Sunday, 9 February 2020

Bhajan kalakar Vijay Singh Rajpurohit ka Jivan Parichay.

स्वागत है आपका एक बार फिर से आप ही के मनपसंद ब्लॉग पर जिसमें हम लेकर आते हैं समाज से जुड़े साधारण और वशिष्ठ व्यक्तित्व के जीवन परिचय को और इसी कड़ी में हम आज आपके बीच लेकर आए हैं भजन कलाकार श्री विजय सिंह राजपुरोहित आइए जानते हैं उनके जीवन के बारे में हमारे इस विशेष पोस्ट के जरिए।


नाम:- विजय सिंह राजपुरोहित
जन्म:- 11.12.1996
पिता का नाम :- श्रीमान शैतान सिंह राजपुरोहित 
माता जी का नाम:- श्रीमती भगवती देवी
गांव का नाम:- कोरणा , तहसील पचपदरा, कल्याणपुर, 
जिला:- बाड़मेर

 भजन कलाकार और मेरे परम मित्र विजय सिंह राजपुरोहित का जन्म एक साधारण परिवार में हुआ अभी आप जोधपुर में रहते हैं और जोधपुर में ही अपनी पढ़ाई पूरी की है इनका बचपन से ही एक सपना था एक भजन कलाकार बनना और देशभक्ति गीतों को गाना व आपने अपनी स्कूल लाइफ में भी  26 जनवरी और 15 अगस्त में पर कार्यक्रमों में भाग लिया  लेकिन स्कूल लाइफ के पूरे हो जाने के बाद आप प्राइवेट जॉब और प्राइवेट पढ़ाई और इन को लगने लगा कि वह संगीत की दुनिया से बहुत दूर जा रहे हैं  लेकिन अपने सपने को पूरा करने के लिए आपने पूरी मेहनत की जोधपुर में अपनी पढ़ाई के साथ-साथ आपने गायकी करना शुरू किया और जागरण में जाना भजनों को सुनना और उन्हें गाना अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाया।

    विजय सिंह बताते हैं एक बार जब मैं खेतेश्वर जयंती में जोधपुर पहुंचा मैंने भजन कलाकार श्रीमान उदय सिंह राजपुरोहित का भजन सुना उसी दिन दिल में लग गया कि मुझे भी एक दिन इन्हीं के जैसा एक भजन कलाकार बनना है उस दिन उन्होंने भजन कलाकार श्रीमान उदय सिंह राजपुरोहित के सामने अपनी इच्छा जाहिर की और उनको कहा कि मुझे भी आप ही की तरह एक भजन कलाकार बनना है इस पर उदय सिंह जी ने कहा बहुत अच्छी बात है उस दिन से आपने मेहनत में कोई कमी नहीं रखी दिन रात मेहनत की और एक अच्छे भजन कलाकार के रूप में उभरे आपने उदय सिंह राजपुरोहित को अपना संगीत गुरु माना और उन्हीं की प्रेरणा से आगे बढ़ते रहे और उनके के साथ जाना और उनके पीछे पीछे भजनों को गाना शुरू किया और धीरे-धीरे अभ्यास करते रहे और आज समाज में एक अच्छे भजनकार के रूप में आप ने जगह बनाई। और जो कुछ भी हूं या जो कुछ भी बना हू वह गुरु महाराज श्री खेतेश्वर महाराज व श्री तुलछारामजी महाराज का आशीर्वाद है। मेरे गुरु श्रीमान उदय सिंह राजपुरोहित का साथ है और उन्हीं के साथ रहकर आगे भी समाज का नाम रोशन करुंगा।


    आज आप राजपुरोहित समाज के छोटे बड़े सभी कार्यक्रम में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं आज राजस्थान ही नहीं राजस्थान के बाहर भी आपने कहीं बड़े आयोजनों का हिस्सा बने जिसमें बेंगलुरु, सूरत, मुंबई और हैदराबाद आदि कार्यक्रम शामिल है आपने गुरु महाराज संत श्री खेतेश्वर महाराज पर कई भजन गए हैं शादी विवाह आदि समारोह के मौके पर आपने विशेष संकला भी शुरू की है आज समाज में आपकी एक विशिष्ट पहचान है  सुगना फाउंडेशन मेघलासियां परिवार और राजपुरोहित समाज इंडिया टीम आपके उज्जवल भविष्य की कामना करती हैं आप इसी प्रकार संगीत की दुनिया में परिवार और समाज का नाम रोशन करें ऐसी कामना करते हैं।


अब चलते चलते यूट्यूब से सुनिए यह फर्स्ट गाना जो कि पूज्य गुरु महाराज संत श्री खेतेश्वर महाराज पर गाया गया है विजय सिंह द्वारा....... और हाल ही में एक और भजन प्रस्तुत किया गया जो कि प्रियंका राजपुरोहित और विजय सिंह द्वारा संयुक्त रूप से गाया गया।
👏👏

अगर आप भजन कलाकार विजय सिंह राजपुरोहित से आमंत्रित करना चाहते हैं या किसी कार्यक्रम में बुलाना चाहते हैं तो इनका कांटेक्ट नंबर ये 8078601499 है 

और इसी के साथ मुझे दीजिए इजाजत मिलते हैं किसी और जीवन परिचय के साथ अगर आप भी देना चाहते हैं समाज अपना जीवन परिचय इस ब्लॉग के माध्यम से या समाज से जुड़ी कोई न्यूज़ या कोई विज्ञापन तो मुझसे संपर्क करें मेरे व्हाट्सएप नंबर पर मेरा व्हाट्सएप नंबर है 92864 64911 

आपका अपना दोस्त सवाई सिंह राजपुरोहित मीडिया प्रभारी सुगना फाउंडेशन और आरोग्यश्री समिति आगरा

Friday, 31 January 2020

Bhajan Samrat Gulab Singh Rajpurohit ka Jivan Parichay

   आप सभी महानुभावों को जय दाता री जय रघुनाथ जी री सा अर्ज करता हूं जीवन परिचय की अगली कड़ी में हम आपके साथ लेकर आएं हैं राजपुरोहित समाज के भजन कलाकार और हमारेेे परम मित्र भजन कलाकार श्रीमान गुलाब सिंह राजपुरोहित का .


नाम :- गुलाब सिंह राजपुरोहित
जन्म दिन :- 15. 6.1995
पिताजी का नाम :- श्री  सुजान सिह राजपूरोहित
माता जी का नाम:-श्रीमती ढेली देवी
गोत्र:-  राजगुरू
शिक्षा:- 12 वी पास
गाव का नाम:-  बालेरा, जिला बाडंमेर

भजन कलाकार गुलाब सिंह के परिवार में मम्मी-पापा और चार भाइयों के साथ एक बहन है खुशहाल परिवार है बचपन से ही इनको संगीत से प्रेम था भजन सुनना पसंद था लेकिन चिंता थी मंच तक कैसे पहुंचे समय बीतता गया पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ी परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी अच्छी नहीं थी कि वह शिक्षा जारी रख सकें।

   रोजगार की तलाश में गांव से बाहर जाना पड़ा मगर इनके अंदर की लगन हमेशा इनको संगीत की ओर ले जाने का प्रयास कर रही थी फिर 2012 में पुणे गए वहां पर प्रकाश श्रीमाली का प्रोग्राम देखा उसी दिन इनको लगा की गायकी तो सीखनी है फिर क्या था। 2013 में जोधपुर में कोई काम से गए थे वहां घोड़ा के चौक पर बहुत भीड़ देखी और रुका वहां जो इंसान भजन गा रहा था वो और कोई नहीं संगीत प्रेमी और दिव्य ऊर्जावान भजन कलाकार श्री उदय सिंह राजपुरोहित भजन सम्राट थे  सोचा आज इनसे जरूर मिल कर जाऊंगा लेकिन भीड़ अधिक थी मिल नहीं पाया कुछ समय बाद 1 महीने बाद बड़ी मुश्किल से उदय सिंह जी से मिलना हुआ इनका व्यक्तित्व देखकर मुझे इतनी खुशी हुई शायद मुझे मेरी मंजिल मिल गई 5 जनवरी 2014 को उनके साथ मैंने संगीत जीवन की शुरुआत की धीरे-धीरे गुरु महाराज की कृपा से नियंत्रण रियास करते रहे और उन्हें समाज में काफी अच्छा रिस्पॉन्स मिलने लगा 2016 आते-आते आपने समाज के कई बड़े प्रोग्रामों में हिस्सा लेना शुरू कर दिया फिर क्या था वह दिन है और आज का दिन है आप आज राजस्थान ही नहीं राजस्थान के बाहर भी बेंगलुरु, हैदराबाद, सूरत जैसे बड़े शहरों में भी प्रोग्राम किए हैं । 14 अप्रैल 2018 को पूज्य गुरु महाराज संत श्री तुलसाराम जी महाराज के समक्ष भजन प्रस्तुत किया है और आपको गुरु महाराज का आशीर्वाद मिला।

    जहां समाज बंधुओं का बहुत ही अच्छा प्यार मिला भजन सम्राट उदय सिंह राजपुरोहित ने आपको हमेशा अपनी छाती से लगा के रखा है और उन्हीं के सहयोग और प्यार से अपनी गायकी का लोहा मनवाया है। आप अभी पाली जिले में रहकर भजन के साथ साथ पार्ट टाइम जॉब भी कर रहे हैं गुलाब सिंह जी ने हमें बताया जीवन में कठिनाइयां तो बहुत है पर डट कर सामना करता रहा कुलदेवी और गुरु महाराज के आशीर्वाद से आज सब कुछ सही चल रहा है।

 आज समाज में आपकी एक विशिष्ट पहचान है सुगना फाउंडेशन परिवार आपके उज्जवल भविष्य की कामना करता है आप निरंतर इसी प्रकार गायकी में अपना लोहा मनाते रहे और गुरु महाराज का आशीर्वाद आप पर बना रहे मिलते हैं किसी और जीवन परिचय के साथ आपका दोस्त सवाई सिंह राजपुरोहित मीडिया प्रभारी सुगना फाउंडेशन एंड आरोग्यश्री मेला समिति.
     
  • भजन सम्राट गुलाब सिंह जी का कांटेक्ट नंबर आप भी भजन संध्या के लिए इनको जरूर याद करें .
  • 9772443541

 विशेष सूचना 
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Thursday, 16 January 2020

संत श्री ध्यानारामजी महाराज का जीवन परिचय

संत श्री ध्यानारामजी महाराज का जीवन परिचय

हमें एक विवेकानंदजी जेसे ज्ञानी ओर विद्वान गुरुदेव हमारे समाज को मिले  ।

वेदानान्ताचार्य संत श्री ध्यानारामजी महाराज

जीवन परिचय

जन्म - 1 जून 1972 ज्येष्ठ कृष्ण चतुर्थ,( विक्रम संवत 2029) बावडी कल्ला (जोधपुर) सेवड परिवार

पिता -श्री मान बाबुसिंहजी राजपुरोहित

माता- श्रीमति सीतादेवीजी

   इन्होनें अपनी प्रारम्भिक शिक्षा शेखासर गाँव से प्राप्त की प्रभु कृपा से 13 वर्ष की बाल्य अवस्था में आपको गुरू चरणों का आश्रय मिला,अपनें गुरूमहाराज श्री तुलछारामजी की आज्ञा से वेद वेदांतों का अध्ययन करनें के लिए बनारस हिन्दू विश्व विद्यालय , काशी गये,जहाँ इन्होंनें 20 वर्ष तक घोर साधनामय आध्यात्मिक शिक्षा प्राप्त की ।

           इन्होनें बनारस हिन्दू वि.वि. से ब्रह्मशब्द पर PhD. (पीएचडी) की तथा अपनी अलौकिक प्रतिभा के बल पर संस्कृत भाषा के अलग अलग विषयों में 8 गोल्ड मैडल प्राप्त कर विशेष ख्याति अर्जित की।।

         इन्होनें अध्ययन के दौरान थाइलैण्ड सहित कई देशों की यात्रा कर ब्रह्म तत्व पर गहन शोध किया, इसके लिए इन्होनें दक्षिण भारत के 35 छोटे बडे ब्रह्मा मन्दिरों पर भी शोधपत्र प्रस्तुत किये।।

     वैदिक साहित्य, ब्राहमण ग्रथों ,उपनिषदों का गहन अध्ययन के साथ अपनी शिक्षा पुरी की।

    सन् 2012 में माँ गंगा के पावन तट पर गुरुमहाराज श्री  तुलछारामजी महाराज के सानिध्य में आपकी गुरू मंत्र दीक्षा सम्पन्न हुई।

       उसके बाद से आप गुरू चरणों की सेवा तथा समाज उत्थान में कार्यों में लगे हुए है , समाज में व्याप्त कुरीतियों , नशामुक्ति , दहेज,तथा शिक्षा सुधार सहित बालिका शिक्षा को विशेष प्रोत्साहन देनें के साथ युवा पीढी में नवीन चेतना का संचार कर समाज को निरन्तर नवीन दिशा प्रदान कर रहे है।।

        आप सुसंस्कृत तथा चरित्रवान राष्ट्र के निर्माण के प्रति दृढ संकल्पित है ,इसके लिए आपके सानिध्य में समय समय पर समाज में स्कूलों ,छात्रावासों सहित धार्मिक स्थलों पर सामुहिक संस्कार शिविर आयोजित किये जा रहे है जिसमें हजारों छात्र छात्राएं भाग लेकर उच्च आदर्श सीख रहे है।।

       गुरू महाराज श्री तुलछाराम जी महाराज के पावन सानिध्य में हाल ही के दिनों में इनकी जन्म बावडी गाँव में कुटुम्बयात्रा का आयोजन किया गया ।

      अपनें मात पिता से भिक्षा प्राप्त कर हमेशा हमेशा के लिए अपना जीवन प्रभु भक्ति , जीवन गुरू चरणों . समाज और राष्ट्र सेवा के कार्यों में समर्पित किया।

जय खेतेश्वर दाता री


        Posted by Sawai Singh Rajpurohit Meghlasiya 

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Saturday, 2 June 2018

दिनेशपाल सिंह राजपुरोहित बीसूकलां का जीवन परिचय



प्रिय बन्धुओ ,
               आज की कड़ी में हम ऐसे नवोदित कवि का परिचय एवम उनकी उपलब्धियों को लेकर आये है जिनकी लेखनी पर बड़े बड़े कवि अचंभित है , माँ शारदे की उनपर अतिकृपा है , वो जो भी कवित्त रचते है पढ़ने वाले के सीधे ह्रदय तक वो रचना स्थान बनाती है ।
जी हाँ हमारी आज की कड़ी के कवि है श्री दिनेशपाल सिंह आत्मज श्री शक्तिसिंह श्रीरख राजपुरोहित बीसूकलां..

      आपकी सम्पूर्ण स्कूली शिक्षा बाड़मेर में हुई। कक्षा 10वीं के बाद गवर्नमेंट पाॅलिटेक्निक कॉलेज, बाड़मेर सेमैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा किया।बाद में कला संकाय में स्नातक की जिसके अन्तिम वर्ष की परिक्षायें कुछ सप्ताह पूर्व ही समाप्त हुई।साथ ही प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी चल रही है।साहित्य के क्षेत्र में रूचि 2016 के अन्तिम माह से जागृत हुई, जब आपने पहली बार डिंगल दोहे पढे़..फिर दिलचस्पी बढती गई, आपने उस दौरान आॅनलाइन माध्यमों पर उपलब्ध साहित्य का खूब अध्ययन किया। दोहे, सोरठे, कुण्डलिये, छप्पय, छंद, कवित्त, डिंगल गीत सबकुछ अति प्रिय लगा..कई प्राचीन डिंगल कवि जिनमें बारहठ ईश्वरदास, सूर्यमल्ल मिश्रण, हिंगलाजदान कविया आपके पसंदीदा कवि रहे..बाद में पिंगल की तरफ दिलचस्पी बढी जिनमें तुलसीदास, भूषण, पद्माकर, जगन्नाथ रत्नाकर की लेखनी से दिनेशपाल जी प्रभावित व प्रेरित हुए। आपकी कवित्त रचना की प्रेरणा भूषण व जगन्नाथ रत्नाकर हैं।  बाद के दिनों में सोशल मीडिया पर साहित्यिक ग्रुपों से जुड़ाव हुआ जिससे वर्तमान कवियों व उनकी रचनाओं की जानकारी मिली,और दिनेशपालजी की रचनाओं को मंच मिला।

       आपने अभी तक  महाराणा प्रताप , मीराबाई , माँ शारदे , माँ बीसहत्थ , शिव स्त्रोत , श्री खेतेश्वर स्तुति , झांसी की रानी की कवित्त और भगवान परशुरामजी पर अति सुंदर रचनाओं का सृजन किया है , जिसमें शिव स्त्रोत बहुत ही विशिष्ट है ।

     दिनेशपाल जी द्वारा लिखी गयी महाराणा प्रताप पर रचना आपके समक्ष रख रहा हूँ 
बै तीर तूणीरान्, म्यान में कृपान दबै,
मेछ के पगान् दबै, मान हिंदवान को।
भुजवान के भुजान, दबै दान खुर्सान ते,
कंठ के कड़ान् दबै, बान ही जबान को।
दबै गढ़ के गुमान, दिलहीं की चढान ते,
गीता के बखान दबै, गान ही कुरान को।
रावन के राव दबै, तूफान मुगलान् ते,
लेश न 'दिनेश' दबै, केश "महाराण" को।।
इसके अलावा दिनेशपाल जी द्वारा रचित खेतेश्वर स्तुति के कुछ अंश पेश कर रहा हूँ-
सुकंजआसनं मुकुंद हंस पीठ संज है;
गले प्रसून माल पै भ्रमार झुंड गुंज है।
पताक श्वेत पाण भाल भाण सा फबंत है;
नमो स्वरूप ब्रह्म संत खेत को अनन्त है।।१।।

काम है न क्रोध है, न मोह है न मोद है;
गुणी महान् वो समान गंग ही कि गोद है।
रगत्त रोम में विरक्त राग ही रमन्त है ;
नमो स्वरूप ब्रह्म संत खेत को अनन्त है।।२।।

सुनीत है सुशांत वो सुभाव से स्वछंद है;
महा मुनीश के समीप लोक जाल मंद है ।
प्रचंड रोष पेख रेल यान भी रुकन्त है;
नमो स्वरूप ब्रह्म संत खेत को अनन्त है।।

        दिनेशपाल जी की आने वाली रचनाओं में
-1. देवी बीसहथ रा सोरठा।2. ब्रह्मावतार श्रीखेतेश्वर महाराज रो झमाल छंद।3. गंगाजी रा सोरठा है ।

    प्रिय मित्रों राजपुरोहित समाज के अनमोल रत्न श्री दिनेशपाल जी का #rajpirohit_samj_india पेज सह्रदय से सम्मान करता है।
     समाज के उभरते कवि की इस विशिष्ट जानकारी को सभी तक पहुंचाने के लिए शेयर जरूर करें ।

नोट :-  अब से इस सीरीज की हर पोस्ट हर शनिवार को पेश की जाएगी ।
         धन्यवाद।

                     जय श्री खेतेश्वर दाता की सा ।
               पोस्ट by नरपतसिंह राजपुरोहित ह्रदय

   प्रिय बन्धुओं आपको हमारी ये पहल कैसी लगी हमे जरूर बताएं ...

     आप भी राजपुरोहित समाज के साहित्यकार , संगीतकार या खेल से जुड़ी प्रतिभा के बारे में हमे लिखकर भेज सकते है ।

      आज ही लाइक करें Rajpurohit Samaj India प्राप्त करें समाज की न्यूज़ सबसे पहले..  


Thursday, 31 May 2018

वरिष्ठ साहित्यकार मारवाड़ रत्न श्री देवकिशन राजपुरोहित चम्पाखेड़ी

      आज की पोस्ट में हम जिनका परिचय लेकर आये है वो शख्शियत वैसे तो किसी परिचय की मोहताज नहीं है , जी हां हम बात कर रहे है वरिष्ठ साहित्यकार मारवाड़ रत्न श्री देवकिशन जी राजपुरोहित चम्पाखेड़ी की ।

    राजस्थानी साहित्य के लिए श्री देवकिशन जी एक चमत्कार है , आपने 6 अक्टूम्बर 1944 के आसपास 25 वर्ष की उम्र से कहानियां लिखनी शुरू की ।
देवकिशन जी साहित्य, शिक्षा, पत्रकारिता, संपादन अभिनय आदि क्षेत्रों में अपना मुकाम बना चुके हैं। यह मूलतः चंपाखेड़ी (मेड़ता) के निवासी हैं। आप राजस्थानी भाषा के वरिष्ठ साहित्यकार है जिन्होंने सर्वाधिक राजस्थानी उपन्यास लिखे हैं। साथ ही आप की रचनाएं विभिन्न पाठ्यक्रमों का हिस्सा भी रही है। अब तक इनके साहित्यक अवदान पर दो शोध तीन एम.फील. और दो लघु शोध भी हो चुके है। उनके साहित्य के समग्र भी प्रकाशित हो चुके हैं। जो राजस्थानी साहित्य को भवानी शंकर व्यास ’विनोद’ हिंदी साहित्य को फारुख अफरीदी तथा व्यंग्ग साहित्य को मनोहर सिंह राठौड़ ने ग्रंथावली के रूप में प्रस्तुत किया है।
    मारवाड़ रत्न और अन्य कई पुरस्कारों एवम उपाधि से आप सम्मानित हो चुके है ।
श्री देवकिशन जी राजपुरोहित की रचनायें
1. वरजूडी रौ तप-कहाणी संग्रै 2. दांत-कथावां-लोककथा 3. याहिया मान ले कैणौ-काव्य संग्रै 4. राजस्थान शासन परिचयाकंन 5. संसद में राजस्थान 6. पंचायत राज प्रतिनिधि 7. सोसर बंद-कहाणी संग्रै 8. राजनैतिक नारी रत्न 9. राजस्थान के मुख्यमंत्री-परिचय 10. मरूधर ज्योति-राजस्थानी पत्रिका (सम्पादन) 11. सूरज-राजस्थानीउपन्­यास 12. जंजाळ-राजस्थानी उपन्यास 13.कपूत-राजस्थानी उपन्यास 14. धाडवी-राजस्थानी उपन्यास 15. कळंक-राजस्थानीउपन्­यास 16. काळवी विशेषांक-संपादन 17. गजरो-संपादन 18. दातार-राजस्थानी उपन्यास 19. लिछमी राजस्थानी उपन्यास 20.त्रिवेणी-हिन्दी उपन्यास 21. बटीड-कहाणी संग्रै 22. स्म्रतियों के गवाक्ष-हिन्दी संस्मरण 23. ममता-हिन्दी संस्मरण 24. जुगत-राजस्थानीसंस्­मरण 25. मीरांबाई-जीवन व्रतांत 26. चमत्कार 27. आचार्य सप्तरिषी 28. पगली 29. खेजडी-राजस्थानी उपन्यास 30. किरण-राजस्थानीउपन्­यास 31. सगत-राजस्थानी ऐतिहासिक नाटक 32. मंगती-उपन्यास ।
।।।।।।।।।

    राजपुरोहित समाज और राजस्थान का सर साहित्य द्वारा गर्व से ऊंचा रखने वाले श्री देवकिशनजी राजपुरोहित का हम सह्रदय से सम्मान करते है ।

  प्रिय बन्धुओं आपको हमारी ये पहल कैसी लगी हमे जरूर बताएं ,
      आप भी राजपुरोहित समाज के साहित्यकार , संगीतकार या खेल से जुड़ी प्रतिभा के बारे में हमे लिखकर भेज सकते है ।
    ये जानकारी हर बन्धु पढ़े इसलिए इस पोस्ट को शेयर जरूर करें ।

               जय श्री खेतेश्वर दाता री सा ।

         प्रस्तुतकर्ता:-  नरपतसिंह राजपुरोहित ह्रदय
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Tuesday, 22 May 2018

राजाजी श्री निर्मलनाथजी महाराज का जीवन परिचय

राजाजी श्री निर्मलनाथजी महाराज का जीवन परिचय

    श्री निर्मलनाथजी महाराज का जन्म गाँव मोदरा, जिला जालौर मे राजपुरोहित जागरवाल कुल मे विक्रम संवत 2039 मे मगसर शुक्लपक्ष नवमी को हुआ था, नाथजी के बचपन का नाम - नारायण था ।

        पिताजी का नाम ओखसिंह जी एवं मातश्री का नाम मुंगीदेवी है, निर्मलनाथजी चार भायों मे दुसरे नम्बर है, ननिहाल गांव ओटवाला जिला जालौर में है ।

        एक बार निर्मल नाथजी के माता पिता पुत्र प्राप्ति हेतु पीरजी श्री शान्तिनाथजी महाराज की शरण मे गयेे, और पुत्र प्राप्ति हेतु उन्होने पीरजी महाराज से आशीर्वाद मांगा, तो गुरुदेव ने भक्त की इच्छा पर उन्हें चार पुत्रो का आशीर्वाद दिया,  तब आपके माता पिता ने कहा कि, हे दाताश्री अगर हमे आपने चार पुत्र दे दिए तो एक पुत्र को हम आपकी सेवा मे अर्पण कर देगे ।

       पिरजी श्री शान्तिनाथजी महाराज की कृपा से ओख सिंह जी को एक के बाद एक चार पुत्रों की प्राप्ति हुई ।

       एक बार श्री शान्तिनाथजी महाराज मोदरा पधारे तो आपके पिताजी ने अपने चारो पुत्रो को नाथजी महाराज के समुख खडा कर दिया, और कहा कि हे गुरुवर ये चारो आपके कृपा की देन है, आप जिसे चाहे उसे अपनी शरण मे स्वीकार लो ।

        तब श्री शान्तिनाथजी  महाराज ने नारायण के सर पर हाथ धर दिया, और आदेश दिया कि " ॐ नम: शिवाय " जपते रहो, और नारायण का नाम करण " निर्मल ,, कर दिया, तब आपकी ऊमर दस वर्ष की थी, उस दिन के बाद से आप " हरी " की भक्ति मे लिन हो गये ।

      पन्द्राह वर्ष की ऊमर मे आपको विक्रम संवत 2057 चैत्रसुदी एकम की अमावश्सा को गुरुदेव जी के चरणों में सिरेमंदिर में अर्पण किया, कानो कुण्डल विक्रम संवत 2060 मे धार करवा कर पूर्ण नाथ बना कर निर्मलनाथ कहलाये, आप गुरुजी श्री शान्तिनाथजी महाराज की तन मन से सेवा करने लगे, एक दिन श्री शांतिनाथजी महाराज ने अपने शिष्य कमलनाथजी से कान फुकवा कर आपको उनका शिष्य बना कर श्री शान्तिनाथजी महाराज दादा गुरु बन गये ।

       श्री निर्मलनाथजी की कुटंब यात्रा सन् 2006 मे वैसाख सुदी चौदस को हुई ।

      कणीयागिरी पर्वत पर श्री जलंधरनाथजी महाराज की तपोस्थली सिरेमन्दिर पर आपने कर्म एवं भक्ति की एवं दादा गुरू श्री शान्तिनाथजी महाराज की सेवा तन मन से की थी, इसी कारण दादागुरु श्री शान्तिनाथजी महाराज के आशीर्वाद से ही आज आप नाथ संप्रदाय के राजा के पद पर कडली मठ मेंगलोर में विराजमान है

      श्री निर्मलनाथजी महाराज को सन 2015 अगस्त नाशिक कुंभ मेले में अखिल भारतीय नाथ सम्प्रदाय के समस्त साधु संतों, पीठाधीशो, शंकराचार्यो एवं योगियों द्वारा नाथ सम्प्रदाय के राजा के लिए निर्विरोध चुना गया

   श्री निर्मलनाथजी महाराज पैदल नाशिक कुंभ मेले से झुन्डी यात्रा द्वारा 8 महीने में मेंगलोर पहुंचे थे, एवं 7 मार्च 2016 को राजाजी का गादी तिलक हुआ था

       श्री निर्मलनाथजी महाराज दादा गुरु पीरजी श्री शान्तिनाथजी महाराज की असीम कृपा एवं श्री गंगानाथजी महाराज के पूर्ण सहयोग से अखिल भारतीय नाथ सम्प्रदाय के राजा के पद पर आसीन हुए

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      आप भी अपना पूर्ण परिचय हमें अपने फोटो के साथ हमें WhatsApp कर सकते हैं हमारा WhatsApp नंबर है 9286464911 हम उसको जल्द ही प्रकाशित करेंगे।


Sunday, 26 November 2017

युवाओं के प्रेरक, यारों के यार शिशुपाल सिंह निम्बाड़ा का परिचय

    मारवाड़ के पाली जिले के गांव निम्बाड़ा के एक युवा शख्सियत जिन्होंने समाज सेवा हो या राजनितिक क्षेत्र या फिर बॉलीवुड या फैशन की दुनिया सब जगह अपनी साफगोई शख्सियत,मिलनसार व्यवहार,ओजश्वी वाणी की बदौलत एक मुकाम हासिल किया और अपनी अद्भुत छवि के साथ सब के दिलों पर राज किया और कर रहे है ।

                     ◆ ◆ ★ ◆ ◆
  ● उस शख्सियत से आप सब परिचित है क्योंकि उस शख्सियत का नाम है, समाज के लाडले ,युवाओं के प्रेरक, यारों के यार शिशुपाल सिंह निम्बाड़ा वेसे आप परिचय के मोहताज नहीं क्योकि आपका सब से सीधा जुड़ाव अपने आप में अनूठा है फिर भी में आपका परिचय आप सब के समक्ष रखने की जुर्रत कर रहा हु ।
                          ◆ ★ ◆
   श्री शिशुपाल सिंह जी का जन्म समाज के प्रतिष्टित गांव निम्बाड़ा में आदरणीय श्री रामगोपाल सिंह जी गुंदेचा के पुत्र के रूप में हुआ और आप बचपन से ही प्रतिभाशाली रहे और सदैव विधायालय में अग्रणी स्थान पर रहते अपनी शिक्षा पूर्ण की और कॉलेजे  समय से ही आप समाज सेवा कार्यो में अग्रणी रूप से कार्य करने लगे और छात्र राजनीति में सक्रिय होकर छात्र हितों के लिए आवाज उठाने लगे ।।

                    ●सेवा कार्य -सोशल लाइफ●
    अध्यन के बाद आप कई समाजिक संगठनों,राष्ट्रीय अन्तराष्ट्रीय एन जी ओ के माध्यम से समाज सेवा कार्यो में सक्रियता से सेवा कार्यो में अग्रणी रहे जिसमे इंडियन रेड क्रोस सोसायटी के माध्यम से रक्त दान में सदैव अग्रणी रहे , बचपन बचाओ आन्दोलन के कॉर्डिनेटर, अरावली विकास संस्थान,लायंस क्लब, जय जैनेंद्र सेवा संस्थान, श्री महावीर चिल्ड्रन सेवा संस्था, श्री खेतेश्वर युवा मंच, ब्राह्मण महासभा,यूथ बोर्ड राजस्थान, सहित संस्थानों के आप ट्रस्टी ,सलाहकार,सरक्षक रहते हुए सदैव समाजिक सेवा कार्यो में अग्रणी भूमिका का निर्वहन किया वही आपको समय समय पर सेवा कार्यो के लिए प्रदेश स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक के अवार्डों से नवाजा गया,इंडियन रेड़ क्रोस सोसायटी द्वारा अग्रणी रक्तदान दाता के रूप में,महाराष्ट्र सरकार द्वारा कला एवं सस्कृति को बढ़ावा देने के लिए आपको पुरुष्कार से नवाजा गया स्काऊट गाइड का रोवर सम्मान और कई मर्तबा आपकी समाज के प्रति निष्ठा सेवा भाव को देखते हुए समाज के केंद्र आसोतरा धाम के साथ समाज के अग्रणी मंचों से आपका अभिनन्दन किया गया ।
                         ● कैरियर ●
   आपने अपना कैरियर फ़िल्मी दुनिया से शरू किया और मारवाड़ के पाली जैसे शहर से मुंबई की चकाचोन्ध चाँदनी में जाकर कुछ ही समय में फ़िल्मी दुनिया में अपना वजूद कायम कर लिया , फिल्म जगत ले बादशाह सलमान खांन,प्रीयका चोपड़ा,अक्षय कुमार,कैटरीना कैफ, गोविंद,करीना कपूर जैसी नामचीन फ़िल्मी हस्तियों से आपकी दोस्ती सदैव चर्चा में रही है,आपने कई फिल्मों में मुख्य रोल निभाया तो कई फिल्मों में रोल निभाते हुए अपनी प्रतिभा को प्रदर्शित किया और इसके साथ आपने फैशन शौ आयोजित करवाने शरू किये और आपने अब तक कई मर्तबा देश विदेश में फैशन शो का सफल आयोजन करवा कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा दिया और बॉलीवुड में आज आपका नाम परिचय का मोहताज नहीं,साथ ही आपने अपना बिजनश फ़िल्मी दुनिया में शरू किया और आप कई कंपनियों के सलाहकार, कॉर्डिनेटर और पार्टनर है ।

                          ● राजनितिक ●
      विद्यार्थी जीवन से ही आपमें नेतृत्व गुण विद्यमान रहे और छात्र जीवन में आपने छात्र राजनीति के माध्यम से छात्र हितों के लिये सदैव प्रयास किया वही आप कांग्रेस पार्टी से जुड़े और आपने युवक कांग्रेस तथा पार्टी में जिला स्तर से प्रदेश स्तर पर पार्टी के कई महत्वपूर्ण पदों की जिमेवारियो का निर्वहन करते सदैव आम जन हित कार्यो में आपकी रुचि रही ,कई बार आपने विधान सभा,लोक सभा चुनावों का कुशल संचालन किया,आपकी निष्ठा और समर्पण भाव को देखते हुए समय समय पर आपको पार्टी ने महत्वपुर्ण जिमेवारिया सुपुर्द की जिसमे रास्ट्रीय स्तर पर आपको ऑल इंडिया हैंडीक्राफ्ट बोर्ड डॉयरेक्टर की जिमेवारी दी गई वही आपको बाल श्रम कल्याण बोर्ड जैसे प्रमुख बोर्ड के उपाध्यक्ष की जिमेवारी देकर केंद्र लेवल पर राज्य मंत्री का दर्जा दिया गया और आपने अपने कार्यकाल में पूर्ण निष्ठा के साथ बाल कल्याण के कार्य करते हुए आम गरीब को सहयोग किया और सरकार के बाल श्रम कल्याण बोर्ड की सार्थकता सिद्ध कर दी, वही आप भारत सरकार द्वारा गठित कई सरकारी प्रतिनधिमंडलो के सदस्य रहे और कई मर्तबा विदेश यात्राएं कर देश विदेश के मंचों से अपने विचार रखे ।
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    वर्तमान में भी आप राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस पार्टी से जुड़े हे वही आप लगातार समाजिक संगठनों के माध्यम से समाज सेवा कार्यो में सक्रिय है और समाज के हर कार्यक्रम में आपकी उपस्थिति लगभग देखी जाती हैं आप जैसे कर्मठ समाज सेवी युवा व्यक्तित्व के धनी, सफल राजनेता से समाज अपने आपको गौरवान्वित महसूस करता है मंगलमय शुभकामनाओ के साथ.....

       लेखक श्री भैरु सिंह राजपुरोहित
     
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