Tuesday, 23 May 2023

ब्रह्मपुत्र सेना के पूर्व अध्यक्ष परमेश्वर सिंह राजपुरोहित का जीवन परिचय

ब्रह्मपुत्र परमेश्वर सिंह राजपुरोहित का सेवा भाव एवं समर्पण अद्भुत.... शौर्य प्रताप सिंह राजपुरोहित 

हेलो दोस्तों कैसे हैं आप सब आशा करता हूं आप सब बहुत ही अच्छे होंगे । जीवन परिचय की इस श्रृखला में मैं लेकर आया हूं समाजसेवी पर  रक्तवीर ब्रह्मपुत्र सेना के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष भाई श्री परमेश्वर सिंह राजपुरोहित का जीवन परिचय वैसे यह शख्स किसी परिचय के मोहताज नहीं है आज इन्हें लाखो लोग जानते हैं जिन्होंने लाखों लोगों के जीवन को नया जीवनदान देने का बीड़ा उठाया हुआ है । रक्तदान केेे माध्यम से 
संक्षिप्त परिचय
 नाम :-  परमेश्वर सिंह राजपुरोहित 
पिताजी का नाम :- श्रीमान रतन सिंह राजपुरोहित 
गांव का नाम:-  बासड़ा
 जन्मदिन :-  29 फरवरी 1988

नागौर जिले के मकराना कस्बे के पास गांव बासड़ा से आने वाले परमेश्वर जी हाल कलकत्ता (प.बंगाल) में रहते है। सन 2012 में राजपुरोहित समाज के इसी मंच (rajpurohit samaj india पेज) द्वारा आपका जुड़ाव समाज बंधुओं से हुआ और समाज सेवा की विभिन्न गतिविधियों का आदान प्रदान होने लगा। इस दौरान राजपुरोहित समाज इंडिया के जरिये कई ऐसे मौके आये जब आपने समाज सेवा में अपना योगदान दिया ।

2014 के आते आते सोशल मीडिया के पटल से समाज बंधुओं का एक समूह तैयार हुआ और 9 नवम्बर 2014 में ब्रह्मधाम आसोतरा की पुण्य धरा से ब्रह्मपुत्र सेना का गठन हो गया । जिसके आप सर्व सहमति से प्रथम अध्यक्ष चुने गए ।
हजारों बन्धु जुड़ रहे थे तो सैकड़ों लोगों का विरोध भी था , राहें मुश्किल थी लेकिन इरादे अटल थे । समाज के मंचो पर ब्रह्मपुत्र सेना ने कई गंभीर मुद्दों को उठाया । सेवा की कई कार्यों में सम्मिलित होने लगे ।
उनमें से जो महत्वपूर्ण मुहिम शुरू हुई वो थी रक्तदान महादान ।
परमेश्वर जी के साथ ऐसे हजारों बन्धु है जिन्होंने ब्रहपुत्र ब्लड बैंक के नेटवर्क को आगे बढाया ।  कुछ ही वर्षों में इस मुहिम का नेटवर्क पूरे देश मे इतना बड़ा हो गया कि , कहीं भी किसी व्यक्ति को रक्त की जरूरत पड़ती और ये सूचना ब्रहपुत्र सेना के पास पहुंचती तो अगले एक घण्टे में रक्तदाता वहां हाजिर हो जाता या अन्य विकल्प द्वारा रक्त की व्यवस्था हों जाती ।
रक्तदाताओं के इस नेटवर्क का ना ही कहीं प्रचार किया गया ना ही कहीं दिखावा । शांत स्वभाव में रक्तवीरों के नेटवर्क को इतना बढ़ा दिया कि आज कई राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं अपने मंचो पर सम्मानित करने के लिए बुलाने लगी है ।

हजारों जिंदगियो को नया जीवनदान देकर रक्तदान की इस मुहिम के मुख्य सूत्रधार रहे परमेश्वर जी को अंतरराष्ट्रीय रोड सेफ्टी एवम ट्रामा सेंटर बीकानेर के हेड डॉ मेवासिंह , जयपुर ट्रामा सेंटर के हेड राजपाल जी यादव व मुम्बई के रक्तवीर अजीत रहाणे जी द्वारा रक्तदान की मुहिम में अभूतपूर्व योगदान के लिए आपको बीकानेर में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में सम्मानित किया जा चुका है । 
कर्मवीर एन आर सी फॉउंडेशन जयपुर की डॉक्टर निशा माथुर जी द्वारा भी आपको रक्तदान की इस क्रांति को बढाने के लिए सम्मानित किया जा चुका है ।

लखनऊ के एन आर सी फॉउंडेशन की ओर से कवयित्री मृदुला जी द्वारा रक्तवीर के रूप में आपको सम्मानित किया जा चुका है । 
आने वाली 15 अप्रेल 2020 को रोड सेफ्टी एवम ट्रामा मैनेजमेंट मुंबई की मुहिम त्वचादान-महादान को आगे बढ़ाने में योगदान के लिए आपको सम्मानित किया जाएगा ।
अभी हाल ही में दोहा से उड़ीसा के एक पैरालिसिस पीड़ित युवा को भारत लाने की विभिन्न व्यवस्थाओं के लिए उड़ीसा एवम प.बंगाल की दर्जनों सेवा संस्थाओं के जरिये आपने मदद की । 
उसके लिए आपको उड़ीसा के राज्यपाल द्वारा सम्मानित करने का बुलावा आया चुका है। 

इसके अलावा आप "मदद फॉउंडेशन " जैसी कई संस्थाओ के सदस्य हैं जो गरीब एवम असहाय लोगों की मदद करती है , उनकी बेटियों की शादी के लिए धनराशि प्रदान करती है । 

सिवाना में श्री खेतेश्वर जयंती 2015
आप अब तक कई सामाजिक सेवा संस्थान द्वारा सम्मानित किए जा चुके हैं अब आगे भी इसी प्रकार समाजसेवी कार्यों से जुड़े रहेंग और लोगों के हितों के रक्षक के लिए सदैव आगे आते रहेंगे ऐसी मैं आशा करता हूं

बन्धुओ आप भी इस मुहिम के साथी बने एवम सेवा में योगदान देवें । 
रक्तवीर राजपुरोहित, हरदम अर हरमेश । 
सेवा वाळे साथ मे, परथक नह परमेश ।। 

चलते चलते यह 4 लाइनें.....
गलत का विरोध खुलकर कीजिए, 
चाहे राजनीति हो या समाज, 
इतिहास टकराने वालो का लिखा जाता हैं 
तलवें चाटने वालों का नहीं..

आपका 
कवि नरपत सिंह राजपुरोहित हृदय बावड़ी कला

अगर आप इस मंच पर किसी और का जीवन परिचय देखना चाहते हैं तो मुझे लिख भेजिए अपना जीवन परिचय हमारा व्हाट्सएप नंबर है 9286464911

मिलते हैं किसी ओर जीवन परिचय के साथ तब तक के लिए चलते हैं आपका शौर्य प्रताप उर्फ सवाई सिंह राजपुरोहित 
एस एम सीरीज 3

Monday, 12 September 2022

श्री श्री 1008 पीरजी श्री शान्तिनाथजी महाराज सिरेमन्दिर दसवीं पुण्यतिथि 2022 पर विशेष

राजा भरथरी वैराग पंथ में नाथसंप्रदाय के महान योगिराज शिव अवतार ब्रह्मलीन योगेश्वर श्री जलन्धरनाथजी पीठ सिरेमंदिर के पीठाधीश श्री श्री 1008 पीरजी श्री शान्तिनाथजी महाराज जालौर

पीरजी श्री शान्तिनाथजी महाराज का जन्म गाँव भागली पिता रावतसिंहजी एवं माँ श्री सिणगार कंवर के आँगन में हुआ था, जिनका नाम ओटसिंह रखा जिन्हें दुनिया आज पीरजी बावसी के नाम से जानती है ।

● जन्म - 29 जनवरी 1940 , वि. सं. 1996 माघ कृष्ण पक्ष पंचमी सोमवार

● दिक्षा - 1 नवम्बर 1954 , वि. सं. 2011 शुक्ल पक्ष पंचमी सोमवार


● पिठाधीश आसीन 28 अक्टूबर 1968 , वि. सं. 2025 कार्तिक शुक्ला सप्तमी सोमवार 


● देवलोक गमन - 1 अक्टूबर 2012 , वि. सं. 2069 आसोज वदी प्रतिपदा सोमवार


● गुरू - श्री श्री 1008 श्री केशरनाथजी महाराज 


बावसी ने अपने जीवन काल में अनेक भक्तो को पर्चे ( समत्कार ) दिये वही सबसे बड़ा समत्कार सोमवार का शुभ दिन है ।

रावतसिंह जी ने अपने इस पुत्र की अत्यन्त शान्त, सोम्य एवं साधु पृकृति, अन्तरीय प्रेरणा देखकर इनको श्री केशरनाथजी के चरणों में समप्रित कर दिया, यह बात वि. सं. 2007 की है, महज 10 वर्ष की की अल्प आयु में उन्होंने" योगीराज श्री केशरनाथजी महाराज के चरणों का आश्रय पा लिया, ओटसिंह का दृढ आस्था मधुर स्वभाव समर्पित सेवा तथा शान्त चित देखकर योगमुर्ति श्री केशरनाथजी महाराज उनसे बहुत प्रसन्न हो गये, फलतः वि. सं. 2011 को सिरेमन्दिर पर वेश देकर ओटसिह को दीक्षीत किया और उनका नाम शान्तिनाथ रख दिया ।

जेष्ठ गुरूभाई एवं सिरेमंदिर के पिठाधिश्वर श्री भोला नाथजी महाराज के देवलोक गमन के उपरान्त वि. सं. 2025 को श्री श्री 1008 श्री शान्तिनाथजी महाराज का इस गोरवशाली जलंधरपीठ सिरेमन्दिर पर पीठाधिश्वर के रूप में गादी तिलक हुआ ।

पीरजी श्री शान्तिनाथजी महाराज ने अपने जीवन काल में जालौर जिले के कई गाँवो में जगह जगह पर मंदिरों का निर्माण करवाया, और सिरेमंदिर, भेरुनाथजी का अखाडा तथा चित्तहरणी पर तो इतना निर्माण कार्य करवाया जिसका कोई वर्णन ही नही है, इसके अलावा जोधपुर और गुजरात में भी कई मंदिरों का निर्माण करवाया, इसके लिए इन्हे विश्वकर्मा भी कहा गया है ।

जालौर में राठौडों की कुलदेवी नागणेश्वरी माताजी का भव्य मन्दिर और प्रवेश द्वार का निर्माण भी उनके द्वारा ही किया गया है, बावसी ने अपने जीवन काल में 32 चतुर्थमार्च किये है, कुम्भ मेले पर भी बावसी की असीम कृपा रही है, बावसी को पीर की पदवी कुंभ मेले से प्राप्त है, बावसी को पीर परम् पद की पदवी अपने कठोर तपोबल एवं समत्कारों के कारण प्राप्त थी ।

पीरजी बावसी ने सदैव जन-हीत को वरीयता दी और वही किसी ऊंच-नीच, अमीर-गरीब, छोटे-मोटे, जात-पात के भेद भाव को भूलकर एक धर्म का सन्देश देते रहे, वे अदभूत तृतिय दर्शी व्यक्ति के धनी होने के साथ साथ में नाथ परम्परा के भी बड़े जानकार थे, उन्होंने हमेशा अपने भक्तों पर दया दृष्टि बनाये रखी, और अपने भक्तों का दुःख निवारण करते रहे, स्वयं मेरे परिवार पर बावसी की अनुकम्पा अमृत वर्षा बनकर वर्षी है, नाथजी बावसी को सादर प्रणाम

पीरजी श्री शान्तिनाथजी महाराज ज्यादातर मौन ही रहते थे, कम ही बोलते थे,परन्तु उनका चिर मौन टुटता तो उनकी मधुर एवं दिव्य वाणी अर्मृत वर्षा से कम नही होती थी, गुरु महाराज श्री शांतिनाथजी महाराज, नाथसंप्रदाय के नाथजी कोमी एकता की मिशाल थे ।

पीरजी बावसी श्री शान्तिनाथजी महाराज भगवान् शिवजी के अवतार माने जाते है, उन्हीने अपने भक्तो को कई समत्कार दिये, उनकी चरण में कोई भी दुःख दर्द लेकर जाता था, उसका निवारण करते थे, जिसने भी सच्चे मन से बावसी की भक्ति की है, वो सुखी है ।

श्री शान्तिनाथजी महाराज हिन्दू, मुस्लिम सभी धर्म के लोगों को आदर भाव देते थे, लोग इन्हें पीरजी बावसी के नाम से सम्बोधित करते है, वो किसी एक जाती के गुरु नही है, बल्कि सभी जाती समुदाओं के गुरु है, उनकी पूजा घर घर में होती है, आज भी इनकी समाधी पर जाने से मनोकामनाये पूर्ण होती है


1 अक्टूबर 2012 सोमवार को उन्होंने अपना शरीर छोड दिया, लेकिन साथ ही छोड गये अपनी जन-मन में कभी भी नही मिटने वाली अमिट छाप, बावसी की दसवी पुण्यतिथि दिनांक 11 सितंबर 2022, आश्विन कृष्ण पक्ष प्रतिपदा रविवार को है, गुरु महाराज की समाधि श्री जलन्धर नाथपीठ सिरेमंदिर जालौर के प्रांगण में स्थित है, पीरजी बावसी की पुण्यतिथि हिन्दू पंचांग के अनुसार तिथि आश्विन कृष्ण पक्ष प्रतिपदा को मनाई जाती है ।


✍️ भंवरसिंह भागली

Thursday, 19 May 2022

वीर झुंझार वीर बापजी दामोदरजी का संक्षिप्त जीवन परिचय

वीर झुंझार वीर बापजी दामोदरजी का जन्म ग्राम- सांथू जिला-जालोर में सांथू के पालीवाल जागीरदार धीराजी सांथुआ के पुत्र रूप में हुआ था.. इनका विवाह सेवड़ राजपुरोहित गंगाधर जी रघुनाथजी की धर्मपरायण पुत्री दाड़म कुंवर के साथ हुआ था.!

वि. सं. 1609 के कार्तिक माह में जालोर राज्य एवं सिरोहीv पर, गायो-मवेशियों के इधर से उधर घास चरने को लेकर प्रायः छोटा-बड़ा लड़ाई-झगड़ा होता रहता था..! एक बार बात बढ़ जाने से दोनों ओर की सेना लड़ पड़ी और सिरोही राज्य की रक्षा में आए 72 बोड़ा चौहान सैनिक जालोर की सेना ने मार गिराए ! इसी संघर्ष में जालोर के 17 सोलंकी सैनिक सिरोही के सैनिको ने मार गिराए ..!

जब विवाद बहुत बढ़ने लगा तो दोनों शासनाध्यक्षो ने शांति वार्ता प्रारम्भ कर सांथू के जागीरदार धीराजी सांथूआ को यह विवाद शांतिपूर्ण सुलझाने हेतु सुपुर्द करने का निश्चय किया...!

दोनों राज्यो के दूत सांथू कोटड़ी पहुंचे तब वहां धीराजी बाहर गए हुए थे एवं उनके पुत्र कुंवर दामोदरजी वहां थे...ऐसा देख दूत निराश हो गए क्योंकि इस विवाद से अब बाहर कौन निकाले?

मनोस्थिति भांप दामोदरजी ने दूतों को बताया कि ऐसा क्या कार्य है...मैं पिताश्री की अनुपस्थिति में यथासम्भव प्रयास कर सकता हूँ..!

सीमा निरीक्षण पश्चात लोगो से बातचीत की और मन-ही-मन किसी निर्णय पर पहुंच गए तब दोनो पक्षकारों में से कुछ धीराजी की अनुपस्थिति में दामोदर जी निर्णय उचित मानने में आनाकानी करने लगे..!

इस पर वीर दामोदर जी ने दोनों पक्षो को सचेत करिये हुए कहा कि मेरा निर्णय मान्य करना ही होगा अन्यथा या सर्वनाश होगा..! 

मैं अपने बलिदान से यह सिद्ध कर दूंगा कि इस निर्णय हेतू मैं योग्य हूँ...अपनी मातृभूमि, गौमाता की रक्षा हेतू अपना अग्निस्नान करता हूँ...!

ऐसा कहकर वे अपने शरीर पर तेल सिंदूर डालकर अपने घोड़े पर अग्नि के तेज से चढे और अग्नि में प्रविष्ट हुए और चेताया कि अब जहां मेरे चीथड़े गिरे वही दोनों राज्यो की सीमा होगी....और फिर घोडा दौड़ा दिया...!

आग की लपटों से उस वीर के शरीर के अंग अग्निस्नान कर के जहां-जहां गिरे वह सीमा मान ली गई...!!

उनके इस शौर्य,बलिदान को देखने पुरे गाँव के गाँव उमड़ पड़े....पूरा जालोर एवं सिरोही राज्य राजपुरोहित दामोदरजी के बलिदान को नतशिर होकर नमन करने लगा..!

इस प्रकार तेलीया वागा धारण कर, झमर जलिया वीर झुंझार बापजी ने कैलाशनगर-मणादर और मेडा के बीच  शरीर त्याग दिया...! उसी स्थान पर वीर बावजी झुंझार दामोदरजी का स्मारक बना दिया..! वह सैकड़ो वर्षो से पूजित स्थल है...!

जब उन झुंझार जी ने पराक्रम कर अमरत्व प्राप्त किया और सन्देश अभी सांथू पहुंचना था उसी समय उनकी धर्मपत्नी को स्वतः ही ज्ञान हो गए एवं ऐसी आदर्श पत्नी ने प्राण त्याग दिए....उनका भी पाषाण विग्रह सांथू में मौजूद है...!

उन दिनों (करीब पौने पांच सौ वर्ष पूर्व) दोनों राज्यो की सरकार ने करीब 10 फ़ीट वर्गाकार के पक्के पत्थरो से निशान बनाकर पिलर निर्मित किये और ज़मीन में नीचे आ जाने से अभी 35-40 वर्ष पूर्व सिरोही एवं जालोर के जिलाधीशों ने नए पिलर उन्ही निशानों पर पुनः खड़े करवाए है जो आज भी दोनों जिलों की सीमाएं मानी जाती है...!

उनके मंदिर पर भक्त दर्शन हेतु आते रहते है... इनका मंदिर मेडा उपरला में मौजूद है....जिसका समस्त क्षेत्रवासी दर्शन लाभ लेते है!

अपने शौर्य से दो राज्यो के बीच शांति स्थापित करने के लिए राजपुरोहित झुंझार दामोदर जी के प्रति हम सब कृतज्ञ है..!


साभार- युग युगीन पाली राज्य का इतिहास-हरिशंकर जी 

स्रोत:- विक्रम सिंह लेटा के वाल से प्राप्त जानकारी

Sunday, 12 September 2021

डॉ मदन प्रताप सिंह राजपुरोहित का जीवन परिचय

आप सभी महानुभावों को जय श्री रघुनाथ जी री जय श्री खेतेश्वर महाराज की जीवन परिचय की अगली कड़ी मैं आपके साथ लेकर आया हूं सामाजिक कार्यकर्ता, समाजसेवी और मेरे बड़े भाई व मेरे मार्गदर्शन डॉ एम.पी सिंह राजपुरोहित महासचिव (सुगना फाउण्डेशन मेघलासियां) का जीवन परिचय आइए पढ़ते हैं उनकी जीवन पर यह विशेष पोस्ट 
      चिकित्सा के क्षेत्र में अपनी कड़ी मेहनत और लगन और सेवा से चिकित्सा के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बना चुके हैं डॉ एम.पी सिंह राजपुरोहित मरीजों की सेवा भाव के कारण आज डॉ राजपुरोहित आगरा ही नहीं अपितु दूर-दराज के क्षेत्रों में भी चर्चित है।

      प्राकृतिक चिकित्सा जगत में जाना माना नाम है डॉ एम पी सिंह राजपुरोहित जनता की सेवा करना है लक्ष्य जीवन का.....

    डॉ मदन प्रतापसिंह राजपुरोहित का नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है डॉ राजपुरोहित ने अपनी मेहनत की वजह से चिकित्सा के क्षेत्र में एक अनोखी मिसाल कायम की है आमजन की सेवा ही उनके लिए सबसे बड़ी सेवा है बतौर प्राकृतिक चिकित्सक अपने मरीजों से भावनात्मक जुड़ाव रखने वाले डॉ राजपुरोहित का नाम ही उनकी पहचान का वजूद है अपने मरीजों को सेहतमंद जीवन देना ही उनके जिंदगी का उद्देश्य है उनकी जीवन संगिनी श्रीमती रेखा राजपुरोहित जोकि हाउसवाइफ है  और बड़े भाई श्रीमान एसपी सिंह राजपुरोहित सुगना फाउंडेशन उपाध्यक्ष जिन्होंने डॉ एमपी सिंह को आगे बढ़नेेे में काफी सहयोग किया। 


 बचपन से ही रहे मेधावी छात्र 
बचपन से ही डॉ मदन प्रताप सिंह मेधावी छात्र रहे हैं वह जोधपुर राजस्थान के एक छोटे से गांव मेघलासिया में जन्म लिया और प्रारंभिक शिक्षा जोधपुर से ली तत्पश्चात आगरा आए 10वीं ,12वीं, पोस्ट ग्रेजुएशन तक अपनी पढ़ाई आगरा एवम् मेघालय में पूर्ण की आपने अपनी शिक्षा काल के दौरान कई पुरस्कार प्राप्त किए जिनमें प्रतिभावान छात्र का पुरस्कार साथ ही जिला और राज्य स्तर पर भी आपने कई सम्मान हासिल किए पढ़ाई पूरी करने के बाद आपने प्राकृतिक चिकित्सा अपनी जिज्ञासा को पूरा करने के लिए आपने जोधपुर, जयपुर और महाराष्ट्र से सर्टिफिकेट और डिप्लोमा कोर्स किया और यहीं से प्राकृतिक जगत में उनकेे सफर की शुरुआत हुई और आपने द बोर्ड हेम्स ओसिया एजुकेशन संस्थान राजस्थान साल 2008 में ज्वाइन किया और बृज क्षेत्र में अच्छेेेे और एक प्रतिष्ठित चिकित्सक की तरह सेवा करने के लिए उन्होंने एक निजी क्लीनिक की नींव रखेगी आखिरकार उन्होंने प्राकृतिक चिकित्सा जगत में खुद के व्यक्तित्व को खास बनाया। 

सेवा में सहयोगी बना परिवार

डॉ एम पी सिंह बताते हैं मेरी पूज्य माता जी स्वर्गीय श्रीमती सुगना राजपुरोहित सत प्रेरणा से ही मुझे सामाजिक सेवा कार्य करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। पूज्य माताजी स्मृति में 2000 से अधिक मानव सेवा के लिए चिकित्सा शिविरों का आयोजन किया। 1 सितंबर 2008 को पूज्य माता जी का स्वर्गवास हो गया उन्हीं की याद में परिवार ने सुगना फाउंडेशन मेघलासिया की स्थापना की आज हम उतर भारत में इसी बैनर तले कई चिकित्सा शिविर और मानव उत्थान की योजनाओं के साथ स्कूली बच्चों की शिक्षा समग्री का वितरण भी करते हैं और उन्हीं की प्रेरणा से डॉ राजपुरोहित का समाज के प्रति समर्पण सराहनीय है परिवार का विशेष योगदान बताते हैं जिसमें पिताजी ठा. श्री बीरम सिंह और बड़े भाई श्री एसपी सिंह राजपुरोहित का हमेशा ही सहयोग मिलता रहा है। जिन्होंने हमेशा डॉ राजपुरोहित को आगे बढ़ने में और कभी ना हार मानने की प्रेरणा दी । आप वर्तमान में भी कई सामाजिक संस्थाओं के साथ जुड़े हुए हैं वहां पर भी अपनी सामाजिक सेवाएं दे रहे हैं आप 24 घंटे में 15 घंटे काम करते हैं और मेडिटेशन और योग के जरिए खुद को भी संयमित और सेहतमंद रखते हैं रेगुलर एक्साइज उनकी दिनचर्या में शामिल है। 


प्राकृतिक चिकित्सा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आप हमेशा शहरी, ग्रामीण क्षेत्रों में निशुल्क चिकित्सा शिविर और ऑनलाइन के माध्यम से लोगों को जागरूक करने का सदैव प्रयास करते रहते हैं । आप वर्तमान समय में जब पूरे विश्व भर में कोविड-19 से जनजीवन अस्त व्यस्त हैं और इस वैश्विक महामारी कोरोनावायरस से हर कोई प्रभावित हैं साथ ही लोग डरे हुए हैं आप ऑनलाइन क्लास के माध्यम से लोगों को जागरूक कर रहे हैं इस बीमारी के प्रति व अपने संस्थान के बैनर तले माक्स व सैनिटाइजर का निशुल्क एवम लागत मूल्य पर वितरण भी कर रहे हैं। आपने कोरोना की प्रथम लहर में भी सामाजिक दायित्व बखूबी निभाया और दूसरी लहर में भी आप हर संभव प्रयास कर रहे हैं लोगों को जागरूक करने की ओर वैक्सीनेशन के लिए लोगों को प्रेरित कर रहे हैं जो वाकई काबिले तारीफ है

आइए डॉ राजपुरोहित का पारिवारिक संचित परिचय जानते हैं 

नाम:-  डॉ मदन प्रताप सिंह सुपुत्र श्रीमान बिरम सिंह राजपुरोहित
जन्म तिथि :- 12 सितंबर 1985
एजुकेशन :- एम.कॉम, बीएएमटी, डीएनवाईएस, एमडी (ए.मेडी.) (प्राकृतिक चिकित्सा)
 पत्नी का नाम :- श्रीमती रेखा राजपुरोहित (हाउस वाइफ)
बेटी :- अनाया और राधिका
गांव:- मेघलासिया,जिला जोधपुर
हाल :- आगरा, उत्तर प्रदेश

राष्ट्रीय महासचिव:- सुगना फाउंडेशन इंडिया
आगरा मंडल कोऑर्डिनेटर:- योगा स्पोर्ट्स एसोसिएशन, लखनऊ
संयोजक:- भाजपा चिकित्सा प्रकोष्ठ महानगर आगरा
 इन चिकित्सा पद्धतियों के विशेषज्ञ हैं डॉ राजपुरोहित 
प्राकृतिक चिकित्सा, एक्यूप्रेशर, सुजोक, योगा व रेकी आदि।

 डॉ राजपुरोहित का क्लीनिक का पता 
710, सेक्टर 7, AVC, बोदला सिकंदरा, आगरा 
समय प्रातः 8:00 बजे से 12:00 बजे तक 
और शाम 6:00 से रात्रि 9:00 बजे तक 
मोबाइल नंबर 9219666141

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 तो देर किस बात की साथ में भेजिएगा अपना फोटो।

Monday, 24 August 2020

शहीद शिवराम हरि राजगुरु राजपुरोहित का संक्षिप्त जीवन परिचय

 जीवन परिचय के इस श्रंखला में समाज के ऐसे महान पुरुष का जीवन परिचय हम लेकर आए हैं जिन्हें आप सभी भली-भांति जानते हैं जी हां हम बात कर रहे हैं शहीद राजगुरु की आइए जानते हैं उनका संक्षिप्त परिचय आज उनके जन्मदिवस पर विशेष .....


राजगरू जी की जन्म जयंती पर शत्-शत् नमन्

आजादी रो एक दीवानों शिवराम हरि राजगुरु जपुरोहित जिनका पैतृक गाँव अजारी जिला सिरोही_है

 नाम= शिवराम हरि राजगुरु राजपुरोहित

उप नाम=रघुनाथ, एम.महाराष्ट्र

जन्म स्थान=पुणे, महाराष्ट्र, ब्रिटिश भारत

जन्म तिथि =24 अगस्त, 1908

मृत्यु तिथि= 23 मार्च, 1931

 मृत्यु मात्र= 22 वर्ष

मृत्यु स्थान =लाहौर, ब्रिटिश भारत, (अब पंजाब, पाकिस्तान में)

माता का नाम=पार्वती बाई

पिता का नाम=हरि नारायण

कुल भाई बहन दिनकर (भाई) और चन्द्रभागा, वारिणी और गोदावरी (बहनें)

जाति (Caste) Brahman Rajpurohit

शहीद भगत सिंह का नाम कभी अकेले नहीं लिया जाता, उनके साथ राजगुरु और सुखदेव का नाम भी बड़े सम्मान के साथ लिया जाता है। जी हां शिवराम हरि राजगुरु राजपुरोहित जो महाराष्ट्र के खेड़ा ग्राम में रहने वाले थे। इनका पैतृक गाँव अजारी है जिन्होंने भारत माता को गुलामी की जंजीरों में जकड़ने वाले अंग्रेजों के एक पुलिस अधिकारी को मार गिराया था। और भगत सिंह व सुखदेव के साथ ही उन्हें 23 मार्च 1931 को फांसी दी गई थी। 

Is Se Juda Hua video Rajpurohit Samaj India hai YouTube channel per dekh sakte hai

 आप के बलिदान को समाज कभी नहीं भूल पाएगा.... आप को शत-शत नमन और सादर श्रद्धांजलि अर्पित करता है सुगना फाउंडेशन राजपूत समाज इंडिया टीम

Friday, 19 June 2020

मंच संचालक जय सिंह राजपुरोहित खाराबेरा का जीवन परिचय

इस ब्लॉग के माध्यम से मैं समाज से जुड़ी प्रतिभाओं को आप सबके बीच लाने का एक छोटा सा प्रयास कर रहा हूं और आज इसी कड़ी में मैं आपके बीच लेकर आया हूं बाल कलाकार और मंच संचालक जय सिंह राजपुरोहित का जीवन परिचय के साथ हाजिर हुआ हूं आपका सवाई सिंह राजपुरोहित मीडिया प्रभारी सुगना फाउंडेशन 


 संक्षिप्त परिचय
नाम : जयसिंह राजपुरोहित खाराबेरा
पिता का नाम : श्री भाकरसिंह जी राजपुरोहित 
माता का नाम : श्रीमती दरियाव देवी
जन्म दिन :01/03/1997
गोत्र : सेवड़
शिक्षा:-  12 वी  
गाव का नाम : खाराबेरा पुरोहितान (जिला जोधपुर) 
 
 एक सामान्य परिवार का नवयुवक जिसने अपनी राह खुद बनाई और चल पड़ा अपने हुनर को लेकर जहाँ हजारों की संख्या उनके आगे थी पर इनका मानना था की 
" मंजिले उन्हें नहीं मिलती जिनके ख्वाब बड़े होते है
 बल्कि मंजिले उन्हें मिलती हैं जो अपनी जिद्द पर अड़े रहते है" 
और आपने यह साबित करके भी दिखाया।

 कवि जयसिंह खाराबेरा के परिवार में पिता जी का देहांत हो चुका है माताजी और चार भाई के साथ चार बहने है खुशहाल परिवार है बचपन से ही इनको संगीत से प्रेम था और समाज में इनके पिताजी की एक अच्छी पहचान थी और उसी के साथ इनके पिताजी बहुत अच्छे चित्रकार भी थे।

 कवि जयसिंह खाराबेरा को बचपन से ही मंचो पर बोलने का शोक का जब यह दस साल के थे जब से इन्होने मंचो पर बोलना शुरू कर दिया था स्कूल समय से ही कवि जयसिंह अपनी छोटी छोटी रचनाएँ सांस्कृतिक कार्यक्रमो मे सुनाया करते थे और इनके परिवार ने भी इनका साथ दिया।
शिक्षा के लिए गाव से बाहर पाली जाना पड़ा इनके अंदर की लगन हमेशा मंच की ओर ले जाने का प्रयास कर रही थी फिर 2014 मे पाली के कवि श्री सुखसिंह जी राजपुरोहित आउवा और कवि दलपतसिंह जी रुपावास का इनको आशीर्वाद मिला और इन्हें वहीं पर 1-2 कार्यकर्मो में जाने का मौका मिला । 

  "मिलेगी परिंदो को मंजिल
यह उनके पर बोलते हैं ।
कुछ लोग रहते हैं शांत पर 
उनके हुनर बोलते है ।।"

 उसके बाद उन्होंने निश्चय कर लिया की मुझे एक अच्छा एंकर ही नहीं एक कामयाब लेखक भी बनना है उसके बाद कवि जयसिंह की पढ़ाई 12 वी पूरी हो जाने के बाद वो पुणे में अपने बड़े भाई महेशसिंह जी के साथ नौकरी करने लग गए कुछ समय तक काम की ज़िम्मेदारी के कारण उनकी संगीत से दुरी बढ़ गई फिर बड़े भाई बलवंतसिंह से इन्होने अपना सपना पूरा करने की बात कही ओर बलवंतसिंह इन्होंने नहीं रोका मां शारदा मां सरस्वती का आशिर्वाद से उन्हें पुनः रास्ता एक गौ रक्षक के रूप में मिला और कवि जयसिंह सोशल मीडिया पर अपने ओजस्वी भाषण और कविताओ को लेकर चर्चित होने लगे उसी दौरान उनकी मुलाकात सुरेंद्रसिंह राजपुरोहित उर्फ़ SS Tiger से हुई और कवि जयसिंह ने उनके जीवन पर आधारित कविता लिखी और 18 दिसंबर 2018 को SS Tiger के जन्मदिन के मौके पर बंगलौर मन्च पर वो कविता 10,000 लोगो के बीच सुनाई और वहा उन्होंने अपने नाम के झंडे गाड़ दिए वहीं पर उनकी मुलाकात गजेंद्रनिवास जी राव , महेंद्रसिंह जी राठौड़ और नूतन जी गहलोत से हुई और वहा पर राजपुरोहित समाज के एक उभरते कलाकार दिलीपसिंह जी खारवा मौजूद थे और उन्होंने कवि जयसिंह को भजन लिखने की राय दी। उन्होंने माँ शारदे के दिए आशिर्वाद पर भरोसा था फिर उन्होंने पहला भजन शितला माता के लिखा और वो हिट हुए फिर भजन गायक हैमेन्द्रसिंह राजपुरोहित का इनको साथ मिला और जयसिंह खाराबेरा को पहली बार मंचसंचालन का मौका मिला फिर हैमेन्द्रसिंह राजपुरोहित ने उनको हैदराबाद सिंगर रविंद्रसिंह  कोसाना के पास भेजा और वहा उनको राजस्थान के सभी फनकारों के सात काम करने का सौभाग्य मिला सबका बहुत प्रेम मिला और बड़े फनकारों (कलाकारों) के साथ प्यार और सहयोग निरंतर मिलता जा रहा है।

कवि जयसिंह हमे बताया हैं की यह सब 
सिंगर रविंद्रसिंह, सिंगर भरतसिंह रुपावास, सिंगर गौतमसिंह आउवा, सिंगर हैमेन्द्रसिंह और सिंगर दिलीपसिंह सभी की कृपा और आशीर्वाद से ही आज मैं इस मुकाम पर पहुंचा हूं ओर सबसे बड़ी खुशी की बात और मेरे सौभाग्य यह है कि मारवाड़ जन्क्शन में हुए प्रथम प्रवासी महासम्मेलन में भी इन्होने अपने प्रस्तुति दी और वहा पर गुरुदेव श्री 1008 श्री  बालकदास जी महाराज का आशिर्वाद भी मिला।

आज कवि जयसिंह राजस्थान ही नहीं बल्कि पूरे भारतवर्ष में  मंचसंचालन का कार्य करते है जैसे बैंगलोर, पुने, मुम्बई, सूरत, चेनाई, तिरुपति, हैदराबाद आदि शहरों में अपने आवाज के दम पर सफल आयोजन किए हैं। 

दुनिया से बाजी जीतकर मशहूर हो गये
इतना मुस्कुराये कि दुख सब दूर हो गये
हम काँच के थे दुनिया ने हमको फेंक दिया था
श्री खेतेश्वर दाता के चरणों में आये तो कोहिनूर हो गये।
 बाल कलाकार और मंच संचालक कवि जयसिंह राजपुरोहित खाराबेरा के उज्जवल भविष्य की कामना करते हैं आप इसी तरह परिवार और समाज का नाम रोशन करें ऐसी मंगल कामना टीम सुगना फाउंडेशन और राजपुरोहित समाज इंडिया करती है।

कौन कहता है कि मेरा ईश्वर प्यार नहीं करता
प्यार तो करता है मगर प्यार का इजहार नहीं करता
मैनें देखा है दर पे माँगनें वालों को
मेरा ईश्वर देने से इनकार नहीं करता।

 विशेष सूचना 
आप सभी के लिए अगर आप भी अपना जीवन परिचय हमारे इस ब्लॉग के माध्यम से पब्लिश करवाना चाहते हैं या News या कोई विज्ञापन देना चाहते हैं तो मुझे व्हाट्सएप करें हमारा व्हाट्सएप नंबर है 92864 64911


Thursday, 21 May 2020

महान तपस्वी संत श्री आत्मानंद जी महाराज का जीवन परिचय

 आज जीवन परिचय एक ऐसे महान संत और तपस्वी का है जिन्होंने अपना पूरा जीवन शिक्षा को समर्पित किया आज भारतवर्ष में गुरु महाराज जी के नाम से कई शिक्षण संस्थाएं और छात्रावास बनाए हैं ऐसे ही पूज्य संत का हम जीवन परिचय प्रस्तुत करने जा रहे हैं किसी प्रकार की कोई त्रुटि हो तो आप हमें जरूर सूचित करें हम उसमें सुधार करेंगे ...सवाई सिंह राजपुरोहित मीडिया प्रभारी सुगना फाउण्डेशन 
ॐ गुरु ग्रंथन का सार है, गुरु है प्रभु का नाम,
गुरु अध्यात्म की ज्योति है, गुरु हैं चारों धाम...
श्री 1008श्री आत्मानंद सरस्वतीजी महाराज का जीवन परिचय

पूरा नाम : - सात श्री 1008 स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज 
जन्म का नाम : - अचल सिंह 
जन्म तारीख 3 सितंबर , 1924 ( विक्रम सम्वत सुक्लापक्सा भाद्रपद चतुर्थी १९८१ - बुधवार ] 
पिता जी - श्री देवीसिंह राजपुरोहित गुन्देचा ( गुन्देशा ) 
माता का नाम : - श्रीमती मंगु देवी 
जन्म स्थान : - बारवा जाब तहसील : - बाली जिला - पाली ( राजस्थान ) 
गुरु का नाम : - श्री जगद्गुरु शंकराचार्य के शिष्य श्री 1008 श्री अनंत महाराज ज्योतिपीठ शांतानंद सरस्वती जी हैं 
श्री 1008 श्री अनंत महाराज ज्योतिपीठ शांतानंद संत श्री 1008 श्री शिक्षा सारथि स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज ने अपने यौवन काल शाह एक ऊंचे और तपस्वी का जीवन व्यतीत किया है । नियम और व्रतों का पालन किस कहा और कड़ाई से वैसा हमने आज तक दूसरे किसी व्यक्ति को नहीं करते देखा ! जिन लोगों ने संत श्री को निकट से देखा है । करता इस बात की सत्यता से भलीभांति परिचित होंगे ! संत श्री बहु प्रतिभा के धनी हैं । इनका जीवन प्रारम्भ से ही कर्ममय रहा है और बालकों की शिक्षा की तरह ही कन्याओं की शिक्षा पर भी बहुत बल दिया है । महान कर्मयोगी , सरस्वती जो राजपुरोहित समाज में शिक्षा क्षेत्र असीम योगदान . " अध्यात्मिक महापुरुष " घोर तपस्वी , संत श्री दतारा सुंदर वक्ताओं ने शिक्षा के क्षेत्र के विकास में सामाजिक हॉस्टल का गठन और , आपको को शिक्षा विद के नाम से जाने जाते है क्योकि आपने हॉस्टल राजपुरोहित जालोर , पाली मारवाड़ , फालना , रानीवाडा , कलंदरी , जोधपुर ( तीसरा विस्तार ) , सिरोही , भीनमाल और आहोरे और राजपुरोहित समाज के भवन भवस - सांचौर , सिरोही , कलदरी , पाली , निम्बेश्वर आदि समाज के कई जगह आज हॉस्टल पर संत श्री के नाम से भी प्रमुख स्थानों में विकसित कर रहे हैं . पुरानी हील और महादेव मंदिर का भी निर्माण किया है आपने कई गौशाला के विकसित किया हैं संत श्री 1008 श्री आत्मानन्द जी महाराज की समाधि जालौर में है🙏🏻🚩🪔🌹👏🏻यह बात है। उस समय की जब देश अंग्रेजो की गुलामी से स्वतंत्रत हो चुका था।

भारत स्वावलंबी बनने की शुरुआती चरण में था। ऐसे समय मे भारत का एक स्वर्णीम वर्ग राजपुरोहित जिसकी गणना समस्त मानव जाति के सबसे उच्चतम वर्ग में की जाती हैं। भूतकाल में हमारे पुर्वज इस समस्त सृष्टि के मार्ग दर्शक हुआ करते थे। ऐसे तपस्वीयों की संतान आज शिक्षा की कमी के कारण किसी का नेतृत्व करने की बजाय परदेशों मे मजदूरी करते हुए दिखाई दे रहे थे।
जो कार्य बैल के द्वारा किया जाना चाहिए था। वो कार्य अशिक्षित होने के कारण हमारे बंधु मजबूरी वश कर रहे थे।
जब समाज मे शिक्षा रूपी दीपक का प्रकाश कही दुर दुर तक नजर नहीं आ रहा था। चारों तरफ धोर अँधेरा ही अँधेरा दिखाई दे रहा था। तब ऐसे समय में राजपुरोहित समाज मे एक ऐसी दिव्य और तेजस्वी आत्मा युवा अवस्था में प्रवेश कर चुकी थी। जिसने हमारे समाज से अशिक्षा रूपी अंधकार को दूर करने के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर दिया।
ऐसी महान आत्मा ने अपने शरूआती समय.मे मुम्बई की जुहू चौपाटी पर हमारे बंधुओं को शिक्षित करने का प्रथम प्रयास हाथ मे लिया।
इतने पर भी जब उन्हे आत्म संतुष्टि नहीं हुई। तो उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन समाज को शिक्षित करने के लिए समर्पित करने का मन ही मन संकल्प लिया । और सर्वप्रथम,1960 में कालंद्री में छात्रावास के निर्माण से इसका श्री गणेश किया।
देखते ही देखते जालोर,सिरोही,फालना,जोधपुर,पाली,आबुरोड सभी जगहों पर छात्रावासों का निर्माण करवाया। और समाज को शिक्षित करने के लिए अहम भूमिका निभाई।
ऐसे महान्
ब्रम्हानन्दं परमसुखदं केवलं ज्ञानमूर्तीं | द्वन्द्वातितं गगनसदृशं तत्व मत्स्यादिलक्ष्यम् ||
एकं नित्यं विमलमचलं सर्वधीसाक्षिभूतमं | भावातीतं त्रिगुणरहित सद्गुरुं तं नमामि || समस्त राजपुरोहित समाज में शिक्षा के जागरण के लिए अपना सर्वोच्च अर्पित करने वाले परम् पूज्य सदगुरुदेव ब्रह्मलीन् शिक्षा सारथी स्वरुप गुरुदेव श्री श्री 1008 श्री आत्मानंद जी सरस्वती जी की 15 वी  पुण्यतिथि पर उनको शत-शत नमन वंदन 
सुगना फाउण्डेशन परिवार और राजपुरोहित समाज इंडिया टीम 

🚩🪔🌹👏🏻........  

ॐ गुरु ग्रंथन का सार है, गुरु है प्रभु का नाम,
गुरु अध्यात्म की ज्योति है, गुरु हैं चारों धाम....
श्री गुरूदेव देवानंद जी सरस्वती महाराज के आदेश से हैदराबाद में एक सस्था का गढन किया उसका नाम श्री आत्मान्दजी शिक्षा सेवा समिति है जिसका कार्यक्रम अच्छी तरह चलता है
 हर साल उनके जन्म दिवस के मौके पर और पुण्यतिथि पर हैदराबाद में कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाता है इस बार लॉक डाउन आने की वजह से कोई कार्यक्रम आयोजित नहीं किया गया।

गुरू जी की महानता भाग 1
एक समय की बात है एक किसी भक्त भाविक ने कहा महाराज श्री आपके लिए एक में बड़ी गाड़ी ला कर के दे देता हूं जिसमे आप और सभी भक्तों भावीक जन बैठकर के कहीं पर जा सकते हो तब महाराज श्री ने प्रेम से मुस्कुराते हुए बोले भाई तेरे पास में कुल कितनी राशि है जो तू गाड़ी लाना चाहता है तब भाई बोला अमुक इतने इतने राशि है तब गुरुदेव श्री ने कहा इस राशि को आप यहीं पर इस आश्रम में समर्पित कर दो मैं खुद गाड़ी लाऊंगा तब भाई बोला महाराज श्री आप केसी गाड़ी लाओगे तब महाराज श्री ने कहा भाई मैं ऐसी गाड़ी लाऊंगा जिसने अपनी पूरी समाज बैठेगी और कुछ समय के अंतराल के बाद महाराज श्री ने जालोर रेलवे स्टेशन के पास 6,,7, बिगा जमीन खरीदी और उसमें हॉस्टल बनवाया समाज के लिए और उस का उद्घाटन हुआ तब उस व्यक्ति को बुलवाया भाई यह समाज की बड़ी गाड़ी है उसमें दूर-दूर से बहुत भक्त भावीक जन पधारे हुए थे और लोग बैठ थे तभी महाराज श्री उस भाई को कहां देख भाई हमने यह गाड़ी लाई है जिसमें प्रकाश रूपी शिक्षा के इस प्रकाश में पुरा समाज बैठेगा इतना हमारे लिए चिंतन करने वाले उन महान् पुरुष कों छत छत नमन है ऐसी आत्मा हम सब लोगों के बिस में यदा कदा ही अवतरित होती हैं ऐसे तो यह भारत भूमि ऋषि मुनियों का ही देश राह और इसी नाम से जाना भी जाता है पर भाई हम कितने बहुत खुश भाग्यशाली हैं जो हमारे कुल में हमारे ही समाज में ऐसी मान हंसती का जन्म हुआ ।

 यह जानकारी हमें उपलब्ध करवाई है हैदराबाद से श्री चंपालाल जी राजपुरोहित में हम उनका भी तहे दिल से धन्यवाद करते हैं

 गुरु महाराज जी की पुण्य स्मृति पर फेसबुक पर राजपुरोहित समाज इंडिया द्वारा एक पोस्ट के दौरान हमें एक कमेंट मिला जालौर से अध्यापक श्रीमान महेंद्र सिंह राजपुरोहित का और उन्होंने गुरु महाराज जी के साथ रहते एक घटना का वास्तविक वर्णन हमें किया सोचा उसको मैं अपने इस जीवन परिचय में शामिल करूं प्रस्तुत है उनका यह कमेंट

गुरू जी की महानता भाग 2 :- बात उन दिनों की है जब में 1988-89 में होस्टल में पढ़ता था । एक दिन पेशाब घर में लगे टब में लड़के कंकर फेंककर निशाना लगा रहे थे।टब के छेद बंद हो गये ।पूरा भर के छलकने लगा ,पूरा पेशाबघर गीला हो गया। गुरूदेव घूमते-घूमते आते नजर पड़ी तो झट से बांह ऊंची करके पेशा भरे टब में से कंकर निकालने लगे तब हम दौड़कर गये गुरूदेव को एक तरफ लाकर हमने साफ किया। गुरूदेव ने कहा कि तुम्हारे चप्पल पेशाब में गीले होते हैं फिर तुम अपने कमरे,आश्रम,रसोई,और पता कहां कहां तक गंदगी ले जाओगे।हाथ तो गंदे कभी होते ही नहीं है,सुबह शौच के बाद सफाई करते हो ।हाथ साबुन से दो तीन बार धोते हो फिर उसी से भोजन भी करते हो ,पूजा पाठ भी करते हो  कभी हाथ को काट के फेंका क्या ?"
मैं किसी की निंदा या बुराई या महानता का बखान नहीं करता हुं। ये मेरे आंखों देखी सच्ची घटना है,और आप में से किसी ने महान संत को ऐसा करते देखा हो तो जरूर बताये।

 श्रीमान महेंद्र सिंह राजपुरोहित जी अपका धन्यवाद करता हूं


 इसी के साथ मुझे दीजिए इजाजत मिलते हैं किसी नए जीवन परिचय के साथ आपके इसी ब्लॉग पर आपका सवाई सिंह राजपुरोहित मीडिया प्रभारी सुगना फाउंडेशन 
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 नोट:- आप भी भेज सकते हैं मुझे अपना जीवन परिचय 

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