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Saturday, 27 January 2024

वरिष्ठ पत्रकार व समाजसेवी ओम सिंह राजपुरोहित का जीवन परिचय

हेलो दोस्तों मैं शौर्य प्रताप (सवाई) सिंह राजपुरोहित जीवन परिचय की इस श्रृखला में मैं लेकर आया हूँ वरिष्ठ पत्रकार व समाजसेवी, राजपुरोहित समाज रत्न श्री ओम सिंह राजपुरोहित का जीवन परिचय वैसे यह शख्स किसी परिचय के मोहताज नहीं है आज इन्हें लाखो लोग जानते हैं आपने अपनी लेखनी के माध्यम से समाज उत्थान से कई कार्यो को उजागर किया है आईए जानते हैं इनका संक्षिप्त में परिचय....

◆ नाम - श्री ओम सिंह राजपुरोहित

◆ पिताजी का नाम - श्री गोपाल सिंह राजपुरोहित

◆ गौत्र (उपजाति)- सेवड़ ◆ वर्तमान निवास - बिलाड़ा

◆ कार्य / व्यवसाय - राजस्थान पत्रिका, समाचार संपादक, पुणे

◆ रुचि - समाज सेवा और देश-दुनिया की जानकारी रखना।

◆ अब तक प्राप्त सम्मान / अवॉर्ड - राजपुरोहित समाज रत्न, राजस्थान पत्रिका के विशेष कॉलम कड़वा-मीठा सच के दो राज्य स्तरीय एवं तीन संभाग स्तर पर सर्वश्रेष्ठ लेखनी के पुरस्कार, रामनाथ गोयनका सर्वश्रेष्ठ पत्रकारिता पुरष्कार।

◆- वर्ष 1984 से राजस्थान पत्रिका में संवाददाता, सिरोही जिले के रेवदर से शुरुआत हुई, पश्चात वर्ष 1990 में बिलाड़ा पैतृक गाँव से रिपोर्टर पश्चात वर्ष 2000 में जोधपुर संस्करण में उप-संपादक पद पर कार्यरत, वर्ष 2019 में सेवानिवृति पश्चात पत्रिका के विशेष आग्रह पर पुणे कार्यालय प्रभारी एवं समाचार संपादक पद पर कार्यरत हूँ, इस दौरान कोरोना वायरस का स्टेन निकालने वाले डॉक्टर प्रभा अब्राहम से विशेष वार्ता, टीका निर्माण करने वाले सीरम इंस्टिट्यूट के निदेशक अदार पूनावाला से विशेष भेट वार्ता जो दुनिया का पहला इंटरव्यू माना गया हैं, इसके अलावा महाराष्ट्र की राजनीति, विधानसभा चुनाव कवरेज, देश में सर्वश्रेष्ठ कृषि करने वाले किसानो की उपलब्धियों के अलावा कई ऐतिहासिक कवरेज कर पत्रकारिता क्षेत्र को चौंकाया।

      राजस्थान पत्रिका के विशेष कॉलम कड़वा-मीठा सच के दो राज्य स्तरीय एवं तीन संभाग स्तर पर सर्वश्रेष्ठ लेखनी के पुरस्कार प्राप्त किये, इनके अलावा कर्पूरचन्द कुलिश द्वारा प्रारम्भ किये गए आओ गाँव चले की थीम पर 160 गाँवों की यात्रा कर वहां की कहानियां लिखी, पत्रकारिता के अलावा राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का प्रथम वर्ष प्रशिक्षण प्राप्त किया तथा 1989 की पहली कारसेवा में अशोक सिंघल के साथ रहा, पश्चात अन्य सभी कारसेवा में भी भागीदारी रही, कारसेवको की हत्या के पश्चात विश्व हिन्दू परिषद् ने अयोध्या में 40 दिवसीय आंदोलन चलाया उसका दायित्व मेरे सहित दो अन्य साथी किशनगढ़ एवं मुंबई को सौपा तथा राम जानकी महल ट्रस्ट में आने वाले देश विदेश के उच्च अधिकारियो जिनमें हरिहर डालमिया, महंत अवैध्य नाथ, राजमाता विजया राजे सिंधिया, मोरो पंथ पिंगले, दत्तो पथ ठेगरी, महंत नृत्य गोपाल दास, रामचंद्र परम हंस, उमा भारती, साध्वी ऋतंबरा, शिवा सरस्वती, आचार्य धर्मेन्द्र, गिरिराज किशोर जैसे बड़े लोगो के नेतृत्व में प्रतिदिन देवरा बाबा की छावनी के मंच से इनका उद्धबोधन करा गिरफ़्तारी के ले जाने का दायित्व निभाया।

06 दिसंबर की कारसेवा के दौरान पत्रिका के लिए गोपाल शर्मा के साथ रिपोर्टिंग भी की। श्री राम मंदिर में कर सेवकों के योगदान के बारे में बताते हुए श्री राजपुरोहित का यह वीडियो आप देख सकते हैं राजपुरोहित समाज इंडिया यूट्यूब चैनल पर
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 सामाजिक क्षेत्र में ब्रह्मधाम आसोतरा में 7 वर्षो तक बिलाड़ा, भोपालगढ़ क्षेत्र से न्यासी के रूप में सेवाएं दी, इस दौरान बाडमेर-जैसलमेर क्षेत्र से सांसद पद के लिए भाजपा के जोगराज सिंह को टिकट दिया गया तो संपूर्ण न्यासियों के साथ प्रचार का कार्य किया। स्थानीय स्तर पर राजपुरोहित आश्रम समिति बिलाड़ा बाणगंगा तीर्थ धाम पर अध्यक्ष के रूप में सांसद कोष से कई निर्माण कार्य भी करवाएं।

      राजपुरोहित पंचायत समाज पुष्कर की और से वर्ष 2019 में समाज रत्न के रूप में अभिनन्दन पत्र देकर सम्मानित किया तथा जिला प्रशाषन एवं उपखण्ड स्तर पर भी समाज सेवा के कार्यो के रूप में प्रसस्ति पत्र प्राप्त किये गए हैं।

      राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के काल के दौरान उनकी उपलब्धियों को कीर्तिमान नाम की एक पुस्तिका जिसका विमोचन कभी वे स्वयं तो कभी उनके मंत्रिमण्डल के बड़े नेता करते रहे है|

 पत्रकारिता क्षेत्र में उत्कृष्ठ योगदान के लिए बिलाड़ा के वरिष्ठ पत्रकार श्री ओमसिंह राजपुरोहित को गणतंत्र दिवस (26 जनवरी 2024) के अवसर पर उपखण्ड मजिस्ट्रेट, पुलिस प्रशासन, नगर पालिका प्रशासन एवं राजस्व विभाग की ओर से प्रशस्ति पत्र एवं स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। 

आप राजपुरोहित समाज इंडिया पर इससे संबंधित खबरों को विस्तार से पढ़ सकते हैं

https://rajpurohitsamaj-s.blogspot.com/2024/01/Omsinghrajpurohit.html

वरिष्ठ पत्रकार श्री ओम सिंह जी राजपुरोहित आप आगे भी समाज उत्थान व समाज क्षेत्र में इसी प्रकार कार्य करते रहें टीम सुगना फाऊंडेशन की ओर से बहुत-बहुत बधाई और शुभकामनाएं

अगर इस मंच पर आप भी अपना जीवन परिचय देखना चाहते हैं तो हमें लिख भेजिए हमारे व्हाट्सएप नंबर 9286464911 पर 

आपका शौर्य प्रताप सिंह राजपुरोहित मीडिया प्रभारी सुगना फाउंडेशन और आरोग्य मेला समिति

Saturday, 3 June 2023

कवि एव साहित्यकार श्री रवि पुरोहित संक्षिप्त जीवन परिचय

 प्रिय मित्रों ,,,,, 

राजपुरोहित समाज की कला से जुड़ी हस्तियों के परिचय एवम उपलब्धियों की कड़ी मे आज हम कवि एवम साहित्यकार श्री रवि जी पुरोहित के जन्म दिवस के शुभ अवसर पर लेकर आये है। कविराज का संक्षिप्त जीवन परिचय भाई नरपत सिंह हृदय द्वारा लिखित

साहित्य साधना के परम उपासक श्री रविजी पुरोहित की साहित्य क्षेत्र में एक विशिष्ट पहचान है ।

5 जून 1968 में जन्मे श्री रविजी बीकानेर जिले के श्री डूंगरगढ़ के निवासी है और हाल बीकानेर में राजस्थान सरकार अधीनस्थ लेखा सेवा में कार्यरत है ।

आपने महर्षि दयानंद सरस्वती विश्व विद्यालय अजमेर से 1989 में वाणिज्य स्नात्तक की डिग्री परीक्षा उतीर्ण की ,ततपश्चात 1991 में हिंदी साहित्य में स्नातकोत्तर की डिग्री प्राप्त की।  फिर वर्ष 2010 में आपने महाराजा गंगासिंह विश्व विद्यालय बीकानेर से राजस्थानी भाषा मे एम. ए. की डिग्री उतीर्ण की ।

शोध सर्वे

मरुभूमि शोध संस्थान श्री डूंगरगढ़ में वर्ष 1989 से 1991 तक आप मानस शोध में सहायक रहे है ।

'चुरू अंचल रा लोक देवतावां अर लोक मान्यतावां ' इस विषय पर आपके शोध कार्य चालू है ।

साक्षरता के क्षेत्र में सरकारी एवम गैर सरकारी प्रयास में दशा एवम दिशा के लिए शिक्षा समाज और चेतना में आपकी शैक्षणिक परियोजना की भूमिका रही है। 

सदस्यता -

साहित्य अकादमी नई दिल्ली के राजस्थानी भाषा परामर्श मंडल के वर्तमान में आप सदस्य है । राजस्थानी भाषा साहित्य एवम संस्कृति अकादमी बीकानेर की पांडुलिपि प्रकाशन सहयोग तदर्थ उप समिति का संयोजकीय दायित्व एवम सदस्यता रही वर्ष 2012 से 2014 तक ।

वर्ष 2006 से 2008 तक आप राजस्थान साहित्य अकादमी उदयपुर की सरस्वती सभा के सदस्य रहे है। 

ASIA PACIFIC WHO*S WHO के आप पंजीबद्ध रचनाकार है ।

राष्ट्रभाषा हिंदी प्रचार समिति श्रीडूंगरगढ़ के आप आजीवन सदस्य है और वर्तमान में इसके सयुंक्त मंत्री भी है ।

राजस्थान प्रगतिशील लेखक संघ , सार्वजनिक पुस्तकालय श्रीडूंगरगढ़ की आजीवन सदस्यता और प्रबन्ध समिति के पूर्व सदस्य भी है । 

लेखन -

प्रांतीय और राष्ट्रीय स्तर की पत्र पत्रिकाओं में कहानी ,कविता , निबन्ध , व्यंग्य , आलोचना , लघुकथा , फीचर आलेख आदि का सन 1985 से लगातार प्रकाशन होता आ रहा है ।

आकाशवाणी के विभिन्न केंद्रों एवम दूरदर्शन तथा अन्य चैनलों पर आपकी विविध विधाओं की रचनाओं का प्रचुर प्रसारण होता रहता है।  

कई संपादित संकलनों में रचनायें संकलित है। 

प्रकाशन

चमगूंगो (1991) , हासियो तोड़ता सबद (1996) , राजस्थानी बाल कविता संगह 'तिरंगों' (2006) और उतरूँ उँडे काळजै''(2015) इत्यादि राजस्थानी कविता संग्रह प्रकाशित हो चुकी है ।

सेना के सूबेदार (2006) और 'आग अभी शेष है (2018) हिंदी कविता संग्रह का प्रकाशन। 

एक और घोंसला(1997)और धुले-धुले चेहरे (2015) हिंदी कहानी संग्रह का प्रकाशन तथा हिंदी व्यंग्य निबन्ध संग्रह "सपनों का सुख " का 2006 में प्रकाशन हो चुका है । 

काव्य संग्रह " उतरूँ उँडे काळजै " का हिंदी अंग्रेजी संस्कृत तथा पंजाबी में अनुवाद कर चुके है और गुजराती भाषा मे अनुवाद का कार्य जारी है ।

कुछ कविताओं का नेपाली उड़िया मराठी और बांग्ला भाषा मे भी अनुवाद हो चुका है। 

सम्पादन

'यादां रै आँगणीये ऊभा उणीयारा" (राजस्थानी रेखांचित संग्रह ) , आंखों में आकाश , राजस्थान शिक्षा विभाग के लिए बाल साहित्य संग्रह का 2012 में सम्पादन। 

उकळती ओकळ सूं उपज्या आखर , (श्री श्याम महर्षि री काव्य सिरजण समग्र ) । राजस्थली , लोक चेतना की राजस्थानी तिमाही का पिछले 25 वर्षों से प्रबन्ध प्रकाशन।  जागती जोत (राजस्थानी भाषा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी बीकानेर की मुख पत्रिका) का एक वर्ष तक सम्पादन । "हस्तक्षेप" ( साहित्यिक फोल्डर के चार अंको का सम्पादन ) 

एक दर्जन से अधिक अभिनंदन ग्रन्थों एवम स्मारिकाओं का सम्पादन। 

भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों ,राजस्थानी भाषा की एकेडमियों एवम कई प्रतिष्ठित एजेंसियों द्वारा आयोजित-प्रायोजित राष्ट्रीय , राज्य स्तरीय और आंचलिक समारोहों का आप संचालन कर चुके है । राजस्थान शिक्षाकर्मी का अनोपचारिक शिक्षा अनुदेशक आवासीय प्रशिक्षण शिविर का व्यवस्थापन । 

अनुवाद

जिओ मेरे साईंयां ,, (वीरसिंह की पंजाबी कृति ) का राजस्थानी अनुवाद ।

कैवती ही माँ , (युवा कवियित्री सुमन गौड़ की हिंदी कविताओं का राजस्थानी अनुवाद ) 

म्हनैं चांद चाइजै , ( साहित्य अकादमी दिल्ली द्वारा पुरस्कृत श्रीकांत वर्मा के चर्चित उपन्यास कृति) का राजस्थानी अनुवाद। 

कुछ तो बोल , (कवि श्याम महर्षि की राजस्थानी कृति ) का हिंदी अनुवाद।  

पुरस्कार और सम्मान - 

साहित्य अकादमी दिल्ली द्वारा जीवो म्हारा सांवरा (वीरसिंह की पंजाबी कृति) के लिए 'अनुवाद पुरस्कार 2016 ।

राजस्थान सरकार द्वारा उत्कृष्ट साहित्य लेखन के लिए राज्य स्तरीय पुरस्कार । 

राजस्थान साहित्य अकादमी उदयपुर का " भगवान अटलानी युवा लेखन पुरस्कार । 

राजस्थानी भाषा साहित्य एवम संस्कृति अकादमी बीकानेर का " 

बावजी चतुरसिंह जी अनुवाद पुरस्कार ।

इसके अलावा आपको , मैथिलीचरण गुप्त युवा लेखन सम्मान, पीथळ पुरस्कार , महेंद्र जाजोदिया पुरस्कार , शब्दनिष्ठा सम्मान ,

दी यंग्स वेलफेयर सोसायटी रतनगढ़ द्वारा रामगोपाल गिरधारीलाल सर्राफ अलंकरण ।

सृजन सेवा संस्थान श्रीगंगानगर द्वारा साहित्यकार सम्मान ।

पंडित विद्याधर शास्त्री अवार्ड ।

त्रिलोक शर्मा स्मृति संस्थान श्रीडूंगरगढ़ द्वारा " संवाद सम्मान ।

इसके अलावा " साहित्य शिरोमणि सम्मान , ज्ञान श्री सम्मान , राजपुरोहित गौरव सम्मान । सहस्त्राब्दी हिंदी सेवी सम्मान । 

निम्बोळ का साहित्य साधक सम्मान। 

इनके अलावा भी विभिन्न संस्थाओं द्वारा आप को सम्मानित किया गया है। पत्रकारिता - दैनिक नवज्योति और दैनिक भास्कर के अलावा अन्य कई प्रतिष्ठित पत्रों के लिए मानव संवाद प्रेषण का कार्य । 

शोध

महाराजा गंगासिंह विश्व विद्यालय बीकानेर द्वारा " रवि पुरोहित रै काव्य मांय सामाजिक चेतना " विषय पर डॉ मदन सैनी के निर्देशन में और " सेना के सूबेदार काव्य में लोक चेतना " के विषय पर डॉ मेघराज शर्मा के निर्देशन में 2009 व 2010 में लघु शोध ।

साहित्य जगत में श्री रवि राजपुरोहित जी ने जो मुकाम स्थापित किये है वो वाकई राजपुरोहित समाज और राजस्थानी साहित्य के लिए गौरव करने योग्य है ।

राजपुरोहित समाज इंडिया पेज / ग्रुप श्री रविजी का सह्रदय से आभार एवं सम्मान करता है ।

जय श्री खेतेश्वर दाता री सा। 

अगर आप इस मंच पर किसी और का जीवन परिचय देखना चाहते हैं तो मुझे लिख भेजिए अपना जीवन परिचय हमारा व्हाट्सएप नंबर है 9286464911

मिलते हैं जीवन परिचय के अगली श्रंखला में किसी नए जीवन परिचय के साथ तब तक के लिए अलविदा आपका शौर्य प्रताप सिंह राजपुरोहित

Thursday, 19 May 2022

वीर झुंझार वीर बापजी दामोदरजी का संक्षिप्त जीवन परिचय

वीर झुंझार वीर बापजी दामोदरजी का जन्म ग्राम- सांथू जिला-जालोर में सांथू के पालीवाल जागीरदार धीराजी सांथुआ के पुत्र रूप में हुआ था.. इनका विवाह सेवड़ राजपुरोहित गंगाधर जी रघुनाथजी की धर्मपरायण पुत्री दाड़म कुंवर के साथ हुआ था.!

वि. सं. 1609 के कार्तिक माह में जालोर राज्य एवं सिरोहीv पर, गायो-मवेशियों के इधर से उधर घास चरने को लेकर प्रायः छोटा-बड़ा लड़ाई-झगड़ा होता रहता था..! एक बार बात बढ़ जाने से दोनों ओर की सेना लड़ पड़ी और सिरोही राज्य की रक्षा में आए 72 बोड़ा चौहान सैनिक जालोर की सेना ने मार गिराए ! इसी संघर्ष में जालोर के 17 सोलंकी सैनिक सिरोही के सैनिको ने मार गिराए ..!

जब विवाद बहुत बढ़ने लगा तो दोनों शासनाध्यक्षो ने शांति वार्ता प्रारम्भ कर सांथू के जागीरदार धीराजी सांथूआ को यह विवाद शांतिपूर्ण सुलझाने हेतु सुपुर्द करने का निश्चय किया...!

दोनों राज्यो के दूत सांथू कोटड़ी पहुंचे तब वहां धीराजी बाहर गए हुए थे एवं उनके पुत्र कुंवर दामोदरजी वहां थे...ऐसा देख दूत निराश हो गए क्योंकि इस विवाद से अब बाहर कौन निकाले?

मनोस्थिति भांप दामोदरजी ने दूतों को बताया कि ऐसा क्या कार्य है...मैं पिताश्री की अनुपस्थिति में यथासम्भव प्रयास कर सकता हूँ..!

सीमा निरीक्षण पश्चात लोगो से बातचीत की और मन-ही-मन किसी निर्णय पर पहुंच गए तब दोनो पक्षकारों में से कुछ धीराजी की अनुपस्थिति में दामोदर जी निर्णय उचित मानने में आनाकानी करने लगे..!

इस पर वीर दामोदर जी ने दोनों पक्षो को सचेत करिये हुए कहा कि मेरा निर्णय मान्य करना ही होगा अन्यथा या सर्वनाश होगा..! 

मैं अपने बलिदान से यह सिद्ध कर दूंगा कि इस निर्णय हेतू मैं योग्य हूँ...अपनी मातृभूमि, गौमाता की रक्षा हेतू अपना अग्निस्नान करता हूँ...!

ऐसा कहकर वे अपने शरीर पर तेल सिंदूर डालकर अपने घोड़े पर अग्नि के तेज से चढे और अग्नि में प्रविष्ट हुए और चेताया कि अब जहां मेरे चीथड़े गिरे वही दोनों राज्यो की सीमा होगी....और फिर घोडा दौड़ा दिया...!

आग की लपटों से उस वीर के शरीर के अंग अग्निस्नान कर के जहां-जहां गिरे वह सीमा मान ली गई...!!

उनके इस शौर्य,बलिदान को देखने पुरे गाँव के गाँव उमड़ पड़े....पूरा जालोर एवं सिरोही राज्य राजपुरोहित दामोदरजी के बलिदान को नतशिर होकर नमन करने लगा..!

इस प्रकार तेलीया वागा धारण कर, झमर जलिया वीर झुंझार बापजी ने कैलाशनगर-मणादर और मेडा के बीच  शरीर त्याग दिया...! उसी स्थान पर वीर बावजी झुंझार दामोदरजी का स्मारक बना दिया..! वह सैकड़ो वर्षो से पूजित स्थल है...!

जब उन झुंझार जी ने पराक्रम कर अमरत्व प्राप्त किया और सन्देश अभी सांथू पहुंचना था उसी समय उनकी धर्मपत्नी को स्वतः ही ज्ञान हो गए एवं ऐसी आदर्श पत्नी ने प्राण त्याग दिए....उनका भी पाषाण विग्रह सांथू में मौजूद है...!

उन दिनों (करीब पौने पांच सौ वर्ष पूर्व) दोनों राज्यो की सरकार ने करीब 10 फ़ीट वर्गाकार के पक्के पत्थरो से निशान बनाकर पिलर निर्मित किये और ज़मीन में नीचे आ जाने से अभी 35-40 वर्ष पूर्व सिरोही एवं जालोर के जिलाधीशों ने नए पिलर उन्ही निशानों पर पुनः खड़े करवाए है जो आज भी दोनों जिलों की सीमाएं मानी जाती है...!

उनके मंदिर पर भक्त दर्शन हेतु आते रहते है... इनका मंदिर मेडा उपरला में मौजूद है....जिसका समस्त क्षेत्रवासी दर्शन लाभ लेते है!

अपने शौर्य से दो राज्यो के बीच शांति स्थापित करने के लिए राजपुरोहित झुंझार दामोदर जी के प्रति हम सब कृतज्ञ है..!


साभार- युग युगीन पाली राज्य का इतिहास-हरिशंकर जी 

स्रोत:- विक्रम सिंह लेटा के वाल से प्राप्त जानकारी

Thursday, 21 May 2020

महान तपस्वी संत श्री आत्मानंद जी महाराज का जीवन परिचय

 आज जीवन परिचय एक ऐसे महान संत और तपस्वी का है जिन्होंने अपना पूरा जीवन शिक्षा को समर्पित किया आज भारतवर्ष में गुरु महाराज जी के नाम से कई शिक्षण संस्थाएं और छात्रावास बनाए हैं ऐसे ही पूज्य संत का हम जीवन परिचय प्रस्तुत करने जा रहे हैं किसी प्रकार की कोई त्रुटि हो तो आप हमें जरूर सूचित करें हम उसमें सुधार करेंगे ...सवाई सिंह राजपुरोहित मीडिया प्रभारी सुगना फाउण्डेशन 
ॐ गुरु ग्रंथन का सार है, गुरु है प्रभु का नाम,
गुरु अध्यात्म की ज्योति है, गुरु हैं चारों धाम...
श्री 1008श्री आत्मानंद सरस्वतीजी महाराज का जीवन परिचय

पूरा नाम : - सात श्री 1008 स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज 
जन्म का नाम : - अचल सिंह 
जन्म तारीख 3 सितंबर , 1924 ( विक्रम सम्वत सुक्लापक्सा भाद्रपद चतुर्थी १९८१ - बुधवार ] 
पिता जी - श्री देवीसिंह राजपुरोहित गुन्देचा ( गुन्देशा ) 
माता का नाम : - श्रीमती मंगु देवी 
जन्म स्थान : - बारवा जाब तहसील : - बाली जिला - पाली ( राजस्थान ) 
गुरु का नाम : - श्री जगद्गुरु शंकराचार्य के शिष्य श्री 1008 श्री अनंत महाराज ज्योतिपीठ शांतानंद सरस्वती जी हैं 
श्री 1008 श्री अनंत महाराज ज्योतिपीठ शांतानंद संत श्री 1008 श्री शिक्षा सारथि स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज ने अपने यौवन काल शाह एक ऊंचे और तपस्वी का जीवन व्यतीत किया है । नियम और व्रतों का पालन किस कहा और कड़ाई से वैसा हमने आज तक दूसरे किसी व्यक्ति को नहीं करते देखा ! जिन लोगों ने संत श्री को निकट से देखा है । करता इस बात की सत्यता से भलीभांति परिचित होंगे ! संत श्री बहु प्रतिभा के धनी हैं । इनका जीवन प्रारम्भ से ही कर्ममय रहा है और बालकों की शिक्षा की तरह ही कन्याओं की शिक्षा पर भी बहुत बल दिया है । महान कर्मयोगी , सरस्वती जो राजपुरोहित समाज में शिक्षा क्षेत्र असीम योगदान . " अध्यात्मिक महापुरुष " घोर तपस्वी , संत श्री दतारा सुंदर वक्ताओं ने शिक्षा के क्षेत्र के विकास में सामाजिक हॉस्टल का गठन और , आपको को शिक्षा विद के नाम से जाने जाते है क्योकि आपने हॉस्टल राजपुरोहित जालोर , पाली मारवाड़ , फालना , रानीवाडा , कलंदरी , जोधपुर ( तीसरा विस्तार ) , सिरोही , भीनमाल और आहोरे और राजपुरोहित समाज के भवन भवस - सांचौर , सिरोही , कलदरी , पाली , निम्बेश्वर आदि समाज के कई जगह आज हॉस्टल पर संत श्री के नाम से भी प्रमुख स्थानों में विकसित कर रहे हैं . पुरानी हील और महादेव मंदिर का भी निर्माण किया है आपने कई गौशाला के विकसित किया हैं संत श्री 1008 श्री आत्मानन्द जी महाराज की समाधि जालौर में है🙏🏻🚩🪔🌹👏🏻यह बात है। उस समय की जब देश अंग्रेजो की गुलामी से स्वतंत्रत हो चुका था।

भारत स्वावलंबी बनने की शुरुआती चरण में था। ऐसे समय मे भारत का एक स्वर्णीम वर्ग राजपुरोहित जिसकी गणना समस्त मानव जाति के सबसे उच्चतम वर्ग में की जाती हैं। भूतकाल में हमारे पुर्वज इस समस्त सृष्टि के मार्ग दर्शक हुआ करते थे। ऐसे तपस्वीयों की संतान आज शिक्षा की कमी के कारण किसी का नेतृत्व करने की बजाय परदेशों मे मजदूरी करते हुए दिखाई दे रहे थे।
जो कार्य बैल के द्वारा किया जाना चाहिए था। वो कार्य अशिक्षित होने के कारण हमारे बंधु मजबूरी वश कर रहे थे।
जब समाज मे शिक्षा रूपी दीपक का प्रकाश कही दुर दुर तक नजर नहीं आ रहा था। चारों तरफ धोर अँधेरा ही अँधेरा दिखाई दे रहा था। तब ऐसे समय में राजपुरोहित समाज मे एक ऐसी दिव्य और तेजस्वी आत्मा युवा अवस्था में प्रवेश कर चुकी थी। जिसने हमारे समाज से अशिक्षा रूपी अंधकार को दूर करने के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर दिया।
ऐसी महान आत्मा ने अपने शरूआती समय.मे मुम्बई की जुहू चौपाटी पर हमारे बंधुओं को शिक्षित करने का प्रथम प्रयास हाथ मे लिया।
इतने पर भी जब उन्हे आत्म संतुष्टि नहीं हुई। तो उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन समाज को शिक्षित करने के लिए समर्पित करने का मन ही मन संकल्प लिया । और सर्वप्रथम,1960 में कालंद्री में छात्रावास के निर्माण से इसका श्री गणेश किया।
देखते ही देखते जालोर,सिरोही,फालना,जोधपुर,पाली,आबुरोड सभी जगहों पर छात्रावासों का निर्माण करवाया। और समाज को शिक्षित करने के लिए अहम भूमिका निभाई।
ऐसे महान्
ब्रम्हानन्दं परमसुखदं केवलं ज्ञानमूर्तीं | द्वन्द्वातितं गगनसदृशं तत्व मत्स्यादिलक्ष्यम् ||
एकं नित्यं विमलमचलं सर्वधीसाक्षिभूतमं | भावातीतं त्रिगुणरहित सद्गुरुं तं नमामि || समस्त राजपुरोहित समाज में शिक्षा के जागरण के लिए अपना सर्वोच्च अर्पित करने वाले परम् पूज्य सदगुरुदेव ब्रह्मलीन् शिक्षा सारथी स्वरुप गुरुदेव श्री श्री 1008 श्री आत्मानंद जी सरस्वती जी की 15 वी  पुण्यतिथि पर उनको शत-शत नमन वंदन 
सुगना फाउण्डेशन परिवार और राजपुरोहित समाज इंडिया टीम 

🚩🪔🌹👏🏻........  

ॐ गुरु ग्रंथन का सार है, गुरु है प्रभु का नाम,
गुरु अध्यात्म की ज्योति है, गुरु हैं चारों धाम....
श्री गुरूदेव देवानंद जी सरस्वती महाराज के आदेश से हैदराबाद में एक सस्था का गढन किया उसका नाम श्री आत्मान्दजी शिक्षा सेवा समिति है जिसका कार्यक्रम अच्छी तरह चलता है
 हर साल उनके जन्म दिवस के मौके पर और पुण्यतिथि पर हैदराबाद में कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाता है इस बार लॉक डाउन आने की वजह से कोई कार्यक्रम आयोजित नहीं किया गया।

गुरू जी की महानता भाग 1
एक समय की बात है एक किसी भक्त भाविक ने कहा महाराज श्री आपके लिए एक में बड़ी गाड़ी ला कर के दे देता हूं जिसमे आप और सभी भक्तों भावीक जन बैठकर के कहीं पर जा सकते हो तब महाराज श्री ने प्रेम से मुस्कुराते हुए बोले भाई तेरे पास में कुल कितनी राशि है जो तू गाड़ी लाना चाहता है तब भाई बोला अमुक इतने इतने राशि है तब गुरुदेव श्री ने कहा इस राशि को आप यहीं पर इस आश्रम में समर्पित कर दो मैं खुद गाड़ी लाऊंगा तब भाई बोला महाराज श्री आप केसी गाड़ी लाओगे तब महाराज श्री ने कहा भाई मैं ऐसी गाड़ी लाऊंगा जिसने अपनी पूरी समाज बैठेगी और कुछ समय के अंतराल के बाद महाराज श्री ने जालोर रेलवे स्टेशन के पास 6,,7, बिगा जमीन खरीदी और उसमें हॉस्टल बनवाया समाज के लिए और उस का उद्घाटन हुआ तब उस व्यक्ति को बुलवाया भाई यह समाज की बड़ी गाड़ी है उसमें दूर-दूर से बहुत भक्त भावीक जन पधारे हुए थे और लोग बैठ थे तभी महाराज श्री उस भाई को कहां देख भाई हमने यह गाड़ी लाई है जिसमें प्रकाश रूपी शिक्षा के इस प्रकाश में पुरा समाज बैठेगा इतना हमारे लिए चिंतन करने वाले उन महान् पुरुष कों छत छत नमन है ऐसी आत्मा हम सब लोगों के बिस में यदा कदा ही अवतरित होती हैं ऐसे तो यह भारत भूमि ऋषि मुनियों का ही देश राह और इसी नाम से जाना भी जाता है पर भाई हम कितने बहुत खुश भाग्यशाली हैं जो हमारे कुल में हमारे ही समाज में ऐसी मान हंसती का जन्म हुआ ।

 यह जानकारी हमें उपलब्ध करवाई है हैदराबाद से श्री चंपालाल जी राजपुरोहित में हम उनका भी तहे दिल से धन्यवाद करते हैं

 गुरु महाराज जी की पुण्य स्मृति पर फेसबुक पर राजपुरोहित समाज इंडिया द्वारा एक पोस्ट के दौरान हमें एक कमेंट मिला जालौर से अध्यापक श्रीमान महेंद्र सिंह राजपुरोहित का और उन्होंने गुरु महाराज जी के साथ रहते एक घटना का वास्तविक वर्णन हमें किया सोचा उसको मैं अपने इस जीवन परिचय में शामिल करूं प्रस्तुत है उनका यह कमेंट

गुरू जी की महानता भाग 2 :- बात उन दिनों की है जब में 1988-89 में होस्टल में पढ़ता था । एक दिन पेशाब घर में लगे टब में लड़के कंकर फेंककर निशाना लगा रहे थे।टब के छेद बंद हो गये ।पूरा भर के छलकने लगा ,पूरा पेशाबघर गीला हो गया। गुरूदेव घूमते-घूमते आते नजर पड़ी तो झट से बांह ऊंची करके पेशा भरे टब में से कंकर निकालने लगे तब हम दौड़कर गये गुरूदेव को एक तरफ लाकर हमने साफ किया। गुरूदेव ने कहा कि तुम्हारे चप्पल पेशाब में गीले होते हैं फिर तुम अपने कमरे,आश्रम,रसोई,और पता कहां कहां तक गंदगी ले जाओगे।हाथ तो गंदे कभी होते ही नहीं है,सुबह शौच के बाद सफाई करते हो ।हाथ साबुन से दो तीन बार धोते हो फिर उसी से भोजन भी करते हो ,पूजा पाठ भी करते हो  कभी हाथ को काट के फेंका क्या ?"
मैं किसी की निंदा या बुराई या महानता का बखान नहीं करता हुं। ये मेरे आंखों देखी सच्ची घटना है,और आप में से किसी ने महान संत को ऐसा करते देखा हो तो जरूर बताये।

 श्रीमान महेंद्र सिंह राजपुरोहित जी अपका धन्यवाद करता हूं


 इसी के साथ मुझे दीजिए इजाजत मिलते हैं किसी नए जीवन परिचय के साथ आपके इसी ब्लॉग पर आपका सवाई सिंह राजपुरोहित मीडिया प्रभारी सुगना फाउंडेशन 
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 नोट:- आप भी भेज सकते हैं मुझे अपना जीवन परिचय 

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Sunday, 9 February 2020

Bhajan kalakar Vijay Singh Rajpurohit ka Jivan Parichay.

स्वागत है आपका एक बार फिर से आप ही के मनपसंद ब्लॉग पर जिसमें हम लेकर आते हैं समाज से जुड़े साधारण और वशिष्ठ व्यक्तित्व के जीवन परिचय को और इसी कड़ी में हम आज आपके बीच लेकर आए हैं भजन कलाकार श्री विजय सिंह राजपुरोहित आइए जानते हैं उनके जीवन के बारे में हमारे इस विशेष पोस्ट के जरिए।


नाम:- विजय सिंह राजपुरोहित
जन्म:- 11.12.1996
पिता का नाम :- श्रीमान शैतान सिंह राजपुरोहित 
माता जी का नाम:- श्रीमती भगवती देवी
गांव का नाम:- कोरणा , तहसील पचपदरा, कल्याणपुर, 
जिला:- बाड़मेर

 भजन कलाकार और मेरे परम मित्र विजय सिंह राजपुरोहित का जन्म एक साधारण परिवार में हुआ अभी आप जोधपुर में रहते हैं और जोधपुर में ही अपनी पढ़ाई पूरी की है इनका बचपन से ही एक सपना था एक भजन कलाकार बनना और देशभक्ति गीतों को गाना व आपने अपनी स्कूल लाइफ में भी  26 जनवरी और 15 अगस्त में पर कार्यक्रमों में भाग लिया  लेकिन स्कूल लाइफ के पूरे हो जाने के बाद आप प्राइवेट जॉब और प्राइवेट पढ़ाई और इन को लगने लगा कि वह संगीत की दुनिया से बहुत दूर जा रहे हैं  लेकिन अपने सपने को पूरा करने के लिए आपने पूरी मेहनत की जोधपुर में अपनी पढ़ाई के साथ-साथ आपने गायकी करना शुरू किया और जागरण में जाना भजनों को सुनना और उन्हें गाना अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाया।

    विजय सिंह बताते हैं एक बार जब मैं खेतेश्वर जयंती में जोधपुर पहुंचा मैंने भजन कलाकार श्रीमान उदय सिंह राजपुरोहित का भजन सुना उसी दिन दिल में लग गया कि मुझे भी एक दिन इन्हीं के जैसा एक भजन कलाकार बनना है उस दिन उन्होंने भजन कलाकार श्रीमान उदय सिंह राजपुरोहित के सामने अपनी इच्छा जाहिर की और उनको कहा कि मुझे भी आप ही की तरह एक भजन कलाकार बनना है इस पर उदय सिंह जी ने कहा बहुत अच्छी बात है उस दिन से आपने मेहनत में कोई कमी नहीं रखी दिन रात मेहनत की और एक अच्छे भजन कलाकार के रूप में उभरे आपने उदय सिंह राजपुरोहित को अपना संगीत गुरु माना और उन्हीं की प्रेरणा से आगे बढ़ते रहे और उनके के साथ जाना और उनके पीछे पीछे भजनों को गाना शुरू किया और धीरे-धीरे अभ्यास करते रहे और आज समाज में एक अच्छे भजनकार के रूप में आप ने जगह बनाई। और जो कुछ भी हूं या जो कुछ भी बना हू वह गुरु महाराज श्री खेतेश्वर महाराज व श्री तुलछारामजी महाराज का आशीर्वाद है। मेरे गुरु श्रीमान उदय सिंह राजपुरोहित का साथ है और उन्हीं के साथ रहकर आगे भी समाज का नाम रोशन करुंगा।


    आज आप राजपुरोहित समाज के छोटे बड़े सभी कार्यक्रम में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं आज राजस्थान ही नहीं राजस्थान के बाहर भी आपने कहीं बड़े आयोजनों का हिस्सा बने जिसमें बेंगलुरु, सूरत, मुंबई और हैदराबाद आदि कार्यक्रम शामिल है आपने गुरु महाराज संत श्री खेतेश्वर महाराज पर कई भजन गए हैं शादी विवाह आदि समारोह के मौके पर आपने विशेष संकला भी शुरू की है आज समाज में आपकी एक विशिष्ट पहचान है  सुगना फाउंडेशन मेघलासियां परिवार और राजपुरोहित समाज इंडिया टीम आपके उज्जवल भविष्य की कामना करती हैं आप इसी प्रकार संगीत की दुनिया में परिवार और समाज का नाम रोशन करें ऐसी कामना करते हैं।


अब चलते चलते यूट्यूब से सुनिए यह फर्स्ट गाना जो कि पूज्य गुरु महाराज संत श्री खेतेश्वर महाराज पर गाया गया है विजय सिंह द्वारा....... और हाल ही में एक और भजन प्रस्तुत किया गया जो कि प्रियंका राजपुरोहित और विजय सिंह द्वारा संयुक्त रूप से गाया गया।
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अगर आप भजन कलाकार विजय सिंह राजपुरोहित से आमंत्रित करना चाहते हैं या किसी कार्यक्रम में बुलाना चाहते हैं तो इनका कांटेक्ट नंबर ये 8078601499 है 

और इसी के साथ मुझे दीजिए इजाजत मिलते हैं किसी और जीवन परिचय के साथ अगर आप भी देना चाहते हैं समाज अपना जीवन परिचय इस ब्लॉग के माध्यम से या समाज से जुड़ी कोई न्यूज़ या कोई विज्ञापन तो मुझसे संपर्क करें मेरे व्हाट्सएप नंबर पर मेरा व्हाट्सएप नंबर है 92864 64911 

आपका अपना दोस्त सवाई सिंह राजपुरोहित मीडिया प्रभारी सुगना फाउंडेशन और आरोग्यश्री समिति आगरा

Friday, 18 August 2017

राजपुरोहित समाज के अनमोल रत्न श्री अमर सिंह जी राजपुरोहित जीवन के बारे



सभी राजपुरोहित बंधुओं को सादर जय रघुनाथ जी री सा।

आज 36 कोम के किसान नेता , किसानो के मसीहा  व राजपुरोहित समाज के ऐसे युवा समाज सेवक का परिचय करवा रहे हे । जो  दबंग ,संघर्ष शील सरलता , महान ह्रदय व सभी समाज को साथ लेकर चलने वाला (सरल भासा मैं कहे तो  सामाजिक एकता कि बड़ी मिशाल कायम करने वाले) :-

       श्री मान अमर सिंह जी राजपुरोहित गॉंव गूलर , तहसील परबतसर, जिला नागौर आपका जन्म ग्राम पंचायत गूलर में  हुआ । आपकी  पारिवारिक पृष्ठभूमि में पिता जी खेती का काम करते है। आप एक खुशहाल किसान है। आपका व आपके परिवार का राजनिती से कोई सीधा सम्पर्क नहीं था। ना ही कोई उच्च पद पर आसीन था

         एक साधारण परिवार व किसान के घर मे जन्मे  आप का युवा अवस्था मे राजनीति की तरफ ज्यादा झुकाव था ।।आप ने  कांग्रेस पार्टी से अपने राजनैतिक जीवन कि शुरुआत कि
      आप की राजनीतिक ताकत का परिचय इस बात से दिया जा सकता है कि आप ने मात्र  25 वर्ष की आयु में कॉपरेटिव सदस्य का चुनाव जीता और 26 वर्ष की अल्प आयु मैं ग्राम पंचायत गूलर के सरपंच बन गए।। तथा इसके बाद मैं आप ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा तथा आप की धर्म पत्नी शांति देवी राजपुरोहित भी सरपंच पद पर रह चुकी है ।

       आप  नागौर जिला कांग्रेस प्रवक्ता , राजीव गांधी ब्रिगेड के अध्यक्ष भी रह चुके है व परबतसर तहसील कॉंग्रेस अध्यक्ष पद पर रह चुके है।।
             आप ने कोंग्रेस पार्टी को मजबूत करने हेतु गांव गांव ढाणी ढाणी घूम घूम  कर कांग्रेस पार्टी को मजबूत किया ।।
         आप ने 30 वर्षो तक पार्टी को अपनी ताकत दी ।और मजबूत किया। लेकिन कांग्रेस पर्टी की जिला स्तरीय कमेटी व लोकसभा उमीदवारों से आप की अनबन  ओर ब्लॉक स्तर पर गुटबाजी हो गई तो आप ने दुखी: होकर कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा दे दिया।
        आप को मनाने की बहुत कोसिस हुई पर आप नहीं माने ओर इसका परिणाम  नागौर लोकसभा  चुनावों में काँग्रेस को हार का सामना करना पड़ा ।।

          आप ने ग्राम गूलर के विकास में भी कोई कसर नहीं छोड़ी ।आप ने ग्राम पंचायत में सुधार करवाये चिकित्सा के क्षेत्र में ओर सड़को का निर्माण करवाया किसानों , गरिबो व युवा बेरोजगारो को उनका हक दिलाया तथा इनके हक के लिए कई बार आप ने आंदोलन भी कीया।  विधानसभा का घेराव भी कीया तथा विपक्ष के लोगो व पार्टीयो द्वारा जूठे मुकदमे लगाये गये। लेकीन आप ने कभी भी हिम्मत नही हारी  तथा शिक्षा के क्षेत्र मे आप का योगदान हमेशा याद रखा जाएगा।
     आपने विभिन्न जिला स्तरिय खेल कूद  प्रतीयोगीताये ग्राम गूलर में करवाकर आप ने सिद्ध कर दिया कि आप छात्र छात्राओं के भविष्य के बारे में कितने ज्यादा चिंतित हैं ।।
    आप ने गो माता की रक्षा के लिए हमेशा  तन मन धन से सहयोग दिया है तथा हमेशा तैयार रहते हैं।।

राजपुरोहित समाज पंचयात भवन पुष्कर के आप10- 15 साल तक अध्यक्ष रहे आपके कार्य काल मे राजपुरोहित समाज पंचायत भवन पुष्कर ने नई ऊंचाई को छुआ आप ने समाज भवन मैं व्यापक सुधार करवाये।
आप ने दहेजप्रथा ,मौसर प्रथा का घोर विरोध कीया ।ओर आप ने अपने दोनों पुत्रों की शादियों में दहेज नहीं लेकर एक समाज के लिए अच्छी पहल की है  अच्छा संदेस दिया है।।  तथा आप ने ओर आप के कार्य कर्ताओ ने श्री श्री 1008 श्री तुलछाराम जी महाराज का सफल चौमासा भी पुष्कर में करवाया ।।

          आप अखिल भारतीय ब्रह्म धाम आसोतरा मैं कमेटी मेंबर ट्रस्टी भी है । आप अभी राजपुरोहित समाज विकास समिति एवम छात्रावास अजमेर के अध्यक्ष है ।। अजमेर में आप भव्य छात्रावास का निर्माण करवा रहे हैं ।जो बड़ली के बाद मैं पूरे भारत वर्ष में राजपुरोहित समाज का  सबसे बड़ा छात्रावास है  जो कि सभी  अत्या आधुनीक  सुविधाओं से लैस है।।
          राजपुरोहित  समाज में आपको युवाओं के लिये सामाजिक एकता कि मिशाल कहा जा सकता हे। समाज के युवा बंधुओं को राजनितीक नियुक्तियों में आपका सहयोग उपलब्धियों वाला रहा हे।
समाज में कई परिस्थितियों तथा मुद्दों पर इनका संघर्ष युवाओं के लिये प्रेरणास्प्रद हे समाज हेतु कई मुक़द्दमे तक झेले

          श्री मान अमर सिंह जी राजपुरोहित आज भी उसी रुप व क्रम मे आपको समाज सेवा व जनसेवा करते नज़र आ जायेंगे .. ये क्रम अनवरत 30 ..वर्षों से निरन्तर जारी हे.....आपके उज्जवल भविष्य की कामना...करते हुवे ।।
"आपका एक छोटा सा
कार्यकर्ता"

विधानसभा क्षेत्र
   परबतसर
     नागौर

          धन्यवाद श्री लक्ष्मण सिंह राजपुरोहित

   अगर आप भेजना चाहता है किसी का जीवन परिचय तो हमें भेजे हमारे WhatsApp नम्बर 9286 464 911



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Sunday, 7 May 2017

Shri Atmanand ji Saraswati Ji Maharaj ka jeevan parichay

स्वामी श्री आत्मानंद सरस्वती महाराज

पूरा नाम : - संत श्री 1008 स्वामी श्री आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज 

जन्म का नाम : - अचल सिंह 

जन्म तारीख 3 सितंबर , 1924 ( विक्रम सम्वत सुक्लापक्सा भाद्रपद चतुर्थी १९८१ - बुधवार ] 

पिता जी - श्री देवीसिंह राजपुरोहित गुन्देचा ( गुन्देशा ) 

माता का नाम : - श्रीमती मंगु देवी जी

जन्म स्थान : - बारवा जाब तहसील : - बाली जिला - पाली ( राजस्थान ) 

गुरु का नाम : - श्री जगद्गुरु शंकराचार्य के शिष्य श्री 1008 श्री अनंत महाराज ज्योतिपीठ शांतानंद सरस्वती जी

श्री 1008 श्री अनंत महाराज ज्योतिपीठ शांतानंद संत श्री 1008 श्री शिक्षा सारथि स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज ने अपने यौवन काल शाह एक ऊंचे और तपस्वी का जीवन व्यतीत किया है । नियम और व्रतों का पालन किस कहा और कड़ाई से वैसा हमने आज तक दूसरे किसी व्यक्ति को नहीं करते देखा !

     जिन लोगों ने संत श्री को निकट से देखा है । करता इस बात की सत्यता से भलीभांति परिचित होंगे ! संत श्री बहु प्रतिभा के धनी हैं । इनका जीवन प्रारम्भ से ही कर्ममय रहा है और बालकों की शिक्षा की तरह ही कन्याओं की शिक्षा पर भी बहुत बल दिया है । महान कर्मयोगी , सरस्वती जो राजपुरोहित समाज में शिक्षा क्षेत्र असीम योगदान . " अध्यात्मिक महापुरुष " घोर तपस्वी , संत श्री दतारा सुंदर वक्ताओं ने शिक्षा के क्षेत्र के विकास में सामाजिक हॉस्टल का गठन और , आपको को शिक्षा विद के नाम से जाने जाते है क्योकि आपने हॉस्टल राजपुरोहित जालोर , पाली मारवाड़ , फालना , रानीवाडा , कलंदरी , जोधपुर ( तीसरा विस्तार ) , सिरोही , भीनमाल और आहोरे और राजपुरोहित समाज के भवन भवस - सांचौर , सिरोही , कलदरी , पाली , निम्बेश्वर आदि समाज के कई जगह आज हॉस्टल पर संत श्री के नाम से भी प्रमुख स्थानों में विकसित कर रहे हैं . पुरानी हील और महादेव मंदिर का भी निर्माण किया है आपने कई गौशाला के विकसित किया हैं संत श्री 1008 श्री आत्मानन्द जी महाराज की समाधि जालौर में है ।

       Dhanyavad by
 राजपुरोहित समाज Blog