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Sunday, 12 September 2021
डॉ मदन प्रताप सिंह राजपुरोहित का जीवन परिचय
Monday, 24 August 2020
शहीद शिवराम हरि राजगुरु राजपुरोहित का संक्षिप्त जीवन परिचय
जीवन परिचय के इस श्रंखला में समाज के ऐसे महान पुरुष का जीवन परिचय हम लेकर आए हैं जिन्हें आप सभी भली-भांति जानते हैं जी हां हम बात कर रहे हैं शहीद राजगुरु की आइए जानते हैं उनका संक्षिप्त परिचय आज उनके जन्मदिवस पर विशेष .....
राजगरू जी की जन्म जयंती पर शत्-शत् नमन्
आजादी रो एक दीवानों शिवराम हरि राजगुरु जपुरोहित जिनका पैतृक गाँव अजारी जिला सिरोही_है
नाम= शिवराम हरि राजगुरु राजपुरोहित
उप नाम=रघुनाथ, एम.महाराष्ट्र
जन्म स्थान=पुणे, महाराष्ट्र, ब्रिटिश भारत
जन्म तिथि =24 अगस्त, 1908
मृत्यु तिथि= 23 मार्च, 1931
मृत्यु मात्र= 22 वर्ष
मृत्यु स्थान =लाहौर, ब्रिटिश भारत, (अब पंजाब, पाकिस्तान में)
माता का नाम=पार्वती बाई
पिता का नाम=हरि नारायण
कुल भाई बहन दिनकर (भाई) और चन्द्रभागा, वारिणी और गोदावरी (बहनें)
जाति (Caste) Brahman Rajpurohit
शहीद भगत सिंह का नाम कभी अकेले नहीं लिया जाता, उनके साथ राजगुरु और सुखदेव का नाम भी बड़े सम्मान के साथ लिया जाता है। जी हां शिवराम हरि राजगुरु राजपुरोहित जो महाराष्ट्र के खेड़ा ग्राम में रहने वाले थे। इनका पैतृक गाँव अजारी है जिन्होंने भारत माता को गुलामी की जंजीरों में जकड़ने वाले अंग्रेजों के एक पुलिस अधिकारी को मार गिराया था। और भगत सिंह व सुखदेव के साथ ही उन्हें 23 मार्च 1931 को फांसी दी गई थी।
Is Se Juda Hua video Rajpurohit Samaj India hai YouTube channel per dekh sakte hai
आप के बलिदान को समाज कभी नहीं भूल पाएगा.... आप को शत-शत नमन और सादर श्रद्धांजलि अर्पित करता है सुगना फाउंडेशन राजपूत समाज इंडिया टीम
Thursday, 21 May 2020
महान तपस्वी संत श्री आत्मानंद जी महाराज का जीवन परिचय
🚩🪔🌹👏🏻........
गुरु महाराज जी की पुण्य स्मृति पर फेसबुक पर राजपुरोहित समाज इंडिया द्वारा एक पोस्ट के दौरान हमें एक कमेंट मिला जालौर से अध्यापक श्रीमान महेंद्र सिंह राजपुरोहित का और उन्होंने गुरु महाराज जी के साथ रहते एक घटना का वास्तविक वर्णन हमें किया सोचा उसको मैं अपने इस जीवन परिचय में शामिल करूं प्रस्तुत है उनका यह कमेंट
Sunday, 17 May 2020
सिंगर महावीर सिंह राजपुरोहित का जीवन परिचय
Thursday, 14 May 2020
गायक पारस राजपुरोहित का जीवन परिचय
Tuesday, 12 May 2020
जेठू सिंह राजपुरोहित का जीवन परिचय
Wednesday, 29 April 2020
भजन कलाकार कंवर सिंह राजपुरोहित संक्षिप्त परिचय
Monday, 27 April 2020
हिरण रक्षार्थ शहीद हरीसिंह राजपुरोहित का परिचय
शहीद_यादे..
हिरण रक्षार्थ शहीद हरीसिंह राजपुरोहित
शहीद हरीसिंह का जन्म राजस्थान के जैसलमेर जिले के झाबरा गांव में 1 सितम्बर , 1976 को हुआ। इनके पिता श्री राधाकिशन सिंह गांव में खेती का कार्य करते है । इनकी माता का नाम श्रीमती जतन कंवर है । बाल्यावस्था से ही गौ सेवा एवं वन्य जीवों के प्रति स्नेह भाव इनके जीवन का ध्येय था । परिवार की आर्थिक स्थिति सामान्य ही थी । इन्होने 8 वीं तक पढाई करने के बाद अपने पिता के कार्यो में हाथ बटाना शुरू कर दिया ।
परिवारिक खेती बाडी के साथ गौ सेवा , पर्यावरण संरक्षण तथा वन्य जीवों की सेवा इनके दिनचर्या के महत्वपूर्ण कार्य थे । रेगिस्थान इलाका जहां पानी की नितान्त कमी रहती है वहां अपने टेक्टर द्वारा पानी के टेंकर लाकर गायों और वन्य जीवों की प्यास बुझाना धर्म और कर्म था । कुछ वर्ष पूर्व कानोडिया पुराहितान निवासी प्रभु सिंह सेवड की सुपुत्री नेनू कंवर के साथ इनकी शादी हो गई । शादी के बाद भी श्री हरि सिंह की दिनचर्या और व्यवहार में काई अन्तर नही आया । गौ सेवा वन्य जीवों के प्रति दया भाव, पर्यावरण संरक्षक ( खेजडी , बैर , नीम के पेड लगाकर उनका पोषण करना ) से इनका जुडाव और बढ गया । छोटे से व्यवसाय चाय की दुकान द्वारा परिवारिक कर्तव्य निभाने के साथ - साथ जब भी समय मिलता तब गांव के युवाओं को अक्सर प्रेरणा देते थे कि गौ सेवा और वन्य जीवों की रक्षा करना हमारा कर्तव्य है । श्री हरि सिंह के 4 संताने जिनमें 2 पुत्र एवं 2 पुत्रियां है ।
28 अप्रेल 2004 प्रति दिन की भांति इस दिन भी सांय 7 बजे के करीब श्री हरि सिंह राजपुरोहित अपने टेक्टर से पानी का टेंकर लाने हेतु घर से निकले । गांव के बाहर ( कांकड में ) इनको अचानक गोली चलने की आवाज सुनाई पडी तो इन्हे इस बात का एहसासा हो गया कि कोई शिकारी है जो वन्यजीवों का शिकार कर रहा है । श्री हरि सिंह ने उसका पिछा किया तो देखा कि कुछ लोग हिरणों का शिकार करने के लिए सशस्त्र खडे थे । वो लोग उसी क्षैत्र के भील जाति के थे जिनमें प्रमुख शिकारी ओमा राम भील था । हरि सिंह ने इनको पहचान लिया और शिकार करने से मना किया । हरि सिंह ने कहा इन निरपराध अमुक जीवों की हत्या मत करो, मगर शिकायत ने उनकी सुनी अनसुनी कर हरि सिंह को कहा कि तुम यंहा से चले जाओ वरना हिरण से पहले तुम्हे गोली मार देंगे । अदंभ्य साहस के धनी हरि सिंह ने हिम्मत नही हारी , वह उनको ललकार कर कहने लगा - '' हां मेरी जान भले ही ले लो पर इन हिरणों का शिकार मत करो '' । काफी प्रयास करने के बाद भी जब हरि सिंह को लगा कि शिकारी रूकने वाले नहीं है तो दौडकर अपने चार - पांच साथियों को लेकर आया और शिकारिंयों को ललकारा । हरि सिंह साथियों सहित वापस आने तक शिकारियों ने एक हिरण को गोली मार दी थी ।
हरि सिंह इस अमानवीय क़ृत्य को देखकर स्वयं को रोक नहीं सका उसने ओमा राम भील से कहा कि वह स्वयं को पुलिस के हवाले कर दे मगर शिकारी ने अपनी बंदूक हरि सिंह राजपुरोहित के सीने पर तानकर कहा कि तुम लोग यहां से चुपचाप चले जाओ वरना इस हिरण की तरह तुम्हे भी गोली मार देंगे । निडर और अदंभ्य साहस के धनी हरि सिंह राजपुरोहित अपने प्राणों की परवाह किये बिना शिकारियों से भीड गया ।
इसी समय ओमा राम भील ने हरि सिंह राजपुरोहित को गोली मार दी । गोली लगने के बाद भी खून से लथपथ हरि सिंह ने शिकारी से बंदूक और म्रत हिरण को छीन लिया ।
बंदूक की गोली से घायल हुए हरी सिंह राजपुरोहित को पोकरण अस्पताल ले जाया गया । जब तक वे अस्पताल पंहुचे तब तक बहुत सारा खून बह चूका था । और अन्तत: ... यह महान कर्मयोगी वीर एवं वन्य जीव प्रेमी नश्वर संसार को छोडकर चला गया । हालांकि शिकारी एक हिरण का शिकार कर चूका था मगर स्व. श्री हरि सिंह राजपुरोहित की आत्मा इस बात से प्रसन्न थी की आज न जाने कितने हिरणों के प्राण बच गए । हे अमर वीर । तुम्हारा यह बलिदान विश्व वन्दनीय है आज समाज ही नहीं बल्कि सम्पूर्ण मानव जाति और प्रत्येक प्राणी तुम्हारी इस शहादत को नमन करते।।
सरकार ने शहीद को मरनोपरांत अमृतादेवी पुरस्कार से नवाजा।।
Tuesday, 21 April 2020
राजस्थानी भाषा के महान साहित्यकार स्व श्री नृसिंह राजपुरोहित जीवन परिचय
श्री मान मनफूल_सिंह, आड़सर ने कहा की 18 अप्रैल को जन्मदिवस है ब्रह्मलीन, महामना श्री नरसिंह जी राजपुरोहित खंडप मूर्धन्य विद्वान एवं साहित्यकार को सत सत नमन कोटिशः प्रणाम ।
एक विशेष सूचना
आप सभी भी अपना जीवन परिचय इस पोर्टल पर भेज सकते हैं हमारा व्हाट्सएप नंबर है 92864 64911
आपका अपना सवाई सिंह राजपुरोहित
मीडिया प्रभारी सुगना फाउंडेशन आरोग्यश्री समिति
Friday, 3 April 2020
समाज के महान संत का जीवन परिचय
Tuesday, 31 March 2020
Bhajan Gayak Gautam Rajpurohit Auwa ka jivan Parichay
Tuesday, 18 February 2020
ग्रीनमेन श्री नरपतसिंह जी लंगेरा संक्षिप्त परिचय।
Sunday, 9 February 2020
Bhajan kalakar Vijay Singh Rajpurohit ka Jivan Parichay.
जन्म:- 11.12.1996
Friday, 31 January 2020
Bhajan Samrat Gulab Singh Rajpurohit ka Jivan Parichay
नाम :- गुलाब सिंह राजपुरोहित
जन्म दिन :- 15. 6.1995
पिताजी का नाम :- श्री सुजान सिह राजपूरोहित
माता जी का नाम:-श्रीमती ढेली देवी
गोत्र:- राजगुरू
शिक्षा:- 12 वी पास
गाव का नाम:- बालेरा, जिला बाडंमेर
भजन कलाकार गुलाब सिंह के परिवार में मम्मी-पापा और चार भाइयों के साथ एक बहन है खुशहाल परिवार है बचपन से ही इनको संगीत से प्रेम था भजन सुनना पसंद था लेकिन चिंता थी मंच तक कैसे पहुंचे समय बीतता गया पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ी परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी अच्छी नहीं थी कि वह शिक्षा जारी रख सकें।
रोजगार की तलाश में गांव से बाहर जाना पड़ा मगर इनके अंदर की लगन हमेशा इनको संगीत की ओर ले जाने का प्रयास कर रही थी फिर 2012 में पुणे गए वहां पर प्रकाश श्रीमाली का प्रोग्राम देखा उसी दिन इनको लगा की गायकी तो सीखनी है फिर क्या था। 2013 में जोधपुर में कोई काम से गए थे वहां घोड़ा के चौक पर बहुत भीड़ देखी और रुका वहां जो इंसान भजन गा रहा था वो और कोई नहीं संगीत प्रेमी और दिव्य ऊर्जावान भजन कलाकार श्री उदय सिंह राजपुरोहित भजन सम्राट थे सोचा आज इनसे जरूर मिल कर जाऊंगा लेकिन भीड़ अधिक थी मिल नहीं पाया कुछ समय बाद 1 महीने बाद बड़ी मुश्किल से उदय सिंह जी से मिलना हुआ इनका व्यक्तित्व देखकर मुझे इतनी खुशी हुई शायद मुझे मेरी मंजिल मिल गई 5 जनवरी 2014 को उनके साथ मैंने संगीत जीवन की शुरुआत की धीरे-धीरे गुरु महाराज की कृपा से नियंत्रण रियास करते रहे और उन्हें समाज में काफी अच्छा रिस्पॉन्स मिलने लगा 2016 आते-आते आपने समाज के कई बड़े प्रोग्रामों में हिस्सा लेना शुरू कर दिया फिर क्या था वह दिन है और आज का दिन है आप आज राजस्थान ही नहीं राजस्थान के बाहर भी बेंगलुरु, हैदराबाद, सूरत जैसे बड़े शहरों में भी प्रोग्राम किए हैं । 14 अप्रैल 2018 को पूज्य गुरु महाराज संत श्री तुलसाराम जी महाराज के समक्ष भजन प्रस्तुत किया है और आपको गुरु महाराज का आशीर्वाद मिला।
जहां समाज बंधुओं का बहुत ही अच्छा प्यार मिला भजन सम्राट उदय सिंह राजपुरोहित ने आपको हमेशा अपनी छाती से लगा के रखा है और उन्हीं के सहयोग और प्यार से अपनी गायकी का लोहा मनवाया है। आप अभी पाली जिले में रहकर भजन के साथ साथ पार्ट टाइम जॉब भी कर रहे हैं गुलाब सिंह जी ने हमें बताया जीवन में कठिनाइयां तो बहुत है पर डट कर सामना करता रहा कुलदेवी और गुरु महाराज के आशीर्वाद से आज सब कुछ सही चल रहा है।
आज समाज में आपकी एक विशिष्ट पहचान है सुगना फाउंडेशन परिवार आपके उज्जवल भविष्य की कामना करता है आप निरंतर इसी प्रकार गायकी में अपना लोहा मनाते रहे और गुरु महाराज का आशीर्वाद आप पर बना रहे मिलते हैं किसी और जीवन परिचय के साथ आपका दोस्त सवाई सिंह राजपुरोहित मीडिया प्रभारी सुगना फाउंडेशन एंड आरोग्यश्री मेला समिति.
- भजन सम्राट गुलाब सिंह जी का कांटेक्ट नंबर आप भी भजन संध्या के लिए इनको जरूर याद करें .
- 9772443541
Saturday, 2 June 2018
दिनेशपाल सिंह राजपुरोहित बीसूकलां का जीवन परिचय

प्रिय बन्धुओ ,
आज की कड़ी में हम ऐसे नवोदित कवि का परिचय एवम उनकी उपलब्धियों को लेकर आये है जिनकी लेखनी पर बड़े बड़े कवि अचंभित है , माँ शारदे की उनपर अतिकृपा है , वो जो भी कवित्त रचते है पढ़ने वाले के सीधे ह्रदय तक वो रचना स्थान बनाती है ।
जी हाँ हमारी आज की कड़ी के कवि है श्री दिनेशपाल सिंह आत्मज श्री शक्तिसिंह श्रीरख राजपुरोहित बीसूकलां..
आपकी सम्पूर्ण स्कूली शिक्षा बाड़मेर में हुई। कक्षा 10वीं के बाद गवर्नमेंट पाॅलिटेक्निक कॉलेज, बाड़मेर सेमैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा किया।बाद में कला संकाय में स्नातक की जिसके अन्तिम वर्ष की परिक्षायें कुछ सप्ताह पूर्व ही समाप्त हुई।साथ ही प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी चल रही है।साहित्य के क्षेत्र में रूचि 2016 के अन्तिम माह से जागृत हुई, जब आपने पहली बार डिंगल दोहे पढे़..फिर दिलचस्पी बढती गई, आपने उस दौरान आॅनलाइन माध्यमों पर उपलब्ध साहित्य का खूब अध्ययन किया। दोहे, सोरठे, कुण्डलिये, छप्पय, छंद, कवित्त, डिंगल गीत सबकुछ अति प्रिय लगा..कई प्राचीन डिंगल कवि जिनमें बारहठ ईश्वरदास, सूर्यमल्ल मिश्रण, हिंगलाजदान कविया आपके पसंदीदा कवि रहे..बाद में पिंगल की तरफ दिलचस्पी बढी जिनमें तुलसीदास, भूषण, पद्माकर, जगन्नाथ रत्नाकर की लेखनी से दिनेशपाल जी प्रभावित व प्रेरित हुए। आपकी कवित्त रचना की प्रेरणा भूषण व जगन्नाथ रत्नाकर हैं। बाद के दिनों में सोशल मीडिया पर साहित्यिक ग्रुपों से जुड़ाव हुआ जिससे वर्तमान कवियों व उनकी रचनाओं की जानकारी मिली,और दिनेशपालजी की रचनाओं को मंच मिला।
आपने अभी तक महाराणा प्रताप , मीराबाई , माँ शारदे , माँ बीसहत्थ , शिव स्त्रोत , श्री खेतेश्वर स्तुति , झांसी की रानी की कवित्त और भगवान परशुरामजी पर अति सुंदर रचनाओं का सृजन किया है , जिसमें शिव स्त्रोत बहुत ही विशिष्ट है ।
दिनेशपाल जी द्वारा लिखी गयी महाराणा प्रताप पर रचना आपके समक्ष रख रहा हूँ
बै तीर तूणीरान्, म्यान में कृपान दबै,
मेछ के पगान् दबै, मान हिंदवान को।
भुजवान के भुजान, दबै दान खुर्सान ते,
कंठ के कड़ान् दबै, बान ही जबान को।
दबै गढ़ के गुमान, दिलहीं की चढान ते,
गीता के बखान दबै, गान ही कुरान को।
रावन के राव दबै, तूफान मुगलान् ते,
लेश न 'दिनेश' दबै, केश "महाराण" को।।
इसके अलावा दिनेशपाल जी द्वारा रचित खेतेश्वर स्तुति के कुछ अंश पेश कर रहा हूँ-
सुकंजआसनं मुकुंद हंस पीठ संज है;
गले प्रसून माल पै भ्रमार झुंड गुंज है।
पताक श्वेत पाण भाल भाण सा फबंत है;
नमो स्वरूप ब्रह्म संत खेत को अनन्त है।।१।।
काम है न क्रोध है, न मोह है न मोद है;
गुणी महान् वो समान गंग ही कि गोद है।
रगत्त रोम में विरक्त राग ही रमन्त है ;
नमो स्वरूप ब्रह्म संत खेत को अनन्त है।।२।।
सुनीत है सुशांत वो सुभाव से स्वछंद है;
महा मुनीश के समीप लोक जाल मंद है ।
प्रचंड रोष पेख रेल यान भी रुकन्त है;
नमो स्वरूप ब्रह्म संत खेत को अनन्त है।।
दिनेशपाल जी की आने वाली रचनाओं में
-1. देवी बीसहथ रा सोरठा।2. ब्रह्मावतार श्रीखेतेश्वर महाराज रो झमाल छंद।3. गंगाजी रा सोरठा है ।
प्रिय मित्रों राजपुरोहित समाज के अनमोल रत्न श्री दिनेशपाल जी का #rajpirohit_samj_india पेज सह्रदय से सम्मान करता है।
समाज के उभरते कवि की इस विशिष्ट जानकारी को सभी तक पहुंचाने के लिए शेयर जरूर करें ।
नोट :- अब से इस सीरीज की हर पोस्ट हर शनिवार को पेश की जाएगी ।
धन्यवाद।
जय श्री खेतेश्वर दाता की सा ।
पोस्ट by नरपतसिंह राजपुरोहित ह्रदय
प्रिय बन्धुओं आपको हमारी ये पहल कैसी लगी हमे जरूर बताएं ...
आप भी राजपुरोहित समाज के साहित्यकार , संगीतकार या खेल से जुड़ी प्रतिभा के बारे में हमे लिखकर भेज सकते है ।
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