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Tuesday, 23 May 2023

ब्रह्मपुत्र सेना के पूर्व अध्यक्ष परमेश्वर सिंह राजपुरोहित का जीवन परिचय

ब्रह्मपुत्र परमेश्वर सिंह राजपुरोहित का सेवा भाव एवं समर्पण अद्भुत.... शौर्य प्रताप सिंह राजपुरोहित 

हेलो दोस्तों कैसे हैं आप सब आशा करता हूं आप सब बहुत ही अच्छे होंगे । जीवन परिचय की इस श्रृखला में मैं लेकर आया हूं समाजसेवी पर  रक्तवीर ब्रह्मपुत्र सेना के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष भाई श्री परमेश्वर सिंह राजपुरोहित का जीवन परिचय वैसे यह शख्स किसी परिचय के मोहताज नहीं है आज इन्हें लाखो लोग जानते हैं जिन्होंने लाखों लोगों के जीवन को नया जीवनदान देने का बीड़ा उठाया हुआ है । रक्तदान केेे माध्यम से 
संक्षिप्त परिचय
 नाम :-  परमेश्वर सिंह राजपुरोहित 
पिताजी का नाम :- श्रीमान रतन सिंह राजपुरोहित 
गांव का नाम:-  बासड़ा
 जन्मदिन :-  29 फरवरी 1988

नागौर जिले के मकराना कस्बे के पास गांव बासड़ा से आने वाले परमेश्वर जी हाल कलकत्ता (प.बंगाल) में रहते है। सन 2012 में राजपुरोहित समाज के इसी मंच (rajpurohit samaj india पेज) द्वारा आपका जुड़ाव समाज बंधुओं से हुआ और समाज सेवा की विभिन्न गतिविधियों का आदान प्रदान होने लगा। इस दौरान राजपुरोहित समाज इंडिया के जरिये कई ऐसे मौके आये जब आपने समाज सेवा में अपना योगदान दिया ।

2014 के आते आते सोशल मीडिया के पटल से समाज बंधुओं का एक समूह तैयार हुआ और 9 नवम्बर 2014 में ब्रह्मधाम आसोतरा की पुण्य धरा से ब्रह्मपुत्र सेना का गठन हो गया । जिसके आप सर्व सहमति से प्रथम अध्यक्ष चुने गए ।
हजारों बन्धु जुड़ रहे थे तो सैकड़ों लोगों का विरोध भी था , राहें मुश्किल थी लेकिन इरादे अटल थे । समाज के मंचो पर ब्रह्मपुत्र सेना ने कई गंभीर मुद्दों को उठाया । सेवा की कई कार्यों में सम्मिलित होने लगे ।
उनमें से जो महत्वपूर्ण मुहिम शुरू हुई वो थी रक्तदान महादान ।
परमेश्वर जी के साथ ऐसे हजारों बन्धु है जिन्होंने ब्रहपुत्र ब्लड बैंक के नेटवर्क को आगे बढाया ।  कुछ ही वर्षों में इस मुहिम का नेटवर्क पूरे देश मे इतना बड़ा हो गया कि , कहीं भी किसी व्यक्ति को रक्त की जरूरत पड़ती और ये सूचना ब्रहपुत्र सेना के पास पहुंचती तो अगले एक घण्टे में रक्तदाता वहां हाजिर हो जाता या अन्य विकल्प द्वारा रक्त की व्यवस्था हों जाती ।
रक्तदाताओं के इस नेटवर्क का ना ही कहीं प्रचार किया गया ना ही कहीं दिखावा । शांत स्वभाव में रक्तवीरों के नेटवर्क को इतना बढ़ा दिया कि आज कई राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं अपने मंचो पर सम्मानित करने के लिए बुलाने लगी है ।

हजारों जिंदगियो को नया जीवनदान देकर रक्तदान की इस मुहिम के मुख्य सूत्रधार रहे परमेश्वर जी को अंतरराष्ट्रीय रोड सेफ्टी एवम ट्रामा सेंटर बीकानेर के हेड डॉ मेवासिंह , जयपुर ट्रामा सेंटर के हेड राजपाल जी यादव व मुम्बई के रक्तवीर अजीत रहाणे जी द्वारा रक्तदान की मुहिम में अभूतपूर्व योगदान के लिए आपको बीकानेर में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में सम्मानित किया जा चुका है । 
कर्मवीर एन आर सी फॉउंडेशन जयपुर की डॉक्टर निशा माथुर जी द्वारा भी आपको रक्तदान की इस क्रांति को बढाने के लिए सम्मानित किया जा चुका है ।

लखनऊ के एन आर सी फॉउंडेशन की ओर से कवयित्री मृदुला जी द्वारा रक्तवीर के रूप में आपको सम्मानित किया जा चुका है । 
आने वाली 15 अप्रेल 2020 को रोड सेफ्टी एवम ट्रामा मैनेजमेंट मुंबई की मुहिम त्वचादान-महादान को आगे बढ़ाने में योगदान के लिए आपको सम्मानित किया जाएगा ।
अभी हाल ही में दोहा से उड़ीसा के एक पैरालिसिस पीड़ित युवा को भारत लाने की विभिन्न व्यवस्थाओं के लिए उड़ीसा एवम प.बंगाल की दर्जनों सेवा संस्थाओं के जरिये आपने मदद की । 
उसके लिए आपको उड़ीसा के राज्यपाल द्वारा सम्मानित करने का बुलावा आया चुका है। 

इसके अलावा आप "मदद फॉउंडेशन " जैसी कई संस्थाओ के सदस्य हैं जो गरीब एवम असहाय लोगों की मदद करती है , उनकी बेटियों की शादी के लिए धनराशि प्रदान करती है । 

सिवाना में श्री खेतेश्वर जयंती 2015
आप अब तक कई सामाजिक सेवा संस्थान द्वारा सम्मानित किए जा चुके हैं अब आगे भी इसी प्रकार समाजसेवी कार्यों से जुड़े रहेंग और लोगों के हितों के रक्षक के लिए सदैव आगे आते रहेंगे ऐसी मैं आशा करता हूं

बन्धुओ आप भी इस मुहिम के साथी बने एवम सेवा में योगदान देवें । 
रक्तवीर राजपुरोहित, हरदम अर हरमेश । 
सेवा वाळे साथ मे, परथक नह परमेश ।। 

चलते चलते यह 4 लाइनें.....
गलत का विरोध खुलकर कीजिए, 
चाहे राजनीति हो या समाज, 
इतिहास टकराने वालो का लिखा जाता हैं 
तलवें चाटने वालों का नहीं..

आपका 
कवि नरपत सिंह राजपुरोहित हृदय बावड़ी कला

अगर आप इस मंच पर किसी और का जीवन परिचय देखना चाहते हैं तो मुझे लिख भेजिए अपना जीवन परिचय हमारा व्हाट्सएप नंबर है 9286464911

मिलते हैं किसी ओर जीवन परिचय के साथ तब तक के लिए चलते हैं आपका शौर्य प्रताप उर्फ सवाई सिंह राजपुरोहित 
एस एम सीरीज 3

Thursday, 14 May 2020

गायक पारस राजपुरोहित का जीवन परिचय



एक बार फिर से मैं हाजिर हो चुका हूं आपका सवाई सिंह राजपुरोहित आगरा 
 जीवन परिचय की अगली कड़ी में आपके बीच लेकर आया हूं गिटारवादक ,संगीतकार, गायक पारस राजपुरोहित का जीवन परिचय.

नाम - पारस राजपुरोहित 
पिता का नाम  - श्रीमान मांगीलाल जी राजपुरोहित
माता का नाम - श्रीमती रुखमणी देवी राजपुरोहित 
जन्मतिथि - 1 अप्रैल 1992 
गाव - बिसू कलाँ (बाड़मेर)
गोत्र - श्रीरख

 बाड़मेर जिले के बिसू कलाँ कस्बे का युवा पारस राजपुरोहित आज संगीत के हुनर के दम पर बुलंदियां छू रहे हैं। बचपन से ही संगीत का शोक रहा है । पारस राजपुरोहित मात्र 12 वर्ष की उम्र से ही संगीत सीखना शुरू कर दिया। आप नियमित रूप से रियाज के दम पर आज इस मुकाम तक पहुंचे हैं आपने शुरुआती पढ़ाई आदर्श विद्या मंदिर में पढ़ने के कारण वहाँ देश भक्ति गाने गाता था जिस से गाने में आगे कुछ करने की प्रेरणा मिली। आपने एजुकेशन मगनीराम बांगड़ मेमोरियल ( M.B.M) इंजीनियरिंग कॉलेज जोधपुर से पढ़ाई की है। और आपने हाल ही में भारतीय रेलवे (इलेक्ट्रिकल) में ज्वाइन हुए हैं।

 लेकिन सिंगिंग में रुचि होने के कारण संगीत में भी पढ़ाई की तथा संगीत में आपने बी ए & एम ए और यूजीसी नेट पास किया। वैसे आपको हिंदी मारवाड़ी भजन सभी तरह के गानों का शौक है पर सबसे अधिक प्रिय मारवाड़ी भाषा लगती है।
 आपने हिंदी और मारवाड़ी गानों के कई प्रोग्राम किए हैं नए-नए गाने बनाकर उनको यूट्यूब चैनल के माध्यम से लोगों के सामने प्रस्तुत किए हैं इसमे ‘’माँ भारती’’ गाने को जनता का खूब प्यार मिला। जो कि एक देश भक्ति गाना है इस गाने को आप दिए गए इस लिंक पर क्लिक करके सुन सकते हैं।

 पारस राजपुरोहित से खास बातचीत में उन्होंने हमें बताया कि संगीत से मेरा बचपन से लगाव है मुझे फ्री टाइम में गिटार बजाना अच्छा लगता है और मैंने अपनी पढ़ाई के साथ इसको जारी रखा बस इतना ही कहूंगा कि मेहनत के दम पर कुछ भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।


हम आपके उज्जवल भविष्य की कामना करते हैं आप इसी प्रकार आगे उन्नति प्राप्त करें मां सरस्वती और पूज्य गुरु श्री खेताराम जी महाराज का आशीर्वाद सदैव आप पर बना रहे यही मंगल कामनाएं करता है सुगना फाउंडेशन मेघलासियां और राजपुरोहित समाज इंडिया टीम 

फिर मिलते हैं किसी और जीवन परिचय के साथ तब तक के मुझे दीजिए इजाजत......

 स्पॉन्सर By Hams Institute
 

Tuesday, 22 May 2018

राजाजी श्री निर्मलनाथजी महाराज का जीवन परिचय

राजाजी श्री निर्मलनाथजी महाराज का जीवन परिचय

    श्री निर्मलनाथजी महाराज का जन्म गाँव मोदरा, जिला जालौर मे राजपुरोहित जागरवाल कुल मे विक्रम संवत 2039 मे मगसर शुक्लपक्ष नवमी को हुआ था, नाथजी के बचपन का नाम - नारायण था ।

        पिताजी का नाम ओखसिंह जी एवं मातश्री का नाम मुंगीदेवी है, निर्मलनाथजी चार भायों मे दुसरे नम्बर है, ननिहाल गांव ओटवाला जिला जालौर में है ।

        एक बार निर्मल नाथजी के माता पिता पुत्र प्राप्ति हेतु पीरजी श्री शान्तिनाथजी महाराज की शरण मे गयेे, और पुत्र प्राप्ति हेतु उन्होने पीरजी महाराज से आशीर्वाद मांगा, तो गुरुदेव ने भक्त की इच्छा पर उन्हें चार पुत्रो का आशीर्वाद दिया,  तब आपके माता पिता ने कहा कि, हे दाताश्री अगर हमे आपने चार पुत्र दे दिए तो एक पुत्र को हम आपकी सेवा मे अर्पण कर देगे ।

       पिरजी श्री शान्तिनाथजी महाराज की कृपा से ओख सिंह जी को एक के बाद एक चार पुत्रों की प्राप्ति हुई ।

       एक बार श्री शान्तिनाथजी महाराज मोदरा पधारे तो आपके पिताजी ने अपने चारो पुत्रो को नाथजी महाराज के समुख खडा कर दिया, और कहा कि हे गुरुवर ये चारो आपके कृपा की देन है, आप जिसे चाहे उसे अपनी शरण मे स्वीकार लो ।

        तब श्री शान्तिनाथजी  महाराज ने नारायण के सर पर हाथ धर दिया, और आदेश दिया कि " ॐ नम: शिवाय " जपते रहो, और नारायण का नाम करण " निर्मल ,, कर दिया, तब आपकी ऊमर दस वर्ष की थी, उस दिन के बाद से आप " हरी " की भक्ति मे लिन हो गये ।

      पन्द्राह वर्ष की ऊमर मे आपको विक्रम संवत 2057 चैत्रसुदी एकम की अमावश्सा को गुरुदेव जी के चरणों में सिरेमंदिर में अर्पण किया, कानो कुण्डल विक्रम संवत 2060 मे धार करवा कर पूर्ण नाथ बना कर निर्मलनाथ कहलाये, आप गुरुजी श्री शान्तिनाथजी महाराज की तन मन से सेवा करने लगे, एक दिन श्री शांतिनाथजी महाराज ने अपने शिष्य कमलनाथजी से कान फुकवा कर आपको उनका शिष्य बना कर श्री शान्तिनाथजी महाराज दादा गुरु बन गये ।

       श्री निर्मलनाथजी की कुटंब यात्रा सन् 2006 मे वैसाख सुदी चौदस को हुई ।

      कणीयागिरी पर्वत पर श्री जलंधरनाथजी महाराज की तपोस्थली सिरेमन्दिर पर आपने कर्म एवं भक्ति की एवं दादा गुरू श्री शान्तिनाथजी महाराज की सेवा तन मन से की थी, इसी कारण दादागुरु श्री शान्तिनाथजी महाराज के आशीर्वाद से ही आज आप नाथ संप्रदाय के राजा के पद पर कडली मठ मेंगलोर में विराजमान है

      श्री निर्मलनाथजी महाराज को सन 2015 अगस्त नाशिक कुंभ मेले में अखिल भारतीय नाथ सम्प्रदाय के समस्त साधु संतों, पीठाधीशो, शंकराचार्यो एवं योगियों द्वारा नाथ सम्प्रदाय के राजा के लिए निर्विरोध चुना गया

   श्री निर्मलनाथजी महाराज पैदल नाशिक कुंभ मेले से झुन्डी यात्रा द्वारा 8 महीने में मेंगलोर पहुंचे थे, एवं 7 मार्च 2016 को राजाजी का गादी तिलक हुआ था

       श्री निर्मलनाथजी महाराज दादा गुरु पीरजी श्री शान्तिनाथजी महाराज की असीम कृपा एवं श्री गंगानाथजी महाराज के पूर्ण सहयोग से अखिल भारतीय नाथ सम्प्रदाय के राजा के पद पर आसीन हुए

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Wednesday, 5 April 2017

समाज की गौरव और संगीत के क्षेत्र में जाना पहचाना नाम बन चुका है इंदौर की गायिका प्रीति राजपुरोहित

Priti Rajpurohit



Family ke sath

Singing moment

Newspaper update



राजपुरोहित समाज की गौरव और संगीत के क्षेत्र में जाना पहचाना नाम बन चुका है इंदौर की गायिका प्रीति राजपुरोहित सुप्रसिद्ध गायिका है जिन्होंने अपनी दिलकश आवाज से श्रोताओं के दिल पर अपनी अमिट छाप छोड़ी।

प्रीति राजपुरोहित
जन्म दिन : 2 फरवरी 1983
आयु : 34

यह सही है कि संगीत एक साधना है और जो उस साधना में राम जाता है निश्चिती व संगीत के क्षेत्र में एक मुकाम हासिल कर लेता है बरसों से संगीत को अपना लक्ष्य मान चुकी प्रीति राजपुरोहित मध्य-प्रदेश इंदौर की रहने वाली आज संगीत में एक जाना पहचाना नाम बन चुका है  जिनके गीतों को सुनकर श्रोतागण मंत्रमुग्ध हो जाते हैं पिछले कई सालों से इंदौर, हैदराबाद, चेन्नई, गुजरात, राजस्थान ओर महाराष्ट्र आदि स्थानों पर प्रोग्राम के माध्यम से अपने गीतों का लोहा मनवा चुकी है प्रीति राजपुरोहित ने हमें एक इंटरव्यू में बताया कि इसके लिए वह कड़ी मेहनत करती हैं  गीत संगीत अब सांसे बन कर दिलों में धड़कता है !

अपनी सफलता के लिए अपने माता-पिता के बाद लता मंगेशकर को श्रेय देती हैं। लता मंगेशकर को अपना आदर्श मानने वाली सिंगर श्रीमती प्रीति राजपुरोहित हर एक गीत के साथ पूरा इंसाफ करते हुए संजीदा ढंग से प्रस्तुति देती हैं प्ले बैक सिंगर मधुश्री तथा अन्य सिंगरों के साथ मंच साझा कर चुकी प्रीति राजपुरोहित अब बॉलीवुड की धड़कन बनना चाहती हैं वह दिन दूर नहीं की संगीत के प्रति उनकी रूचि और मेहनत उन्हें एक दिन उस मुकाम तक पहुंचा देगी| फिल्मी गीतों की प्रस्तुति के साथ भजनों की प्रस्तुति मैं भी प्रीति राजपुरोहित को महारत हासिल है

संघर्ष 
सफलता की राह कभी भी आसान नहीं होती है।  प्रीति जी को भी अपना स्थान बनाने में बहुत कठिनाइयों का सामना करना पडा़।

हम प्रीति जी के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते है........ सुगना फाउंडेशन मेघलासिया परिवार

अगर आप भी किसी क्षेत्र जुड़े हुए हैं तो लिख भेजीए अपना जीवन परिचय हमें हमारे WhatsApp no 9286 464 911 Ya email address:-  Sawaisinghraj007@gmail.com
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आपका अपना सवाई सिंह
          सदस्य
सुगनाफाउंडेशन मेघलासिया