकाश राजपुरोहित नई पीढ़ी के राजनेता हैं और राजनीति की उम्मीदों के आसमान पर अपने सितारे को चमकाने के लिए स्थापित कर चुके हैं। बीजेपी की युवा शाखा में कई जिम्मेदारियां निभा चुके आकाश मूल रूप से दक्षिण मुंबई के कोलाबा एवं कालबादेवी इलाके में ही ज्यादा व्यस्त रहे हैं। यही उनकी कर्मभूमि है और यही उनका क्षेत्र। जब उनसे पूछा कि मुंबई तो बहुत बड़ा शहर है, आपने जनसेवा के लिए यही इलाका क्यों चुना, तो आकाश ने बहुत समझदारी एवं जिम्मेदारी से उत्तर दिया। वे बोले – हम जिस क्षेत्र को ज्यादा अच्छी तरह से समझते हैं, जहां के लोगों के मन को हम ज्यादा गहराई से पढ़ सकते हैं, एवं वहां के लोग भी आपसे प्रेम करने लग जाते हैं। एवं उन्हीं के लिए काम करने में संतोष भी मिलता है। क्योंकि वे हमारी काम करने की क्षमता एवं ईमानदारी के साथ साथ राजनीतिक जड़ों से भी वाकिफ होते हैं। किसी 30 साल के युवा नेता से इस तरह के बेबाकीपूर्ण एवं जिम्मेदारी भरे जवाब की उम्मीद सामान्य तौर पर कोई नहीं करता। लेकिन फिर भी जब सामने से अपनी राजनीतिक जिम्मेदारियों के बारे में बेहद गंभीरता से जब कोई बात रखता है, तो उम्मीद तो जगती ही है। आकाश राज पुरोहित से मुंबई को इसीलिए उम्मीद है।
सभार
http://shatabdigaurav.com
Sunday, 21 May 2017
आकाश राज पुरोहित – राजनीति के आकाश पर नई पीढ़ी का नया नेतृत्व
Sunday, 7 May 2017
Shri Atmanand ji Saraswati Ji Maharaj ka jeevan parichay
स्वामी श्री आत्मानंद सरस्वती महाराज
पूरा नाम : - संत श्री 1008 स्वामी श्री आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज
जन्म का नाम : - अचल सिंह
जन्म तारीख 3 सितंबर , 1924 ( विक्रम सम्वत सुक्लापक्सा भाद्रपद चतुर्थी १९८१ - बुधवार ]
पिता जी - श्री देवीसिंह राजपुरोहित गुन्देचा ( गुन्देशा )
माता का नाम : - श्रीमती मंगु देवी जी
जन्म स्थान : - बारवा जाब तहसील : - बाली जिला - पाली ( राजस्थान )
गुरु का नाम : - श्री जगद्गुरु शंकराचार्य के शिष्य श्री 1008 श्री अनंत महाराज ज्योतिपीठ शांतानंद सरस्वती जी
श्री 1008 श्री अनंत महाराज ज्योतिपीठ शांतानंद संत श्री 1008 श्री शिक्षा सारथि स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज ने अपने यौवन काल शाह एक ऊंचे और तपस्वी का जीवन व्यतीत किया है । नियम और व्रतों का पालन किस कहा और कड़ाई से वैसा हमने आज तक दूसरे किसी व्यक्ति को नहीं करते देखा !
जिन लोगों ने संत श्री को निकट से देखा है । करता इस बात की सत्यता से भलीभांति परिचित होंगे ! संत श्री बहु प्रतिभा के धनी हैं । इनका जीवन प्रारम्भ से ही कर्ममय रहा है और बालकों की शिक्षा की तरह ही कन्याओं की शिक्षा पर भी बहुत बल दिया है । महान कर्मयोगी , सरस्वती जो राजपुरोहित समाज में शिक्षा क्षेत्र असीम योगदान . " अध्यात्मिक महापुरुष " घोर तपस्वी , संत श्री दतारा सुंदर वक्ताओं ने शिक्षा के क्षेत्र के विकास में सामाजिक हॉस्टल का गठन और , आपको को शिक्षा विद के नाम से जाने जाते है क्योकि आपने हॉस्टल राजपुरोहित जालोर , पाली मारवाड़ , फालना , रानीवाडा , कलंदरी , जोधपुर ( तीसरा विस्तार ) , सिरोही , भीनमाल और आहोरे और राजपुरोहित समाज के भवन भवस - सांचौर , सिरोही , कलदरी , पाली , निम्बेश्वर आदि समाज के कई जगह आज हॉस्टल पर संत श्री के नाम से भी प्रमुख स्थानों में विकसित कर रहे हैं . पुरानी हील और महादेव मंदिर का भी निर्माण किया है आपने कई गौशाला के विकसित किया हैं संत श्री 1008 श्री आत्मानन्द जी महाराज की समाधि जालौर में है ।
Dhanyavad by
राजपुरोहित समाज Blog
Saturday, 6 May 2017
Sant 1008 Shri Nirmal Das Ji Maharaj jeevan parichay
महामंडलेश्वर श्री निर्मलदास जी महाराज
महन्त श्री 1008 निर्मलदासजी महाराज ससंत कबीर आश्रम - बालोतरा जालोर जिले को सांचोर तहसील मुख्यालय में एक ग्राम भादरूणा आया हुआ हैं । यहां वर्तमान में 15 घर राजगुरू परिवार के रहते हैं । यह गांव महन्त श्री की पैतृक जन्मभूमि हैं इसलिए इनके दादाजी मलजी ( सासारिक ) की ग्राम में पारिवारिक स्थिति सामान्य थी इसल ए ये बाडमेर जिले के बालोतरा नगर चले आये । इनकी योग्यता के अनुरूप नगरपालिका में कार्य मिल गया व यहीं बस गये । इनकी धर्म पनि बड़ी धर्मपरायण व सात्विक प्रवृति की थी ।
इनकी ज्येष्ठ पुत्र जेठारामजी के घर जगदीश का जन्म विक्रम संवत 2025 आषाढ दी तेरस को हुआ । इनकी मातु श्री का नाम धापु देवी हैं । ) परिवार वालों ने मात्र 8 वर्ष की उस सत कबीर आश्रम बालोतरा ) ले जाकर स्वेच्छा से भेंट कर दिया ( इनकी दादी श्री ! तुलसादेवी ने समर्थ सत श्री रूधनाथजी महाराज से प्रार्थना की थी कि उनके पुत्र गोपाराम के पुत्र नहीं है । संत श्री के आर्शीवाद फलस्वरूप दो पुत्र भी हुए पर संत श्री ने आशीर्वाद सशर्त दिया था कि एक पुत्र मेरे यहां आश्रम की सेवा में हमेशा क लिए दोगी तो गुरु महाराज तुम्हारी मनोकामना अवश्य पूरी करेगे । इसलिए दिये गये वचनों के अनुसार तुलसादेवी ने परिवार के डोलते मन से विचलित न होकर अपनी प्रतिज्ञा को पुरी ) संत कबीर आश्रम परम्परानुसार संत कबीर करवाया पीठ के , महन्तों ने बालक जगदीश को महन्त की गादी पर चादर ओढ़ाकर संतों विधिवत बैठावर नामकरण जगदीश से महन्त श्री निर्मलदासजी रखा क्योंकि महन्त ! श्री रूघनाथदासजी ब्रह्मालीन हो चुके थे ) बाल्यवस्था देखकर परिवार वालों को पुन धरोहर के रूप में शिक्षा दिलाने हेतु सौप दिया । उपरोक्त जानकारी
रिश्तेदारों को नहीं होने से यौवनावस्था तक पहुचते ही सगाई के लिए प्रस्ताव माने लगे । परिवार वालों को मौन देखकर इनकी दादी श्री तुलसादेवी ने पुन : चेतावनी देते हुए कहा - संतों को दिये वचनो से मुकर जाना या झूठला देना अच्छी बात नहीं हैं । इससे परिवार के सर्वनाश की शुरूआत होगी । आगे निर्णय तुम्हें करना हैं । ये बातें युवा जगदीश महंत श्री निर्मलदास ) : भी सुनी । दादी श्री की अपनी प्रतिज्ञा के प्रति निष्ठा देख क्षणिक मानसिक हलचल हई , व मन एकाएक निर्णायक मोड़ पर आकर शान्त हो गया एक दिन परिवार को बिना कहे गुरूकृपा की प्रेरणा से आश्रम चले गये । मन में अभिलाषा थी कि योग्य आचार्य से शिक्षा प्राप्त की जावे । काशी चले आये । यहां कबीर चौरा मठ में रहकर दो वर्षों तक धर्माचायों के सानिध्य में रहकर शिक्षा प्राप्त की बाद में पुष्कर चले आये । यहां पर भी कुछ समय तक रहकर ध्यान योग पर प्रवचन का लाभ लेते हुए वहा से पुन संतों के साथ भ्रमण करते बंगाली बाबा व आम वाले बाबा के सानिध्य में प्रेरणा मिली कि व्यर्थ भटकने से लाभ नही मिलता । यहीं से पुन अपने कबीर आश्रम ( बालोतरा ) लौट आये । यहां आकर समय - समय पर प्रवचन सत्संग करवाते रहे एवं साथ - साथ संत श्री खेतारामजी महाराज के सानिय : आते रहते थे । एक बार संत श्री ( खेतारामजी ) ने महन्त श्री निर्मलदासजी की यौवन अवस्था देख कहा रामजी , साधु जीवन शुरू में कठोर मार्ग लगता हैं परन्तु लक्ष्य की ओर विधिवत् चलोगे तो ईश्वर तुम्हारे हर कार्य में साथ रहकर ( अप्रत्यक्ष रूप से ) ! सहयोग करेगे , सर्वप्रथम घर को सुधारोगे तो समाज स्वत धीरे - धीरे सुधरता जायेगा । ( ईशारा था जिस कुल में तुमने जन्म लिया उसके लिए भी सेवाएं देना ) शिक्षा की तरफ भी ध्यान देने का भी संत श्री खोतारामजी महाराज प्रसंगवश कहते रहते । ये बातें महन्त निर्मलदासजी बड़े ध्यान से सुनते और मन में ऐसा लगा कि अगर सुवसर मिला तो रचनात्मक कार्यों में ( राजपुरोहित समाज में ) अवश्य भाग लूंगा 1 और श्री गणेश किया राजपुरोहित छात्रावास बाड़मेर में अपनी सेवाएँ देकर । उसके बाद इन्द्राणा ग्रामवासियों ने संत श्री खेतारामजी महाराज से ठाकुरजी का आग्रह स्वीकार किया तो ) मन्दिर की प्राण प्रतिष्ठा सम्पन्न रिघुनाथजी करवाने ब्रह्मलीन होने पर , यहाँ संत श्री खेतारामजी ने आग्रह को स्वीकार तो किया परन्तु प्राण प्रतिष्ठा में सेत बन श्री निर्मलदासजी ने हर्षोंल्लास के साथ दिया ।
संत श्री खेतारामजी महाराज के समाधि स्मारक गुरू मन्दिर में भी द्रटी एवं के साथ अपनी सेवाएं प्रतिष्ठा गादीपति तक जारी रखी , मोहराई ग्रानवासियों को विशेष अनुरोध पर राजपुरोहित बन्धुओं ( मोहराई ) में चल रहे मत मतान्तर को समाप्त कर प्राण प्रतिष्ठा ( अम्बे माता के मन्दिर में ) सम्पन्न कराई । ग्राम अराबा ( दुदावत ) में ठाकुरजी के मन्दिर की प्रतिष्ठा ग्रामवासियों के सहयोग से धुमधाम से सम्पन्न करवाई ।
सियों का गोलिया में चामुण्डा माता मंदिर,कल्याणपुरा में हनुमानजी का मन्दिर इत्यादि के अतिरिक्त हरिद्वार में समाज भवन हेतु दक्षिण भारत की यात्रा कर भवन सहयोग हेतु श्रद्धालु , भाविक , भामाशाहो , उद्योगपतियों एवं सामान्य वर्ग नौकरी ! करने वालों से भी सहयोग राशि प्राप्त कर सराहनीय सेवाएँ देकर अपनी अह भूमिका अदा की एवं विशाल राजपुरोहित समाज के समक्ष ट्रस्टियों के सहयोग को द्वारा ब्रह्मधाम आसोतरा के गादिपति से उदघाटन करवाकर एक ट्रस्ट का गठन कर अखिल भारतीय राजपुरोहित समाज विकास संस्था को रजिस्टर्ड करवाया जिसका मुख्यालय आसोतरा ब्रह्मधाम व उप कार्यालय हरिद्वार में रखा गया । जिसमें रा वरिष्ठ उपाध्यक्ष महन्त श्री निर्मलदासजी मनोनित किये गये । राजपुरोहित समाज ही नहीं अपितु अन्य समाज में भी धार्मिक कार्यों में अग्रणी रहकर कार्यों को सम्पन्न करवाने में अपनी समय - समय पर अहं भूमिका अदा कर रहे हैं।
सभार
Rajpurohit Samaj
Wednesday, 5 April 2017
समाज की गौरव और संगीत के क्षेत्र में जाना पहचाना नाम बन चुका है इंदौर की गायिका प्रीति राजपुरोहित
Priti Rajpurohit

Family ke sath
Singing moment
Newspaper update

राजपुरोहित समाज की गौरव और संगीत के क्षेत्र में जाना पहचाना नाम बन चुका है इंदौर की गायिका प्रीति राजपुरोहित सुप्रसिद्ध गायिका है जिन्होंने अपनी दिलकश आवाज से श्रोताओं के दिल पर अपनी अमिट छाप छोड़ी।
प्रीति राजपुरोहित
जन्म दिन : 2 फरवरी 1983
आयु : 34
यह सही है कि संगीत एक साधना है और जो उस साधना में राम जाता है निश्चिती व संगीत के क्षेत्र में एक मुकाम हासिल कर लेता है बरसों से संगीत को अपना लक्ष्य मान चुकी प्रीति राजपुरोहित मध्य-प्रदेश इंदौर की रहने वाली आज संगीत में एक जाना पहचाना नाम बन चुका है जिनके गीतों को सुनकर श्रोतागण मंत्रमुग्ध हो जाते हैं पिछले कई सालों से इंदौर, हैदराबाद, चेन्नई, गुजरात, राजस्थान ओर महाराष्ट्र आदि स्थानों पर प्रोग्राम के माध्यम से अपने गीतों का लोहा मनवा चुकी है प्रीति राजपुरोहित ने हमें एक इंटरव्यू में बताया कि इसके लिए वह कड़ी मेहनत करती हैं गीत संगीत अब सांसे बन कर दिलों में धड़कता है !
अपनी सफलता के लिए अपने माता-पिता के बाद लता मंगेशकर को श्रेय देती हैं। लता मंगेशकर को अपना आदर्श मानने वाली सिंगर श्रीमती प्रीति राजपुरोहित हर एक गीत के साथ पूरा इंसाफ करते हुए संजीदा ढंग से प्रस्तुति देती हैं प्ले बैक सिंगर मधुश्री तथा अन्य सिंगरों के साथ मंच साझा कर चुकी प्रीति राजपुरोहित अब बॉलीवुड की धड़कन बनना चाहती हैं वह दिन दूर नहीं की संगीत के प्रति उनकी रूचि और मेहनत उन्हें एक दिन उस मुकाम तक पहुंचा देगी| फिल्मी गीतों की प्रस्तुति के साथ भजनों की प्रस्तुति मैं भी प्रीति राजपुरोहित को महारत हासिल है
संघर्ष
सफलता की राह कभी भी आसान नहीं होती है। प्रीति जी को भी अपना स्थान बनाने में बहुत कठिनाइयों का सामना करना पडा़।
हम प्रीति जी के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते है........ सुगना फाउंडेशन मेघलासिया परिवार
अगर आप भी किसी क्षेत्र जुड़े हुए हैं तो लिख भेजीए अपना जीवन परिचय हमें हमारे WhatsApp no 9286 464 911 Ya email address:- Sawaisinghraj007@gmail.com
पर
आपका अपना सवाई सिंह
सदस्य
सुगनाफाउंडेशन मेघलासिया
Monday, 20 March 2017
नरपत सिंह राजपुरोहित के नाम से थर्राते है नक्सली
नरपतसिंह राजपुरोहित के नाम से थर्राते है नक्सली
थार के रेगिस्तान में जहां दूर दूर तक छितराई ढाणियां नजर आती है, कहीं लोग पानी का जुगत लगाते नजर आते है, तो कहीं पशु पक्षी छाया ढूढने के लिए दर ब दर भटकतेहै। ऐसी कठिन जीवन शैली मेंही जाबांज और यौद्धा पैदा होते है। बाड़मेर जिले के चौहटन क्षैत्र के ढोक गांव में शौर्यवीर नरपतसिंह राजपुरोहित का जन्म हुआ। ढोक गाँव में विश्वविख्यात माँ वांकल विरात्रा का भव्यमंदिर है। माता के आशीर्वादऔर अपने पिता के मार्गदर्शनएवं उनके नक्शे कदम पर चलतेहुए नरपतसिंह ने इस गाँव हीनही तहसील एव जिले का नाम रोशन किया। राजपुरोहित का पूरा परिवार देश सेवा को समर्पित रहा है। इनके पिता कुम्पसिंह ने भारतीय सेना में देश की। उन्होंने अपनी नोकरी पूरी करने के बाद अपने बेटो को भी देश सेवा के रास्ते चलने की प्रेरणा दी। अपने तीनो पुत्रो में सबसे बड़े पुत्र घर पर ही अपने पिता के साथ घरेलू कार्य में हाथ बंटाते है उनसे छोटे नरपतसिंह वर्तमानमें एसएसबी में 18वी वाहिनी में असिस्टेंड कमांडेड के रूप में अपनी सेवा झारखंड में दे रहे है।इनका चयन पांच साल पहले हुआथा। उनसे छोटे प्रहलादसिंह भारतीय थल सेना में क्लर्क के पद पर अपनी सेवा दे रहे है वैसे देखा जाये तो पिता से लेकर दूसरी पीढ़ी भी देश सेवा को समर्पित है।नक्सलियों को किया मजबूर, हथियार डालेहोली से एक दिन पूर्व छतीसगढ़ और झारखंड में देश के जवानों को नक्सलियों से लोहा लेना पड़ा। छतीसगढ़ में बहुत बुरा हुआ और नक्सलियोंने हमारे जवानों पर घात लगाकर हमला किया। जिसमें 12 भारतीय जवान शहीद हो गये। ये बुरी खबर थी वही दूसरी और झारखण्ड के रांची में भी ऐसी ही घटना घटने वाली थी लेकिन जवानों ने सूझबूझ से काम लिया। रांची में एसएसबी की 18 वि वाहिनी में 120 लोगो कीबटालियन है जिसका नेतृत्व ढोक निवासी असिस्टेंड कमांडेट नरपतसिंह राजपुरोहित कर रहे थे। वो अपने कुछ सैनिकों के साथ पेट्रोलिंग के लिए निकले थेकि नक्सलियों के अडो तक पहुंच गये तो नक्सलीयो ने जवानों को देखकर फायरिंग शुरू कर दी। जिसका राजपुरोहित सहित टुकड़ी ने मूंह तोड़ जवाब दिया। काफी देर तक चली मुठभेड़ और कमांडेंट के अदम्य साहस को देखते हुए नक्सलियों ने अपने हथियार डाल दिए और समर्पण कर लिया। नरपतसिंह ने अपनी सजगता दिखाते हुए अपने साथियों को पूरा इलाकाघेरने का आदेश दिया और 8 जिन्दा नक्सलियों को गिरफ्तार कर लिया। उनके इस साहसिक कार्य के परिणाम स्वरूप आज नरपतसिंह राजपुरोहित आमजन के हीरो बनगए है। इसको लेकर अखबार व न्यूज चैनलों ने नरपतसिंह की भूरि भूरि प्रशंसा की है। इस जांबाज ने पिछले कई महीनों के दौरान करीब 24से ज्यादा जिन्दा नक्सली पकड़ लिए है। उड़ीसा एव झारखंड के नक्सली प्रभावित इलाकों में नरपत आतंकियों के लिए काल बने हुए है। उन्होंने नक्सलियों में इतना भय पैदा कर दिया है किया तो वो सरेंडर कर देते हैया उस इलाके से दूर चले जाते है। नरपतसिंह अपनी वीरता और साहस का पूरा श्रेय अपने पिता कूंपसिंह को देते है। गांव के युवाओंके लिए नरपतसिंह आइडल बने हुए है। पूरे गांव को उन परगर्व है।
Thursday, 9 March 2017
किशोर सिंह राजपुरोहित ऐसे युवा समाज सेवक का परिचय करवा रहे हैं
समाज बन्धुओं
सादर जय रघुनाथ जी री
आज समाज के ऐसे युवा समाज सेवक का परिचय करवा रहे है जो संघर्ष , सरलता और सामाजिक एकता कि बड़ी मिशाल हे :-
श्री किशोर राजपुरोहित पुत्र श्री नरपत सिंह जी गॉंव घेवड़ा , तहसील तिंवरी , जिला जोधपुर आपका जन्म 18 सितम्बर 1977 को जोधपुर में हुआ। पारिवारिक पृष्ठभूमि में पिता जी पहले जोधपुर मे मज़दूरी करते व प्राईवेट बस परिचालक थे राजनिती से परिवार का सिधा सम्पर्क न रहा।
एक साधारण परिवार मे जन्मे व NSUI से अपने राजनैतिक जीवन कि शुरुआत कि जोधपुर विश्व विधालय से सन् 2000 में महासचिव पद हेतु चुनाव लड़ा।
श्री बद्रीराम जाखड पुर्व सांसद पाली के सांसद बनने से पुर्व निजी सलाहकार व सचिव रहे। श्री जाखड और इनके पिता जी कि मित्रता रही साथ काम किया। पाली राजपुरोहित समाज में जाखड हेतु गाँव-ढाणी सम्पर्क के सूत्रधार रहे।
राजपुरोहित समाज में आपको युवाओं के लिये सामाजिक एकता कि मिशाल कहा जा सकता हे। समाज के युवा बंधुओं को राजनितीक नियुक्तियों में आपका सहयोग उपलब्धियों वाला रहा हे।
राजपुरोहित समाज में रक्तदान शिविरों , चिकित्सा शिविरों व खेलकूद प्रतियोगिताओं कि शुरुआत कर समाज सेवा में अग्रणी रहे।
समाज में कई परिस्थितियों तथा मुद्दों पर इनका संघर्ष युवाओं के लिये प्रेरणास्प्रद हे समाज हेतु कई मुक़द्दमे तक झेले।
कई सामाजिक संस्थाऔ द्वारा सम्मान पत्र आपको मिले है। राजकार्य मे समाज के सहयोग हेतु हमेशा विशेष योगदान रहा आपके प्रशासनिक अनुभव का सहयोग हमेशा समाज के साथ रहा हे।
सन् 2013 में युवा कांग्रेस का चुनाव लड़ सिवाना विधानसभा क्षैत्र के उपाध्यक्ष बने और जनहित के कार्यों मे लगन से कार्य किया राजस्थान सरकार कि पेन्शन योजना को सिवाना विधानसभा के घर घर तक पहुँचाने हेतु एक पेन्शन मोबाईल वेन चलाकर कार्य कर ग़रीब व जरुरतमंद के मददगार बने। ऐसे कार्यों कि सराहना कि गई।
किसान व युवा बेरोज़गारों के लिये संसद व विधानसभा घरावों मे अग्रणी भूमिका निभाई हर बार पुलिस लाठीचार्ज में घायल होते कई बार जनहित के मुद्दों पर जेल गये पर हिम्मत हारना नही सिखा। अभावों में रहकर भी जनसेवा ध्येय रहा।
कांग्रेस पार्टि में युवा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष श्री अशोक चांदना ने आख़िर हमारे समाज के युवा कि सहजता , हिम्मत , सेवाभाव को पहचान बिना किसी शिफारिश के आपको राजस्थान प्रदेश युवा कांग्रेस का सचिव बनाया
श्री किशोर राजपुरोहित आज भी उसी रुप व क्रम मे आपको समाज सेवा या जनसेवा करते नज़र आ जायेंगे .. ये क्रम अनवरत 19 ..वर्षों से निरन्तर जारी हे.....आपके उज्जवल भविष्य की कामना करता हूँ
आपका अपना सवाई सिंह सदस्य सुगना फाउंडेशन मेघलासिया परिवार



