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Saturday, 3 June 2023

कवि एव साहित्यकार श्री रवि पुरोहित संक्षिप्त जीवन परिचय

 प्रिय मित्रों ,,,,, 

राजपुरोहित समाज की कला से जुड़ी हस्तियों के परिचय एवम उपलब्धियों की कड़ी मे आज हम कवि एवम साहित्यकार श्री रवि जी पुरोहित के जन्म दिवस के शुभ अवसर पर लेकर आये है। कविराज का संक्षिप्त जीवन परिचय भाई नरपत सिंह हृदय द्वारा लिखित

साहित्य साधना के परम उपासक श्री रविजी पुरोहित की साहित्य क्षेत्र में एक विशिष्ट पहचान है ।

5 जून 1968 में जन्मे श्री रविजी बीकानेर जिले के श्री डूंगरगढ़ के निवासी है और हाल बीकानेर में राजस्थान सरकार अधीनस्थ लेखा सेवा में कार्यरत है ।

आपने महर्षि दयानंद सरस्वती विश्व विद्यालय अजमेर से 1989 में वाणिज्य स्नात्तक की डिग्री परीक्षा उतीर्ण की ,ततपश्चात 1991 में हिंदी साहित्य में स्नातकोत्तर की डिग्री प्राप्त की।  फिर वर्ष 2010 में आपने महाराजा गंगासिंह विश्व विद्यालय बीकानेर से राजस्थानी भाषा मे एम. ए. की डिग्री उतीर्ण की ।

शोध सर्वे

मरुभूमि शोध संस्थान श्री डूंगरगढ़ में वर्ष 1989 से 1991 तक आप मानस शोध में सहायक रहे है ।

'चुरू अंचल रा लोक देवतावां अर लोक मान्यतावां ' इस विषय पर आपके शोध कार्य चालू है ।

साक्षरता के क्षेत्र में सरकारी एवम गैर सरकारी प्रयास में दशा एवम दिशा के लिए शिक्षा समाज और चेतना में आपकी शैक्षणिक परियोजना की भूमिका रही है। 

सदस्यता -

साहित्य अकादमी नई दिल्ली के राजस्थानी भाषा परामर्श मंडल के वर्तमान में आप सदस्य है । राजस्थानी भाषा साहित्य एवम संस्कृति अकादमी बीकानेर की पांडुलिपि प्रकाशन सहयोग तदर्थ उप समिति का संयोजकीय दायित्व एवम सदस्यता रही वर्ष 2012 से 2014 तक ।

वर्ष 2006 से 2008 तक आप राजस्थान साहित्य अकादमी उदयपुर की सरस्वती सभा के सदस्य रहे है। 

ASIA PACIFIC WHO*S WHO के आप पंजीबद्ध रचनाकार है ।

राष्ट्रभाषा हिंदी प्रचार समिति श्रीडूंगरगढ़ के आप आजीवन सदस्य है और वर्तमान में इसके सयुंक्त मंत्री भी है ।

राजस्थान प्रगतिशील लेखक संघ , सार्वजनिक पुस्तकालय श्रीडूंगरगढ़ की आजीवन सदस्यता और प्रबन्ध समिति के पूर्व सदस्य भी है । 

लेखन -

प्रांतीय और राष्ट्रीय स्तर की पत्र पत्रिकाओं में कहानी ,कविता , निबन्ध , व्यंग्य , आलोचना , लघुकथा , फीचर आलेख आदि का सन 1985 से लगातार प्रकाशन होता आ रहा है ।

आकाशवाणी के विभिन्न केंद्रों एवम दूरदर्शन तथा अन्य चैनलों पर आपकी विविध विधाओं की रचनाओं का प्रचुर प्रसारण होता रहता है।  

कई संपादित संकलनों में रचनायें संकलित है। 

प्रकाशन

चमगूंगो (1991) , हासियो तोड़ता सबद (1996) , राजस्थानी बाल कविता संगह 'तिरंगों' (2006) और उतरूँ उँडे काळजै''(2015) इत्यादि राजस्थानी कविता संग्रह प्रकाशित हो चुकी है ।

सेना के सूबेदार (2006) और 'आग अभी शेष है (2018) हिंदी कविता संग्रह का प्रकाशन। 

एक और घोंसला(1997)और धुले-धुले चेहरे (2015) हिंदी कहानी संग्रह का प्रकाशन तथा हिंदी व्यंग्य निबन्ध संग्रह "सपनों का सुख " का 2006 में प्रकाशन हो चुका है । 

काव्य संग्रह " उतरूँ उँडे काळजै " का हिंदी अंग्रेजी संस्कृत तथा पंजाबी में अनुवाद कर चुके है और गुजराती भाषा मे अनुवाद का कार्य जारी है ।

कुछ कविताओं का नेपाली उड़िया मराठी और बांग्ला भाषा मे भी अनुवाद हो चुका है। 

सम्पादन

'यादां रै आँगणीये ऊभा उणीयारा" (राजस्थानी रेखांचित संग्रह ) , आंखों में आकाश , राजस्थान शिक्षा विभाग के लिए बाल साहित्य संग्रह का 2012 में सम्पादन। 

उकळती ओकळ सूं उपज्या आखर , (श्री श्याम महर्षि री काव्य सिरजण समग्र ) । राजस्थली , लोक चेतना की राजस्थानी तिमाही का पिछले 25 वर्षों से प्रबन्ध प्रकाशन।  जागती जोत (राजस्थानी भाषा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी बीकानेर की मुख पत्रिका) का एक वर्ष तक सम्पादन । "हस्तक्षेप" ( साहित्यिक फोल्डर के चार अंको का सम्पादन ) 

एक दर्जन से अधिक अभिनंदन ग्रन्थों एवम स्मारिकाओं का सम्पादन। 

भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों ,राजस्थानी भाषा की एकेडमियों एवम कई प्रतिष्ठित एजेंसियों द्वारा आयोजित-प्रायोजित राष्ट्रीय , राज्य स्तरीय और आंचलिक समारोहों का आप संचालन कर चुके है । राजस्थान शिक्षाकर्मी का अनोपचारिक शिक्षा अनुदेशक आवासीय प्रशिक्षण शिविर का व्यवस्थापन । 

अनुवाद

जिओ मेरे साईंयां ,, (वीरसिंह की पंजाबी कृति ) का राजस्थानी अनुवाद ।

कैवती ही माँ , (युवा कवियित्री सुमन गौड़ की हिंदी कविताओं का राजस्थानी अनुवाद ) 

म्हनैं चांद चाइजै , ( साहित्य अकादमी दिल्ली द्वारा पुरस्कृत श्रीकांत वर्मा के चर्चित उपन्यास कृति) का राजस्थानी अनुवाद। 

कुछ तो बोल , (कवि श्याम महर्षि की राजस्थानी कृति ) का हिंदी अनुवाद।  

पुरस्कार और सम्मान - 

साहित्य अकादमी दिल्ली द्वारा जीवो म्हारा सांवरा (वीरसिंह की पंजाबी कृति) के लिए 'अनुवाद पुरस्कार 2016 ।

राजस्थान सरकार द्वारा उत्कृष्ट साहित्य लेखन के लिए राज्य स्तरीय पुरस्कार । 

राजस्थान साहित्य अकादमी उदयपुर का " भगवान अटलानी युवा लेखन पुरस्कार । 

राजस्थानी भाषा साहित्य एवम संस्कृति अकादमी बीकानेर का " 

बावजी चतुरसिंह जी अनुवाद पुरस्कार ।

इसके अलावा आपको , मैथिलीचरण गुप्त युवा लेखन सम्मान, पीथळ पुरस्कार , महेंद्र जाजोदिया पुरस्कार , शब्दनिष्ठा सम्मान ,

दी यंग्स वेलफेयर सोसायटी रतनगढ़ द्वारा रामगोपाल गिरधारीलाल सर्राफ अलंकरण ।

सृजन सेवा संस्थान श्रीगंगानगर द्वारा साहित्यकार सम्मान ।

पंडित विद्याधर शास्त्री अवार्ड ।

त्रिलोक शर्मा स्मृति संस्थान श्रीडूंगरगढ़ द्वारा " संवाद सम्मान ।

इसके अलावा " साहित्य शिरोमणि सम्मान , ज्ञान श्री सम्मान , राजपुरोहित गौरव सम्मान । सहस्त्राब्दी हिंदी सेवी सम्मान । 

निम्बोळ का साहित्य साधक सम्मान। 

इनके अलावा भी विभिन्न संस्थाओं द्वारा आप को सम्मानित किया गया है। पत्रकारिता - दैनिक नवज्योति और दैनिक भास्कर के अलावा अन्य कई प्रतिष्ठित पत्रों के लिए मानव संवाद प्रेषण का कार्य । 

शोध

महाराजा गंगासिंह विश्व विद्यालय बीकानेर द्वारा " रवि पुरोहित रै काव्य मांय सामाजिक चेतना " विषय पर डॉ मदन सैनी के निर्देशन में और " सेना के सूबेदार काव्य में लोक चेतना " के विषय पर डॉ मेघराज शर्मा के निर्देशन में 2009 व 2010 में लघु शोध ।

साहित्य जगत में श्री रवि राजपुरोहित जी ने जो मुकाम स्थापित किये है वो वाकई राजपुरोहित समाज और राजस्थानी साहित्य के लिए गौरव करने योग्य है ।

राजपुरोहित समाज इंडिया पेज / ग्रुप श्री रविजी का सह्रदय से आभार एवं सम्मान करता है ।

जय श्री खेतेश्वर दाता री सा। 

अगर आप इस मंच पर किसी और का जीवन परिचय देखना चाहते हैं तो मुझे लिख भेजिए अपना जीवन परिचय हमारा व्हाट्सएप नंबर है 9286464911

मिलते हैं जीवन परिचय के अगली श्रंखला में किसी नए जीवन परिचय के साथ तब तक के लिए अलविदा आपका शौर्य प्रताप सिंह राजपुरोहित

Sunday, 17 May 2020

सिंगर महावीर सिंह राजपुरोहित का जीवन परिचय

 एक बार फिर से मैं हाजिर हो चुका हूं आपका सवाई सिंह आगरा मीडिया प्रभारी सुगना फाउंडेशन 
जीवन परिचय की अगली श्रंखला में आप सबके बीच लेकर आया हूं सिंगर महावीर सिंह राजपुरोहित का जीवन परिचय

नाम : महावीर सिंह राजपुरोहित
पत्नी का नाम :- श्रीमती बसंती कंवर
बच्चो का नाम:- मीनाक्षी, चेतना
पिता का नाम :- श्रीमान मांगीलाल सिंह राजपुरोहित 
माता का नाम :- श्रीमती मनोहरी देवी
गोत्र :- सेवड़ 
जन्म दिन :- 05 जुन 1992
शिक्षा:-  एम.ए (हिन्दी)
गाँव का नाम :- हिंयादेसर तह. नोखा
जिला:- बीकानेर राजस्थान

भजन कलाकार महावीर सिंह के परिवार में दादीजी, माता जी, पिता जी और चार भाई के साथ एक बहन है खुशहाल परिवार है बचपन से ही इनको संगीत से प्रेम था बचपन से संगीत सुनना पसंद था औऱ इस रुचि को चरितार्थ करने करने में महावीर सिंह को गाँव के बड़े भाई देवी सिंह जी राजपुरोहित जो 2004 में गांव सतत शिक्षा केन्द्र चलाते थे उसी दौरान उन्होंने 2006 में संगीत वाद्य यंत्र (हारमोनियम) उपलब्ध करवाया। औऱ आपको पुराने भजनों की ओर आकर्षित करने में भजन सम्राट श्री रामनिवास राव व गांव के बुद्धिजीवी मधुरभाषी सत्संगी जीवनयापन करने वाले चौधरी मोडारामजी सन्त का सानिध्य प्राप्त हुआ। आपको इस कार्य में परिवार का भरपूर सहयोग मिला विशेष रूप से बड़े भाई साहब सवाई सिंह राजपुरोहित का बहुत योगदान रहा जिनकी अहमदाबाद नारोल क्षेत्र में मिठाई की दुकान है। अपनी सफलता का श्रेय अपने भाई साहब को देते हैं।

 शिक्षा के लिए गांव से व गांव से बाहर भी जाना पड़ा। उसके बाद उन्होंने निश्चय कर लिया की मुझे एक अच्छा भजन गायक बनना है उसके बाद जब भी समय मिलता आप संगीत वाद्य यंत्रों को बजाने व गाने को दैनिक दिनचर्या में शामिल कर दिया। धीरे धीरे गांव के सत्संग,जागरण में भजन गायन चालू कर दिया छोटी उम्र व मधुर गायन के कारण सम्पूर्ण ग्रामवासियों का खूब स्नेह मिला जो आजतक जारी है। आप वर्तमान में प्राइवेट कंपनी में कोगटा फाइनेंस इंडिया लिमिटेड में ब्रांच मैनेजर है।

 गायक महावीर सिंह से खास बातचीत में हमें बताया मेरे सौभाग्य यह है कि जब पूज्य गुरु महाराज संत श्री तुलछाराम जी महाराज के द्वारिका चातुर्मास में रात्रि सत्संग करने का अवसर मिला। फिर धीरे धीरे समाज के अन्य राज्यो के कार्यक्रमो में भजन संध्या में प्रस्तुति देना अवसर मिलने लगा।
 आज आसपास के 15- 20 गांव में भजन संध्या हेतु मुझे आमंत्रित किया जाता है । इसी क्रम में मुझे 1 मार्च 2020 श्री खेतेश्वर मंदिर प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव बीकानेर में दाता के आशीर्वाद से पूरी भजन संध्या संपन्न करने का मौका मिला जो मेरे लिए बहुत ही सौभाग्य की बात है ।

 आपको बता दें सुगना फाउण्डेशन व राजपुरोहित समाज इंडिया द्वारा फ़ेसबुक पेज पर आयोजित परम पूज्य गुरु महाराज संत श्री खेतेश्वर महाराज जी के जन्म दिवस व पुण्यतिथि के अवसर पर लाइव भजन के प्रस्तुतियां दी है जिसे समाज के गणमान्य लोगों ने बहुत ही सराया और प्रशंसा की व साथ ही प्रिंट मीडिया ने भी उनकी सराहना की। और आपने इसी शुभ अवसर पर अपने स्वयं द्वारा लिखित भजन "धाम आसोतरा सोवणो" को फेसबुक पेज राजपुरोहित समाज इंडिया के माध्यम पर लांच किया आप इस भजन को इस लिंक पर क्लिक करके सुन व देख सकते हैं।
महावीर राजपुरोहित हियादेसर की आवाज में बहुत ही सुंदर भजन


सुगना फाउण्डेशन परिवार और राजपुरोहित समाज इंडिया टीम महावीर सिंह राजपुरोहित उज्जवल भविष्य की कामना करता है साथ ही  मां सरस्वती व गुरु महाराज श्री खेतेश्वर दाता का आशीर्वाद सदैव आप पर इसी प्रकार बना रहे आप परिवार समाज और देश का नाम रोशन करें ऐसी मंगल कामना करता है।

Wednesday, 29 April 2020

भजन कलाकार कंवर सिंह राजपुरोहित संक्षिप्त परिचय

 एक बार फिर से मैं आप सभी के बीच हाजिर हो चुका हूं जीवन परिचय की अगली कड़ी में मैं लेकर आया हूं भजन कलाकार और सिंगर कंवर सिंह राजपुरोहित कनोडिया का जीवन परिचय..... आपका सवाई सिंह राजपुरोहित मीडिया प्रभारी सुगना फाउंडेशन एक पहल समाज के लिए


नाम:- कंवर सिंह राजपुरोहित
पिता का नाम:-  श्री लुम सिंह राजपुरोहित,
माता का नाम:- श्रीमती धापू देवी,
गोत्र :- सेवड़
गांव:- कनोडिया पुरोहितान, जोधपुर 
ननिहाल:- कोरना  जिला बाड़मेर 
जन्मतिथि:- 12 अगस्त 1982
 हाल :- जोधपुर 

  कंवर सिंह राजपुरोहित के परिवार मे 2 भाई और तीन बहिन है इनका ससुराल बासनी राजगुरु जोधपुर में है तथा परिवार में तीन पुत्र है |परिवार में बड़ा होने के कारण शिक्षा क्षेत्र में कोई विशेष सफलता प्राप्त नहीं की माध्यमिक स्तर तक की पढ़ाई उपरांत ज्वेलरी व्यवसाय में सेवायें दे रहा हूं।
कंवर सिंह को बचपन से ही फिल्मी गाने सुनने का बहुत शौक था। किशोर कुमार , कुमार सानू इनके पसंदीदा गायक रहे हैं । जिनके गाने गुनगुनाता थे।

  कंवर सिंह राजपुरोहित बताया कि संगीत क्षेत्र में आना एक इत्तेफाक से कम नहीं था मेरे आदरणीय श्री उदय सिंह राजपुरोहित ने जब एक बार मुझे सुना तो मुझे भजन गायक बनने का अवसर प्रदान किया और उसके बाद उनके साथ कई कार्यक्रम में हिस्सा लेता रहा और धीरे-धीरे मेरी रुचि बढ़ती गई और पहचान भी बनी जिस वजह से समाज ही नहीं वरन पूरे भारतवर्ष में अनेकों राज्यों में कार्यक्रम करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। 

 ब्रह्मधाम आसोतरा में प्रति माह पूर्णिमा को वहां सत्संग करने का अवसर मिलता रहा । साथ ही कई एल्बम में गाने का भी अवसर मिला बाल ब्रहमचारी संत शिरोमणि ब्रह्मधाम गादीपति श्री तुलसाराम जी महाराज का आशीर्वाद भी प्राप्त हुआ। जिस कारण से मेरा हौसला बढ़ा और गुरु कृपा से आज इस मुकाम को हासिल कर पाया । 
 आपने सुगना फाउंडेशन द्वारा आयोजित श्री खेतेश्वर महाराज जी के पुष्प श्रद्धांजलि के मौके पर भजन संध्या में भाग लिया। जिसका लाइव टेलीकास्ट सोशल मीडिया के सबसे बड़े प्लेटफार्म राजपुरोहित समाज इंडिया पर किया गया उस पर आपने लाइव भजनों की प्रस्तुतियां दी जिसे समाज के लोगों ने बहुत ही पसंद किया।

भजन कलाकार और सिंगर कंवर सिंह राजपुरोहित 
हम आपके उज्जवल भविष्य की कामना करते हैं आप इसी प्रकार परिवार और समाज का नाम रोशन करें मां सरस्वती का आशीर्वाद सदैव आप पर बना रहे..... टीम सुगना फाउंडेशन

आप भी भेज सकते हैं अपना जीवन परिचय अगर आप भी संगीत, साहित्य या किसी भी क्षेत्र में अपना वर्चस्व रखते हैं तो हमें जरूर लिखिए हमारा व्हाट्सएप नंबर है 92864 64911 एक विशेष सूचना एवं नोट अगर आप इस ब्लॉक से कोई भी सामग्री ले रहे हैं तो एक बार अनुमति अवश्य प्राप्त कर लें।

Saturday, 2 June 2018

दिनेशपाल सिंह राजपुरोहित बीसूकलां का जीवन परिचय



प्रिय बन्धुओ ,
               आज की कड़ी में हम ऐसे नवोदित कवि का परिचय एवम उनकी उपलब्धियों को लेकर आये है जिनकी लेखनी पर बड़े बड़े कवि अचंभित है , माँ शारदे की उनपर अतिकृपा है , वो जो भी कवित्त रचते है पढ़ने वाले के सीधे ह्रदय तक वो रचना स्थान बनाती है ।
जी हाँ हमारी आज की कड़ी के कवि है श्री दिनेशपाल सिंह आत्मज श्री शक्तिसिंह श्रीरख राजपुरोहित बीसूकलां..

      आपकी सम्पूर्ण स्कूली शिक्षा बाड़मेर में हुई। कक्षा 10वीं के बाद गवर्नमेंट पाॅलिटेक्निक कॉलेज, बाड़मेर सेमैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा किया।बाद में कला संकाय में स्नातक की जिसके अन्तिम वर्ष की परिक्षायें कुछ सप्ताह पूर्व ही समाप्त हुई।साथ ही प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी चल रही है।साहित्य के क्षेत्र में रूचि 2016 के अन्तिम माह से जागृत हुई, जब आपने पहली बार डिंगल दोहे पढे़..फिर दिलचस्पी बढती गई, आपने उस दौरान आॅनलाइन माध्यमों पर उपलब्ध साहित्य का खूब अध्ययन किया। दोहे, सोरठे, कुण्डलिये, छप्पय, छंद, कवित्त, डिंगल गीत सबकुछ अति प्रिय लगा..कई प्राचीन डिंगल कवि जिनमें बारहठ ईश्वरदास, सूर्यमल्ल मिश्रण, हिंगलाजदान कविया आपके पसंदीदा कवि रहे..बाद में पिंगल की तरफ दिलचस्पी बढी जिनमें तुलसीदास, भूषण, पद्माकर, जगन्नाथ रत्नाकर की लेखनी से दिनेशपाल जी प्रभावित व प्रेरित हुए। आपकी कवित्त रचना की प्रेरणा भूषण व जगन्नाथ रत्नाकर हैं।  बाद के दिनों में सोशल मीडिया पर साहित्यिक ग्रुपों से जुड़ाव हुआ जिससे वर्तमान कवियों व उनकी रचनाओं की जानकारी मिली,और दिनेशपालजी की रचनाओं को मंच मिला।

       आपने अभी तक  महाराणा प्रताप , मीराबाई , माँ शारदे , माँ बीसहत्थ , शिव स्त्रोत , श्री खेतेश्वर स्तुति , झांसी की रानी की कवित्त और भगवान परशुरामजी पर अति सुंदर रचनाओं का सृजन किया है , जिसमें शिव स्त्रोत बहुत ही विशिष्ट है ।

     दिनेशपाल जी द्वारा लिखी गयी महाराणा प्रताप पर रचना आपके समक्ष रख रहा हूँ 
बै तीर तूणीरान्, म्यान में कृपान दबै,
मेछ के पगान् दबै, मान हिंदवान को।
भुजवान के भुजान, दबै दान खुर्सान ते,
कंठ के कड़ान् दबै, बान ही जबान को।
दबै गढ़ के गुमान, दिलहीं की चढान ते,
गीता के बखान दबै, गान ही कुरान को।
रावन के राव दबै, तूफान मुगलान् ते,
लेश न 'दिनेश' दबै, केश "महाराण" को।।
इसके अलावा दिनेशपाल जी द्वारा रचित खेतेश्वर स्तुति के कुछ अंश पेश कर रहा हूँ-
सुकंजआसनं मुकुंद हंस पीठ संज है;
गले प्रसून माल पै भ्रमार झुंड गुंज है।
पताक श्वेत पाण भाल भाण सा फबंत है;
नमो स्वरूप ब्रह्म संत खेत को अनन्त है।।१।।

काम है न क्रोध है, न मोह है न मोद है;
गुणी महान् वो समान गंग ही कि गोद है।
रगत्त रोम में विरक्त राग ही रमन्त है ;
नमो स्वरूप ब्रह्म संत खेत को अनन्त है।।२।।

सुनीत है सुशांत वो सुभाव से स्वछंद है;
महा मुनीश के समीप लोक जाल मंद है ।
प्रचंड रोष पेख रेल यान भी रुकन्त है;
नमो स्वरूप ब्रह्म संत खेत को अनन्त है।।

        दिनेशपाल जी की आने वाली रचनाओं में
-1. देवी बीसहथ रा सोरठा।2. ब्रह्मावतार श्रीखेतेश्वर महाराज रो झमाल छंद।3. गंगाजी रा सोरठा है ।

    प्रिय मित्रों राजपुरोहित समाज के अनमोल रत्न श्री दिनेशपाल जी का #rajpirohit_samj_india पेज सह्रदय से सम्मान करता है।
     समाज के उभरते कवि की इस विशिष्ट जानकारी को सभी तक पहुंचाने के लिए शेयर जरूर करें ।

नोट :-  अब से इस सीरीज की हर पोस्ट हर शनिवार को पेश की जाएगी ।
         धन्यवाद।

                     जय श्री खेतेश्वर दाता की सा ।
               पोस्ट by नरपतसिंह राजपुरोहित ह्रदय

   प्रिय बन्धुओं आपको हमारी ये पहल कैसी लगी हमे जरूर बताएं ...

     आप भी राजपुरोहित समाज के साहित्यकार , संगीतकार या खेल से जुड़ी प्रतिभा के बारे में हमे लिखकर भेज सकते है ।

      आज ही लाइक करें Rajpurohit Samaj India प्राप्त करें समाज की न्यूज़ सबसे पहले..  


Thursday, 31 May 2018

वरिष्ठ साहित्यकार मारवाड़ रत्न श्री देवकिशन राजपुरोहित चम्पाखेड़ी

      आज की पोस्ट में हम जिनका परिचय लेकर आये है वो शख्शियत वैसे तो किसी परिचय की मोहताज नहीं है , जी हां हम बात कर रहे है वरिष्ठ साहित्यकार मारवाड़ रत्न श्री देवकिशन जी राजपुरोहित चम्पाखेड़ी की ।

    राजस्थानी साहित्य के लिए श्री देवकिशन जी एक चमत्कार है , आपने 6 अक्टूम्बर 1944 के आसपास 25 वर्ष की उम्र से कहानियां लिखनी शुरू की ।
देवकिशन जी साहित्य, शिक्षा, पत्रकारिता, संपादन अभिनय आदि क्षेत्रों में अपना मुकाम बना चुके हैं। यह मूलतः चंपाखेड़ी (मेड़ता) के निवासी हैं। आप राजस्थानी भाषा के वरिष्ठ साहित्यकार है जिन्होंने सर्वाधिक राजस्थानी उपन्यास लिखे हैं। साथ ही आप की रचनाएं विभिन्न पाठ्यक्रमों का हिस्सा भी रही है। अब तक इनके साहित्यक अवदान पर दो शोध तीन एम.फील. और दो लघु शोध भी हो चुके है। उनके साहित्य के समग्र भी प्रकाशित हो चुके हैं। जो राजस्थानी साहित्य को भवानी शंकर व्यास ’विनोद’ हिंदी साहित्य को फारुख अफरीदी तथा व्यंग्ग साहित्य को मनोहर सिंह राठौड़ ने ग्रंथावली के रूप में प्रस्तुत किया है।
    मारवाड़ रत्न और अन्य कई पुरस्कारों एवम उपाधि से आप सम्मानित हो चुके है ।
श्री देवकिशन जी राजपुरोहित की रचनायें
1. वरजूडी रौ तप-कहाणी संग्रै 2. दांत-कथावां-लोककथा 3. याहिया मान ले कैणौ-काव्य संग्रै 4. राजस्थान शासन परिचयाकंन 5. संसद में राजस्थान 6. पंचायत राज प्रतिनिधि 7. सोसर बंद-कहाणी संग्रै 8. राजनैतिक नारी रत्न 9. राजस्थान के मुख्यमंत्री-परिचय 10. मरूधर ज्योति-राजस्थानी पत्रिका (सम्पादन) 11. सूरज-राजस्थानीउपन्­यास 12. जंजाळ-राजस्थानी उपन्यास 13.कपूत-राजस्थानी उपन्यास 14. धाडवी-राजस्थानी उपन्यास 15. कळंक-राजस्थानीउपन्­यास 16. काळवी विशेषांक-संपादन 17. गजरो-संपादन 18. दातार-राजस्थानी उपन्यास 19. लिछमी राजस्थानी उपन्यास 20.त्रिवेणी-हिन्दी उपन्यास 21. बटीड-कहाणी संग्रै 22. स्म्रतियों के गवाक्ष-हिन्दी संस्मरण 23. ममता-हिन्दी संस्मरण 24. जुगत-राजस्थानीसंस्­मरण 25. मीरांबाई-जीवन व्रतांत 26. चमत्कार 27. आचार्य सप्तरिषी 28. पगली 29. खेजडी-राजस्थानी उपन्यास 30. किरण-राजस्थानीउपन्­यास 31. सगत-राजस्थानी ऐतिहासिक नाटक 32. मंगती-उपन्यास ।
।।।।।।।।।

    राजपुरोहित समाज और राजस्थान का सर साहित्य द्वारा गर्व से ऊंचा रखने वाले श्री देवकिशनजी राजपुरोहित का हम सह्रदय से सम्मान करते है ।

  प्रिय बन्धुओं आपको हमारी ये पहल कैसी लगी हमे जरूर बताएं ,
      आप भी राजपुरोहित समाज के साहित्यकार , संगीतकार या खेल से जुड़ी प्रतिभा के बारे में हमे लिखकर भेज सकते है ।
    ये जानकारी हर बन्धु पढ़े इसलिए इस पोस्ट को शेयर जरूर करें ।

               जय श्री खेतेश्वर दाता री सा ।

         प्रस्तुतकर्ता:-  नरपतसिंह राजपुरोहित ह्रदय
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